Soil Erosion Meaning In Hindi मृदा अपरदन क्या हैं अर्थ कारण समाधान

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पृथ्वी के ऊपरी सतह पर उपस्थिति बारीक कणो को मिट्टी या मृदा कहा जाता है। जिसे मृदा, धूल, माटी, जमीन, रज आदि के नाम से भी जाना जाता है। समान्यत: भारत मे 6 प्रकार की मिट्टी पायी जाती है। जो की उसके जलवायु पर निर्भर करती है। तथा सभी मिट्टीयों मे भिन्न-भिन्न गुण पाये जाते है। अर्थात कृषि के दृष्टि कोण से देंखे तो कुछ मिट्टी अधिक उपजाऊ तो कुछ कम होती है। सभी मिट्टियो मे समान प्रकार के तत्व नही पाये जाते ।

मिट्टी मानव जीवन के साथ-साथ अन्य जीवोंं के लिये भी जरुरी है। इसलिये इसका बचाव करना आवश्यक है। खासकर मिट्टी को प्रभावित करने वाले मुख्य कारको मे से मानव जीवन यानी की हम सबसे पहले आते है। इसलिये हमारा कर्तव्य बनता है की मिट्टी का बचाव करे व लोगो को इससे जुडी जानकारी दे। आइये जानते है की मिट्टी क्या है ? मिट्टी का अपरदन, प्रभाव, दुषप्रभाव व महत्वपूर्ण कारक।

मृदा अपरदन क्या है Soil Erosion Meaning In Hindi

मृदा अपरदन अर्थात मिट्टी का कटाव, इसे अंग्रेजी भाषा मे स्वायल इरोजन (Soil Erosion) कहते है। मूलरुप से किसी भी प्रकार से मिट्टी के कटाव को मृदा अपरदन कहाँ जा सकता है। तथा इस कटाव के कारण को मृदा अपरदन कारण कहते है। अधिकतर यह कार्य प्रकृति करती है परंतु इसका कारण मानव होता है। जैसे की अधिक वर्षा के कारण मिट्टी का बह जाना, अधिक हवा(तूफान) के कारण धूल का अधिक उडना, आदि।

मृदा अपरदन की परिभाषा – मृदा अपरदन प्राकृतिक रुप से घटित एक भौतिक प्रक्रिया है। जो जल व वायु जैसे जैविक व अजैविक कारको द्वारा मृदा (मिट्टी) को प्रभावित किया जाता है। जिससे मिट्टी एक स्थान से दूसरे स्थान पर चली जाती है। इस प्रक्रिया को मृदा अपरदन या मिट्टी का कटाव कहा जाता है।

मिट्टी हमारे पर्यावरण की नींव है। जिसका निर्माण प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा चट्टानों को छोटे कणों (बारीक कणों) में बदलने से होता है इस प्रक्रिया को अपक्षय कहते है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रुप से होती है इसलिये इसमे अम्लीय रसायन जैसे पानी, हवा में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, बैक्टीरिया आदि बड़ी भूमिका निभाते हैं।

मृदा अपरदन के प्रकार

समान्यत: मृदा अपरदन के दो मुख्य कारण माने जाते है। 1. जल अपरदन 2. वायु अपरदन, लेकिन अन्य कारण भी सम्भव है। जैसा की हम जानते है की मिट्टी के कटाव को ही मृदा अपरदन कहते है। इसलिये मिट्टी को प्रभावित करने वाले सभी कारण मृदा अपरदन के प्रकार कहलायेंगे। लेकिन इसके कुछ निम्नलिखित प्रकार है। जो मृदा अपरदन का मुख्य कारण बनते है। जैसे कि-

जल अपरदन – जिस प्रक्रिया द्वारा जल, मृदा या मिट्टी को प्रभावित करता है। या मिट्टी का अपरदन करता है। उसे जल अपरदन कहते है। जल अपरदन के मुख्य घटक – वर्षा जल अपरदन, धारा तट अपरदन, परत अपरदन, रिल अपरदन आदि

वायु अपरदन जिस प्रक्रिया द्वारा वायु (हवा) मृदा या मिट्टी को प्रभावित करता है। या मिट्टी का अपरदन करता है। उसे वायु या पवन अपरदन कहते है। वायु अपरदन के मुख्य घटक – अधिक तेज हवाये, यह मिट्टि के नुकसान के अलावा, पेड-पौधो को भी अधिक प्रभावित करती है।

मृदा अपरदन का मुख्य कारण

मृदा अपरदन एक प्राकृतिक रुप से घटित होने वाली घटना है। जिसका मुख्य कारण प्राय: जल व वायु होते है। जो निम्न है।

  • वृक्षों का अधिक कटाव
  • भूमि को बंजर (खाली) छोड़ना
  • जंगलो में आग लगना
  • अनियमित फसल चक्र अपनाना
  • सिंचाई की त्रुटिपूर्ण विधियाँ अपनाना
  • अधिक ढलान क्षेत्र में कृषि करना (आदि)1

मृदा के प्रकार types of soils in hindi

भारत मे मुख्यत: 6 प्रकार की मिट्टी पायी जाती है। जो निम्नलिखित है।

  1. जलोढ़ मृदा
  2. काली मिट्टी
  3. लाल मिट्टी
  4. लैटेराइट मृदा
  5. मरुस्थली मृदा
  6. वन मृदा

जलोढ़ मृदा

नदियो के बहाव द्वारा लायी गई मृदा को इस मिट्टी को जलोढ़ मृदा कहते है। अर्थात जल के द्वारा लायी गयी मृदा को जलोढ़ मृदा कहते है। इसका विस्तार भारत मे 40% से अधिक है। इस मिट्टी को कछार या रेतीली मिट्टी भी कहते है। मुख्यत: इस मिट्टी मे गेहू, आलू, धान जैसे आदि अनाजो का पैदावार अधिक होता है।

काली मृदा

जैसा की नाम से ही पता चल रहा है की काले रंग की मिट्टी को काली मिट्टी या मृदा कहते है। यह मिट्टी महराष्ट्र व गुजरात मे अधिक पायी जाती है। इसका निर्माण ज्वाला मुखी के उदगार के कारण हुआ है।

काली मिट्टी मे फास्फोरस, नाइट्रोजन, एलूमिनियम, आयरन, आदि खनिज तत्व प्रचुर मात्रा मे पाये जाते है। इस मिट्टी मे कपास, चना, तिल, मसूरी, जैसे अनाजो का पैदावार अधिक होता है।

लाल मृदा

लाल मिट्टी का निर्माण ग्रेनाइड के चट्टानो के टूटने से हुआ है। यह मृदा तमिलनाड्डू, झारखण्ड, मध्यप्रदेश जैसे राज्यो मे अधिक पाया जाता है। आपको बता दू यह मिट्टी अधिक उपजाउ नही होती। फिर भी इसके मुख्य फसल निम्न है। जैसे – बाजरा, ज्वार. मकाई,

लैटेराइट मृदा

लैटेराइट मिट्टी का रंग भी लाल होता है। चुकी अधिक वर्षा होने के कारण इससे चूना व पत्थर बह कर अलग हो जाते है। जिसके य सूखकर लोहा समान मजबूत हो जाता है। इसमे लौह ऑक्साइड एवं अल्यूमिनियम ऑक्साइड की मात्रा अधिक पायी जाती है।

यह मिट्टी सबसे अधिक भारत के केरल राज्य मे पायी जाती है। तथा इसके साथ असम, तमिलनाडु व कर्नाटक राज्य में भी पायी जाती है। इस मृदा की मुख्य फसल चाय, कॉॅफी एवं काजू आदि है।

मरुस्थली मृदा

जो मृदा मरुस्थली क्षेत्र मे पाये जाते है। उन्हे मरुस्थली मृदा कहते है। इस मृदा को अधिक शुष्क होने कारण इसे शुष्क मृदा भी कहते है। इसमे ज्वार, बाजारा, और तिलहन की खेती किया जा सकता है।

वन मृदा

जैसा की नाम से ही प्रतीत हो रहा की, वनो पे पायी जाने वाली मृदा को वन मृदा कहते है। यह मृदा अधिक वर्षा वनो वाली क्षेत्रो मे अधिक पायी जाती है।

नोट – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भारत की मिट्टी को 8 भागो मे बाटा है, जो निम्नलिखित है। (1) जलोढ़ मिट्टी (2) काली मिट्टी (3) लाल मिट्टी (4) लैटराइट मिट्टी (5) शुष्क मृदा (6) लवण मृदा (7) जैव मृदा (8) वन मृदा

मृदा प्रदूषण रोकने के उपाय prevent soil erosion meaning in Hindi

मृदा प्रदूषण का मुख्य कारण कोई अन्य नही बल्की मानव ही है। मानव अपने निजी स्वार्थ के लिये नानाप्रकार के रसायनो से बनी वस्तुयो का प्रयोग करता है। तथा उसके इस्तेमाल के पश्चात उसे भेक देता है। जो मृदा का कारण बनती है। मृदा प्रदूषण के कारण निम्न है। निम्न उपायों से मृदा अपरदन को रोका जा सकता हैं-:

  • प्लास्टिक का प्रयोग कम करना।
  • फैक्ट्रियो के अवसाद को उपजाऊ जमीन या जल स्रोतों में नहीं फेकना
  • खेती-किसानी मे अधिक रासायनिक उर्वरक का प्रयोग करने की बजाय प्राकृतिक खादों को प्रयोग करना.
  • पेड-पौधो का अधिक से अधिक रोपण करना.

मृदा से जुडी विशेष बाते Hindi meaning of soil erosion

अगर हम मृदा के महत्व की बात करें तो यह हमारे समाज की नींव है, वैश्विक खाद्य सुरक्षा की आधारशिला है, पर्यावरण, गरीबी में कमी, सस्ती ऊर्जा और भूख का पूर्ण उन्मूलन है।

मिट्टी आर्थिक और सामाजिक विकास में केंद्रीय भूमिका निभाती है। यह मनुष्यों, जानवरों और पौधों के अस्तित्व के लिए भोजन, चारा, फाइबर और नवीकरणीय ऊर्जा आदि आपूर्ति प्रदान करता है। इसलिए समय-समय पर इसका ख्याल रखना चाहिए। ताकि सतत् विकास सम्भव हो सके।

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