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ओजोन परत – ozone layer in Hindi

OZONE LAYER OVER EARTH

ओजोन परत – About Ozone Layer in Hindi

हमारी पृथ्वी के चारों और का वातावरण अलग अलग परतों से घेरा हुआ होता हैं. समस्त जीव क्षोभ मंडल में रहते हैं. इसके ठीक उपर लगभग 15-30 किलोमीटर की ऊंचाई पर समतापमंडल पाया जाता हैं. समताप मंडल में ही पृथ्वी का सुरक्षा कवच ओजोन परत(OZONE LAYER) पायी जाती हैं. ozone parat से संबंधित इस विशेष आर्टिकल में हम ozone parat के बारे मुख्य तथ्यों को जानेंगे. ओजोन परत क्या होती हैं? इसकी भौतिक स्थिति क्या हैं? वायुमंडल में ओजोन गैस का क्या महत्व है? ऐसे ही बहुत सारे सवालों को जानेंगे, फिलहाल के लिए इतना जान लीजिये की ओजोन परत(what is ozone layer in hindi) क्या होती हैं?

ओजोन क्या है – What is ozone

ओजोन वायुमंडल में पाए जाने वाला एक अणु हैं. एक ओजोन अणु तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से मिलकर बना होता है. ओजोन का रासायनिक सूत्र O3 है.

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ओजोन परत क्या हैं ?

समतापमंडल में ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं की एक परत पायी जाती हैं, इस परत को ओजोन परत कहते हैं. ओजोन परत पृथ्वी को चारों और से ढकती हैं.

ओजोन परत कैसे बनती हैं?

अगर सूर्य नहीं होता तो ओजोन परत(ozone parat) भी नहीं होती. ओजोन के निर्माण में सूर्य की भूमिका होती हैं. दरअसल जब पराबैंगनी किरणें सूर्य से आपतित होकर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं तो किरणें ऊपर के पांच मंडलों से समतापमंडल में आती हैं. समताप मंडल के ऊपर ऑक्सीजन नहीं होती हैं. पराबैंगनी किरणें(ultra-voilet) समतापमंडल में स्थित ऑक्सीजन के अणुओं को तोड़ देती हैं. ऑक्सीजन के अणुओं के टूटने पर टूटे हुए ऑक्सीजन के अणु दुसरे अणुओं से मिल जाते हैं. इस प्रकार ये अणु तीन परमाण्विक हो जाते हैं, और ओजोन का निर्माण हो जाता हैं.
ओजोन को अगर श्वास के रूप में लिया जाये तो यह फेफड़ो को ख़राब कर सकता हैं.

ओजोन परत पृथ्वी से कितनी दूरी पर है?

ओजोन परत पृथ्वी से 15-30 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं. चूँकि दूरियां समुद्र स्तर से मापी जाती हैं, इसलिए पहाड़ों और पर ओजोन की ऊंचाई कम होती हैं.

ओजोन परत किस मंडल में है ?

क्षोभमंडल की ऊंचाई धरातल से 10 किलोमीटर तक होती हैं. इसके बाद 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक समताप मंडल पाया जाता हैं. समताप मंडल में ही ओजोन लेयर पायी जाती हैं.

वायुमंडल में ओजोन गैस का क्या महत्व है?

पृथ्वी पर जीवन संभव होने का कारण ओजोन परत ही हैं. आपको यह ज्ञात होगा कि सूर्य से आने वाली अल्ट्रा-वोइलेट किरणें कैंसर जैसी घातक बिमारियों को पैदा कर सकती हैं, लेकिन ओज़ोन इससे पृथ्वी को बचाती हैं. इसलिए ओजोन परत को पृथ्वी का सुरक्षा कवच कहा जाता हैं. चलिए आपको यह बताते हैं कि वायुमंडल में ओजोन परत होने से क्या क्या फायदे होते हैं.

ओजोन से पर्यावरण पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव

ओजोन गैस एक माध्यम हैं, जो पृथ्वी और सूर्य के बीच के बीच स्थित हैं. यह गैस एक फ़िल्टर की तरह काम करती हैं. जो हानिकारक किरणों को अलग करता हैं. ओजोन गैस के फायदे निम्न हैं.

ओजोन पराबैंगनी किरणों से रक्षा करता हैं

गैस ओज़ोन सूर्य से आने वाली अल्ट्रा वोइलेट किरणों को अवशोषित करती हैं. ओजोन द्वारा UV-किरणों को अवशोषित करने पर नयी ओजोन का निर्माण होता हैं. इस प्रकार यह सुरक्षा परत पृथ्वी की रक्षा करती हैं.

ओजोन गंभीर बिमारियों से बचाती हैं

अगर अल्ट्रा वोइलेट किरणें पृथ्वी पर आपतित होती हैं तो निश्चित ही ये किरणें मानव और अन्य जीवों पर पड़ती हैं. इससे कई सारी गंभीर बिमारियों से ग्रासित होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं. अल्ट्रा वोइलेट से होने वाली बिमारियों में तवचा कैंसर(मेलेनोमा) समय से पहले बुढ़ापा, मोतियाबिंद, इम्युनिटी सिस्टम का कम होना. ये बिमारियाँ मानव जाति में हो सकती हैं.
अल्ट्रा वोइलेट से पेड़ पौधे की पत्तियां भी प्रकाश संश्लेष्ण की क्रिया ठीक तरह से नहीं कर पाती हैं. इस कारण से इनकी पत्तियां भी जल्दी सुख जाती हैं. ओजोन परत से इन सभी का बचाव हो जाता हैं.

जलीय जीवों की रक्षा

जिस प्रकार सूर्य से आने वाली अल्ट्रा किरणें रोशनदान या खिड़की से भी प्रवेश कर सकती हैं. इसी प्रकार uv-किरणें जल में भी प्रवेश कर सकती हैं. जल का तापमान कम हो या ज्यादा ये किरणें प्रवेश कर सकती हैं. लेकिन ओजोन से ये किरणें जलीय जीवों ता नहीं पहुँच पाती हैं.

क्या पृथ्वी पर ओजोन गैस पायी जाती हैं?

पृथ्वी पर ओजोन गैस पायी जा सकती हैं. जब कोयला या गैसोलीन को जलाया जाता हैं तो नाइट्रोजन के ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बन डाई ऑक्साइड गैसें निकलती हैं. इसके अलावा अत्यंत गर्मी में ऑक्सीजन टूट कर ओजोन का निर्माण कर सकती हैं. पृथ्वी पर ओजोन कपाय जन कोई बड़ा मुद्दा नहीं हैं.

लेकिन ओजोन परत का क्षय होना और uv किरणों का पृथ्वी पर आगमन होना यह एक खरतनाक विषय हो सकता हैं. इसका कारण एक ही हैं – ओजोन का क्षय होना.

ओजोन परत का क्षय क्या होता हैं ?

ओजोन परत का क्षय होने का अर्थ यह हैं कि वायुमंडल में इसके आकार का पतला होना. दरअसल जब पृथ्वी पर से जाने वाली CFC गैसे का जब ओजोन से मिलन होता हैं तो ओजोन से क्रिया कर इसका आकर को घटा देती हैं. इस प्रकार यदि कोई विशेष स्थान जहां से CFC का अधिक मात्रा में उत्पादन होता हैं तो वहां उपरी वायुमंडल में ओजोन की परत पतली हो जाती हैं.

ओजोन का क्षरण कैसे होता हैं ?

ओजोन का क्षरण तब होता हैं, जब ओजोन के बनने की दर नष्ट होने की दर से कम हो जाती हैं. जब वायु मंडल की सतह से क्लोरीन और ब्रोमीन के परमाणु ओजोन के समीप जाते हैं तो ये ओजोन के अणुओं को नष्ट कर देते हैं.
समताप मंडल में पहुँचने पर एक क्लोरीन परमाणु 100,000 से अधिक ओजोन अणुओं को नष्ट कर सकता है. वायुमंडल के उपरी तरफ से ओजोन का निर्माण होता हैं, और नीचे की तरफ से इसका क्षय होता हैं.

ओजोन क्षय का कारण क्या हैं ?

समताप मंडल में स्थित ओजोन गैस के समीप जब क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) और हैलोन गैसे पहुँचती हैं, तो रासायनिक प्रतिक्रियाओं का कारण बनते हैं. ये गैसे ओजोन के अणुओं को तोड़ते हैं.

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इस पोस्ट में आपने ओजोन परत के बारें में(about ozone layer in hindi) क्या जाना…

इस पोस्ट में हमने जाना कि ओजोन परत क्या होती हैं, वायुमंडल में इसका क्या महत्व हैं और ओजोन क्षय क्या होता हैं ? और ozone parat के बारें में कुछ कॉमन सवालों को जाना. अगर आप इसके बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो हमारे ब्लॉग से जुड़ सकते हैं या इसको डैशबोर्ड पर सेव कर सकते हैं.

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