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गौतम बुद्ध के उपदेश, बौद्ध धर्म की शिक्षा और विशेषताएं (teaching of buddha in hindi)

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गौतम बुद्ध के उपदेश, बौद्ध धर्म की शिक्षा और विशेषताएं

हमने एक पोस्ट महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन परिचय(gautam buddh ki jivan darshn) के बारें में लिखी हैं. उस पोस्ट में हमने महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन का सम्पूर्ण दर्शन करवाया था. नीचे लिंक हैं उस पोस्ट को जरूर पढ़े. इस पोस्ट में बौद्ध धर्म के सिद्धांत(bauddh theories in hindi), बौद्ध धर्म की शिक्षा, नियम और बौध धर्म से जुड़े कुछ उपदेश, जो की हमारे जीवन की दिशा को बदल देने वाले हैं. इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े और कुछ किस्सों को अपने जरुरत के हिसाब से अपने जीवन में जरूर उतारे. महात्मा बुद्ध से किसी ने पुछा की बुद्ध बनने के लिए क्या करना होगा? इसके उत्तर में महात्मा बुद्ध ने कहा की – बुद्ध बनने के लिए मेरे विचारों को सुनो और उनको अपने जरुरत के हिसाब से रूपांतरित करके अपने जीवन में उतारों.

बौद्ध धर्म के उपदेश(teaching of buddha in hindi)

हमने महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण 135 उपदेश(quotes) पर एक सम्पूर्ण पोस्ट लिखा हैं. यहाँ पर आठ बौद्ध धर्म के उपदेश(teaching of buddha) के बारे में जानेंगे, जिसमे से एक एक विचार जीवन को बदल देने वाला हैं. बौद्ध धर्म के आठ उपदेश

  1. वर्तमान ही ख़ुशी का रास्ता हैं.

महात्मा बुद्ध ने छ साल तक घोर तपस्या की, केवल यह जानने के लिए, कि असली ख़ुशी क्या हैं? दुःख का कारण क्या हैं? महात्मा बुद्धा की तपस्या का निचोड़ का कटु सत्य हैं की – मनुष्य की इच्छा ही सबसे बड़ा दुःख का कारण हैं. मनुष्य अपने भविष्य और भूत की घटनाओं की कल्पना में ही जीता हैं. जबकि उसको वर्तमान की उपलब्धि की ख़ुशी मनानी चाहिए.

  1. मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध हैं.

क्रोध को लेकर महात्मा बुद्ध का एक महत्वपूर्ण quote हैं – मनुष्य कभी अपने क्रोध के कारण से दण्डित नहीं होता बल्कि वह अपने क्रोध से ही दण्डित हो जाता हैं. हम किसी पर क्रोध करके किसी और का नहीं बल्कि खुद का ही नुकसान कर रहे हैं. इसलिए मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु क्रोध हैं.

  1. संदेह और शक की आदत सबसे भयानक होती हैं.

हमारा दिमाग और चित सबसे शांत उस अवस्था में होता हैं, जब दिमाग के अन्दर विचारों का घेरा बहुत कम हो. हमारा दिमाग हरदम कुछ न कुछ सोचता रहता हैं. कुछ-न-कुछ नए नए विचारो को जन्म देता रहता हैं. ये और और कुछ नहीं हमारे शक और संदेह ही हैं, जिनको सुलझाने के लिए हमारा दिमाग उनके उत्तर की तलाश में इधर उधर भटकता हैं.

  1. लोग आपको तभी इज्जत देंगे जब आप खुद पर जीत हासिल कर लेंगे.

स्वयं पर जीत को लेकर महात्मा बुद्ध का एक बड़ा ही अच्छा सुविचार हैं – दुनिया पर आप कितनी भी जीत हासिल क्यों नहीं कर लो लेकिन सबसे बड़ी जीत आपको तब हासिल होगी जब आप अपने खुद पर जीत हासिल कर लोंगे. तब प्रत्येक जीत आपकी होगी. चाहे वो हार ही क्यों नहीं हो.

  1. सूर्य, चन्द्र और सत्य कभी छुप नहीं सकते हैं.

हम चाह कर भी इस प्रकृति की घटनाओ को बदल नहीं सकते हैं. जिस प्रकार सूर्य और चन्द्र अपने समय पर दर्शन देते हैं ठीक उसी प्रकार सत्य भी समय आने पर अपना पर्दा उजागर करता हैं.

  1. लक्ष्य को पाने से अच्छा हैं यात्रा को ठीक से करना.

अच्छा, हम सभी अपने लक्ष्य के पीछे भागते हैं. हमको हमारा लक्ष्य मालूम हैं. आपने कभी ये विचार किया हैं की जब आपको लक्ष्य मिल जायेगा तब आप क्या करेंगे. निश्चिन्त ही हम तब नए लक्ष्य के पीछे भागेंगे? मतलब हम संतुष्ट अवस्था में कभी आ ही नहीं पाएंगे. इसलिए हमको वर्तमान में जीना चाहिए. और वर्तमान में हम सभी लक्ष्य की यात्रा कर रहे हैं. अगर आपने कभी लक्ष्य को हासिल किया है तो वह आपका भूत था. निश्चिन्त आज आप भी अपने लक्ष्य के पीछे ही भाग रहे हैं.

  1. बुराई को सिर्फ प्रेम से ही जीता जा सकता हैं.

अच्छाई और बुराई दो पहलु हैं, जिसमे बुराई, बुराई को उत्पन्न कर सकती हैं, बुराई से कभी अच्छाई की उत्पत्ति नहीं होती हैं. लेकिन अच्छाई, बुराई को समाप्त कर सकती हैं. बुराई पर अच्छाई की विजय की अनेक कहानिया भी आपने सुन रखी होंगी.

  1. खुशियों को जितना बाटोंगे उतनी बढती रहेगी.

महात्मा बुद्ध कहते हैं की एक मोमबत्ती के सहारे सैकड़ों दीपकों को प्रज्वल्लित किया जा सकता हैं, फिर भी मोमबत्ती की रौशनी कम नहीं होगी. ठीक उसी प्रकार खुशियाँ बांटने से कभी कम नहीं पड़ती हैं. बल्कि बढती ही हैं.

अच्छा, आप ये तो समझ गए होंगे की महात्मा बुद्ध के उपदेश जीवन को बदलने वाले हैं, इसको चरितार्थ करने पर एक महात्मा बुद्ध और एक नव निर्वाचित भिक्षु का किस्सा हैं, चलिए मैं आपके साथ शेयर करता हूँ.
एक बार महात्मा बुद्धा की शरण में नया भिक्षु आया. जब कभी कोई महात्मा बुद्ध की शरण में आता तो उसको महात्मा बुद्ध के उपदेश सुनने पड़ते थे. उपदेश सुनने के साथ साथ उन पर अमल भी करना पड़ता था. तब जाकर कोई सच्चा भिक्षु बनता था. एक नया भिक्षु आया, पिछले एक महीने से वह भिक्षु बुद्ध को सुन रहा था. एक महीने के बाद वह भिक्षु बुद्ध के पास आया और बोला – मैं पिछले एक महीने भर से आपको सुन रहा हूँ लेकिन मुझमे कोई सुधार नहीं हुआ हैं, कृपया करके आप नुझे बताएं की क्या मुझमे कोई कमी हैं, य अकोई कारण हैं, जो मेरा कल्याण नहीं होने दे रहे हैं.
बुद्ध ने उस भिक्षु से एक प्रश्न किया. तुम कहाँ रहते हों? भिक्षु ने जवाब दिया – मैं श्रावस्ती गाँव में रहता हूँ. महात्मा बुद्ध उससे फिर पूछते हैं, अच्छा तुम वहां कैसे जाते और यहाँ कैसे आते हों? भिक्षु ने उतर दिया – मैं बैल गाड़ी से या घोड़े से या चलकर यहाँ आता हूँ. बुद्ध फिर एक प्रश्न करते हैं अच्छा तुमको कितना समय लगता हैं? भिक्षु अपना हिसाब लगाकर समय बताता हैं. बुद्ध फिर एक प्रश्न करते हैं – अच्छा तुम यहाँ बैठे बैठे अपने गाँव पहुँच सकते हो? भिक्षु ने उतर दिया – नहीं. इसी के साथ वह समझ गया की केवल प्रवचन सुनने से कल्याण नहीं होने वाला हैं. कल्याण के लिए इन प्रवचन के पथ पर चलना पड़ेगा.
बुद्ध के विचारो को सुनकर, उनका अनुसरण करके, अपने अनुसार ग्रहण करना सच्चा भिक्षु कहलाता हैं. और वही सच्चा बुद्ध भी हैं. – एसा महात्मा बुद्धा कहते हैं.

महात्मा बुद्ध की मूर्तियाँ और तस्वीरे हमेशा इतनी शांत क्यों दिखाई देती हैं ?

महात्मा बुद्ध ने छ सालों तक तपस्या की. इन छ सालों के दौरान महात्मा बुद्ध ने अपने शरीर को खूब तपाया और घोर कष्ट दिया. महात्मा बुद्ध की तपस्या करने का कारण उनके सवाल थे. तपस्या के खत्म होने पर बुद्ध को उनके सवालों के जवाब मिल गए थे, सच्चाई से परिचित हो गए थे. इसलिए उनकी सारी इच्छाएं, मोह, क्रोध सब कुछ मिट चूका था. उन्होंने खुद पर जीत हासिल कर ली थी. इसलिए महात्मा बुद्ध के मन में कोई नया विचार उत्पन्न नहीं होता था. अगर कोई विचार उत्पन्न होता तो उसका उत्तर उनके भीतर मौजूद होता. अत: महात्मा बुद्ध की मूर्तियाँ शांत, नम्र दिखाई देती हैं.

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बौद्ध धर्म की विशेषताएं

महात्मा गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की. महात्मा बौद्ध जीवन काल में बौद्ध धर्म की केवल एक ही विचारधारा थी. लेकिन बौद्ध के महापरिनिर्वाण के कुछ समय पश्चात बौद्ध धर्म दो धाराओं में बंट गया था. महात्मा बुद्ध के प्रत्यक्ष बौध धर्म की विशेषताएं –
बौद्ध धर्म अहिंसा और सत्य पर आधारित हैं.
बौद्ध धर्म की स्थापना के वक्त भारतीय समाज चार वर्णों में विभाजित हो चूका था. इसलिए भेदभाव की समस्या बहुत साधारण थी. बौद्ध धर्म सभी वर्णों को बराबर हक़ देता हैं. तात्कालिक समाज में महिलाओं की स्थिति ठीक नहीं थी. महिलाओं का मंदिर पर जाने और पवित्र कार्यो को करने महिलाओं को अपशगुन माना जाता था. लेकिन बौद्ध धर्म ने महिलाओं को भी भिक्षुणी बनने दिया. अर्थात बौद्ध धर्म महिलाओं और पुरुषो को समान अधिकार देता हैं.
बौद्ध धर्म तार्किक विचारों पर आधारित हैं, जिसमे किसी भी तरह से कोई अंधविश्वास नहीं हैं.
बौद्ध धर्म किसी भी तरह से किसी प्रकार के पशुबलि जैसे निंदनीय काम को प्राथमिकता नहीं देता हैं.

बौद्ध धर्म के संप्रदाय

महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन काल में अग्रणी होकर बौद्ध धर्म को फैलाया. बुद्ध के अनुयायियों में किसी विचार पर यदि कोई मतभेद हो जाता तो महात्मा बुद्ध उन पर अपना निर्णय देते. लेकिन समय बीतने के साथ बौद्ध धर्म की दो विचार धारा बन गई. लगभग पहली शताब्दी, कनिष्क के काल में जब बौद्ध की चौथी संगीति हुई थी, तब बौद्ध धर्म दो विचारधारा हीनयान और महायान में बंट गया.

हीनयान

हीनयान विचारधारा के लोगो ने महात्मा बुद्ध के भगवान् होने की निंदा की अर्थात हीनयान विचारधारा के लोगो ने महात्मा बुद्ध को केवल एक इन्सान माना. हीनयान विचार के भिक्षु बुद्ध की मूर्ति की पूजा नहीं करते थे. जबकि बुद्ध के विचारों की पूजा करते थे.

महायान

महायान विचारधारा के लोग बुद्धा की पूजा करते थे और बुद्ध को भगवान का दर्जा देते थे. महायान विचार धारा के लोग महात्मा बुद्ध को भगवान विष्णु का दसवां अवतार मानते थे. महायान विचारवादी बुद्ध की पूजा के साथ साथ बुद्ध के विचारों की पूजा करते थे.

देखा जाये तो दोनों विचारधाराओ में केवल मूर्ति पूजा का ही अंतर हैं. शेष सभी विचारों में दोनों की समानताएं हैं.

महात्मा बुद्ध के अष्टागिंक मार्ग

महात्मा बुद्धा के उपदेश, प्रवचन, उनकी शिक्षा सभी कर्म पर आधारित हैं, जिसकी तुलना अगर गीता से करे तो कोई बड़ा अंतर नहीं होगा. महात्मा बुद्ध भी यहीं कहते हैं कि यह संसार कर्म पर टीका हुआ हैं. बौद्ध धर्म की भाषावली में ज्ञान की प्राप्ति, मोक्ष की प्राप्ति, निर्वाण सब कुछ केवल कर्म से ही संभव हैं. बुद्ध ने कर्मो की शुद्धि के लिए चार आर्य सिद्धांत और आठ अष्टागिंक मार्ग बताएं हैं, जिनके जरिये कोई भी मनुष्य अपने कर्मो को शुद्ध करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकता हैं.
इस संसार में दुःख का कारण इच्छा हैं. और बौद्ध धर्म इचछाओं को नियंत्रित करना ही सिखाता हैं.

महात्मा बुद्ध के द्वारा बताये गए अष्टागिंक मार्ग निम्न हैं. यहाँ पर सम्यक का अर्थ हैं – उचित.

सम्यक दृष्टि

हमारी पांच इन्द्रियों में आँख भी एक हैं. इन्द्रियों के जरिये हमको बाहरी वस्तुओं का आभास होता हैं. हम इन नेत्र के जरिये जो देखते हैं, जो महसूस करते हैं, कुछ देखने के पश्चात् जिस भाव की हमको अनुभूति होती हैं, इन सभी का उद्भव हमारी इच्छाओं के जरिये होता हैं. केवल दृष्टि के जरिये हम लोभ मोह काम में बांध जाते हैं. इसके लिए बौद्ध धर्म में सम्यक दृष्टि(उचित दृष्टी) को एक मोक्ष महत्वपूर्ण मार्ग माना हैं.

पूर्ण संकल्प

किसी लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सबसे पहले जरूरी हैं, विचार करना और उसके बाद उसको हासिल करने का संकल्प करना. संकल्प के बिना हम निश्चित नहीं हो पाते, की हम अपने लक्ष्य तक पहुंचेंगे या नहीं.

पूर्ण प्रयास

बुद्ध का अगला सबसे महत्वपुर्ण कदम हैं – पुर्ण प्रयास. अगर हम अपने कर्म को पुर्ण प्रयास लगाकर नहीं करेंगे तो हम किसी भी दौड़ में पीछे रह जायेंगे, और अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाएंगे.

सम्यक वचन

हमारे जीवन की खुशियाँ और हमारे आचरण की झलक हमारे द्वारा बोले गये वचन से पता चलती हैं. इसलिए मधुर वाणी के साथ साथ हमारे वचनों को सम्यक बनायें.

सम्यक जीविका

इस जीवन को चलाने के लिए कुछ मुलभुत चीजो की आवश्यकता होती हैं, हम अपने आजीविका के लिए चीजें कहाँ से जूटाते हैं यह महत्वपूर्ण हैं. जीविका के साधन को सम्यक ढंग से जूटाना चाहिए, क्योंकि यहीं साधन हमारे शरीर का पालन पोषण करते हैं, इसलिए इनको सम्यक बनायें.

सम्यक कार्य

सब कुछ कर्म पर निर्भर करता हैं हमारे द्वारे किये गए कर्मो के फल को हमें भोगना पड़ता हैं. इसलिए कर्म को इस कद्र करे की उनका फल सदैव पुन्य की और आश्रित हो. इसलिए केवल सद्कर्म करें.

सम्यक स्मृति

अपनी बुद्धि को अच्छी बनाइये. क्योंकि बुद्धि के जरिये हम इस संसार को समझ पाएंगे, जितने अच्छे इस संसार को समझेंगे, उतने अच्छे तरीके से हम मोक्ष की तरफ अग्रसित होंगे.

सम्यक समाधि

अगर ऊपर बताये गए सिद्दांतों में सम्यकता रही तो हमरे मन से मौत का दर समाप्त हो जायेगा. तब मृत्यु एक जिंदगी का क्षण मात्र होंगा, जिसका आनंद भी हम ले पाएंगे.

इस पोस्ट के जरिये हमने आप तक महात्मा बुद्ध के उपदेश, उनके जीवन के सिद्धात, बौद्ध धर्म की विशेषता, अष्टागिंक मार्ग आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा की हैं. इसके अलावा हमने आपके साथ कुछ महात्मा बुद्ध की कहानियां भी शेयर की हैं. अगर आप महात्मा बुद्धा के जीवन से जुडी कहानियों को पढना चाहते हो तो नीचे लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं.

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