Lohe ka rate today लोहे का आज का रेट 2022

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यहाँ लोहे के रेट और इसके सम्बंधित विषय के बारें में जानकारी दी गयी हैं. लोहे के रेट के अलावा कुछ महत्वपूर्ण और आवश्यक जानकारी दी गयी हैं. जो आपके जनरल नॉलेज के लिए उपयोगी होगी.

2022 में लोहे का रेट जानने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान होना चाहिए जैसे कि लोहे का रेट क्यों बढ़ता हैं, लोहे का रेट कम कब होता हैं. लोहा खरीदने का उपयुक्त समय कौनसा होता हैं? इन तमाम सवालों का जवाब हम एक एक करके जानेंगे.

Lohe ka rate today

लोहे का प्रकारलोहे का रेट टुडे 2022
पुराने लोहे का रेट35-40 प्रति किलो
नये लोहे का रेट75-80 प्रति किलो

पुराने लोहे का क्या रेट हैं?

पुराने लोहे की रेट 35-40 रूपये प्रति किलो हैं.

नए लोहे का क्या रेट हैं?

नए लोहे का क्या रेट 75-80 रूपये प्रति किलो हैं.

पुराने और नए लोहे में क्या अंतर हैं?

आमतौर पर हमारे दैनिक जीवन में हमको दो तरह के लोहे मिल जाते हैं – पुराना और नया लोग. पुराना लोहा जिसे कबाड़ का लोहा भी कहा जाता हैं.

खदानों से निकले लोहे के शुदिकरण रूप को नया लोहा कहा जाता हैं. खदानों से चार तरह का लोहा लोहा निकलता हैं. मेग्नेटाइट, हैमेटाइड, लिमोनाइट, सिडेराइट. इन चारों में से मेग्नेटाइट, हैमेटाइड को अधिक उपयोग में लाया जाता हैं. क्योंकि इनमे धात्विक अंश ज्यादा पाया जाता हैं.

लोहे को एक बार इस्तेमाल करने के बाद इसका पुन: चक्रीकरण किया जा सकता हैं. इसलिए इसको वापस बेचा जाता हैं, जिसको कबाड़ का लोहा या पुराना लोहा कहते हैं.

लोहे का रेट क्यों बदलता हैं?

अगर आप 2021 से दिसम्बर 2021 तक के लोहे का भाव देखेंगे तो पायेंगे कि लोहे का रेट 55 प्रतिशत बढ़ गया हैं. इसका एक स्थायी कारण यह हैं कि खदानों में लोहे की कुछ कमी महसूस की गयी हैं.

देश भारत में लोहे की रेट NMDC द्वारा तय की जाती हैं. कमोडिटी मार्किट के हिसाब से NMDC टैक्स और कीमत निर्धारित करती हैं.

जब कोई ग्लोबल स्तर पर घटना होती हैं, जिससे आयात निर्यात व्यापर बाधित होता हैं, तब भी लोहे का रेट बदल जाता हैं.

कुल मिलकर विपरीत परिस्थितियों में लोहे का रेट बढ़ जाता हैं, जब ग्लोबल और कमोडिटी मार्किट में सभी स्थितियां सही रहती हैं, तो लोहे का रेट वाजिब रहता हैं.

उदहारण -: युक्रेन रूस युद्ध से ग्लोबल कमोडिटी मार्किट प्रभावित हुआ था. तो लोहे और स्टील के रेट में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई थी.

लोहे का रेट कब कम होगा?

लोहे की रेट भी डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता हैं. जब लोहे की मांग में कमी आती हैं तो स्वत: ही लोहे की रेट में कमी करनी होती हैं.

महंगाई बढ़ने पर रूपये की कीमत कम हो जाती हैं, उस स्थिति में हमको किसी सामान को खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती हैं.

इसलिए जब आपको कभी अख़बार में पढने को मिले की महंगाई बढ़ गयी हैं, तो उस समय लोहे का रेट अधिक होता हैं.

जब स्टॉक मार्किट अंडर वैल्यू होता हैं(कम समय में अधिक गिरावट) तो भी लोहे का रेट अधिक होता हैं.

इसलिए जब स्टॉक मार्किट अपनी रेंज में होता हैं, तो लोहे का रेट कम होता हैं.

इसके लिए आप निफ्टी और निफ्टी मेटल इंडेक्स को देख सकते हैं.

लोहा खरीदने का उपयुक्त समय कौनसा होता हैं?

जब अमेरिका ग्लोबल मार्किट(dow-jones) और निफ्टी बाजार सही तरीके से चल रहा हो तो उस स्थिति में लोहा का रेट सही रहता हैं. इस स्थिति में बाइंग करना ठीक हो सकता हैं. लेकिन इस वक्त भी कुछ और स्थितियों को देखना चाहिए जैसे सरकार ने इन पर को अतिरिक्त टैक्स न लगाया हो. इसके लिए आप मेटल न्यूज़ को देख सकते हैं. अगर आपको लोहे के बारें में यह जानकारी हेल्पफुल लगी हो तो हमारी दूसरी पोस्ट भी पढ़े.

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