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ध्वनि प्रदूषण(NOISE POLLTUTION) – कारण, प्रभाव और उपाय

girl pop and boys irritate

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ध्वनि प्रदूषण – noise pollution in hindi

एक और जहाँ दुसरे पर्यावरण प्रदूषण जैसे – वायु, जल और भूमि प्रदूषण में प्रदूषक के रूप में कोई भौतिक स्रोत उपलब्ध होता हैं, जबकि ध्वनि प्रदूषण(dhwani pradushan) में कोई भौतिक स्रोत न होकर कर एक तरंग एक प्रदूषक होती हैं. ध्वनि प्रदूषण के बारे में पूरी जानकारी आपको मैं आगे चलकर बताऊंगा, लेकिन अभी आप इतना जान लीजिये कि पूरे विश्व भर में एक बिलियन से ज्यादा लोग सुनने की समस्या से ग्रसित हो रहे हैं.(औसत उम्र 0 से 20 वर्ष, भारत के दिल्ली और मुंबई शीर्ष पर हैं.) इसका कारण केवल “ध्वनि प्रदूषण” हैं.

गलत तरीके से ऑडियो उपकरणों का उपयोग, भीड़ से उत्पन्न शोर, शार्प पॉप और हॉर्न, फेक्ट्री की मशीनों की आवाज़ आम थकान से लेकर गर्भपात तक की समस्याएं उत्पन्न कर सकता हैं. इस स्पेशल पोस्ट में मैं आपको ध्वनि प्रदूषण क्या है?[what is noise pollution], इसके कारण, होने वाले दुष्प्रभाव और कुछ आम कदम जो ध्वनि प्रदूषण को कुछ हद तक कम कर सके, सभी के बारे में विस्तार से बताएँगे. फ़िलहाल के लिए आवाज़ या ध्वनि(साउंड) और शोर(नॉइज़) में अंतर समझ लीजिये.

ध्वनि(SOUND) और शोर(NOISE) क्या हैं?

ध्वनि या साउंड वह हैं जिसको हमारे कान सुनना पसंद करते हैं, जबकि शोर एक अवांछित या कर्ण-अप्रिय ध्वनि हैं. ध्वनि और शोर के बीच का मूल अंतर श्रोता और परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाता हैं. किसी संगीत(MUSIC) को सुनना किसी के लिए अच्छा हो सकता हैं वहीँ किसी दुसरे के लिए अशांति(DISTURBANCE) का कारण बन सकता हैं. क्या आपको पता हैं हमारे कान आवाज़ को किस तरह से सुनते हैं?


जब कोई वस्तु(हमारा गला भी) कम्पन करती हैं तो ध्वनि या शोर उत्पन्न होता हैं. कम्पन के दौरांन उत्पन्न तरंगे हवा या दुसरे किसी माध्यम के जरिये हमारे कानों तक पहुँचती हैं. जब कोई कम्पन होता हैं तो हवा में एक दबाव उत्पन्न होता हैं. आप इस बात को ऐसे समझिये कि जब किसी ड्रम के ऊपर किसी डंडे से चोट मारी जाती हैं तो ड्रम की सतह आगे पीछे कम्पन्न करती हैं.

जैसे जैसे आगे की तरफ कम्पन होता हैं वैसे वैसे एक आवृति के साथ तरंगे आगे बढती हैं, जिसके चलते हवा में एक संपीडन होता हैं और उच्च दबाव का क्षेत्र बनता हैं. जब ड्रम की सतह नीचे की तरफ कम्पन्न करती हैं तो निम्न दबाव का क्षेत्र बनता हैं. दबाव की यह भिन्नता जब हमारे कानो तक पहुँचती हैं तो हमको सुनाई देता हैं.


अब इन तरंगो में से जो हमारे कानों को अच्छी लगती हैं वह ध्वनि हैं, जो हमारे कणों को अच्छी नहीं लगती हैं वह शोर हैं. ध्वनि, आवाज़ या शोर को मापने के लिए कुछ पेरामीटर का उपयोग किया जाता हैं. तरंग की प्रबलता यानी “आयाम” और पिच यानि “आवृति” के आधार पर ध्वनि का वर्णन किया जाता हैं. हमारे कान की सुनने की एक निश्चित क्षमता होती हैं, जिसकी परास को डेसिबल(dB) या आवृति(Hz) में मापा जाता हैं.

सामान्यत ध्वनि तरंगो आयाम एक विशेष सतत आवृति का अनुसरण करता हैं जबकि नॉइज़ में कोई विशेष पैटर्न नहीं होता हैं. इस बात को आप नीचे दिए गए तस्वीर से समझ सकते हैं.

FREQUINCY
sound vs noise freq.

ध्वनि प्रदूषण क्या हैं(noise pollution in hindi)

अप्रिय, अवांछित या अत्यधिक ध्वनि जो किसी मानव, वन्य जीव या पर्यावरण जगत को नुकसान पहुंचाता हैं ध्वनि प्रदूषण कहलाता हैं. ध्वनि प्रदूषण सजीव जगत और निर्जीव जगत दोनों के लिए हानिकारक हैं. ध्वनि प्रदूषण कीसी को बहरा होने के लिए भी योगदान करती हैं, तो वहीँ कोई ऊंचाई पर स्थित बिल्डिंग को भी कमजोर करती हैं.


हमारे कान 20 हर्ट्ज़ से लेकर 20000 हर्ट्ज़ तक की आवृति की ध्वनि को समझ सकते हैं. सामान्य तौर पर हमारे कानों की सुनने की दहलीज 0 डेसिबल(dB) से 130-140 डेसिबल(dB) तक होती हैं. 90 डेसिबल से ऊपर की ध्वनि कानो के अन्दर के भाग तक जाकर नुकसान पहुंचाती हैं, 140 डेसिबल के ऊपर अपरिवर्तनीय प्रभाव डालती हैं.


ध्वनि या शोर के चार प्रमुख गुण(characteristics of noise) – पिच(pitch), समय-अवधि(duration), तीव्रता(intensity) और टोन या लय(timbre) होते हैं.

शोर के प्रकार

जिसके पहले की मैं आपको ध्वनि प्रदूषण के प्रमख कारणों के बारे में बताऊ, आपको शोर के प्रकार[Different Types of Noise] के बारे में बता देता हूँ ताकि आपको इसके प्रकारों को समझने में आसानी रहेगी. शोर के प्रमुख चार प्रकार होते हैं. इनकी परिचय-मात्र जानकारी नीचे दी गयी हैं.

  1. लगातार चलने वाला शोर(Continuous noise)

Continuous noise में लगातार चलने वाली मशीनें जो बिना किसी रूकावट के लगातार चलती रहती हैं. इस प्रकार का शोर प्रदूषण कारखानों के उपकरण, इंजन का शोर द्वारा उत्पन्न होता हैं.

  1. रुक रुक कर होने वाला शोर(Intermittent noise)

आंतरायिक या रुक रुक कर शोर, तेजी से बढ़ता और घटता है। इस प्रकार का शोर ट्रेन के गुजरने से, या घर के ऊपर से गुजरने वाले विमान से उत्पन्न हो सकते हैं.

  1. आवेग या संवेगशील शोर(Impulsive noise)

अचानक से या जोर से होने वाले शोर-शराबे से उत्पन्न शोर जैसे कुछ तोड़ने वाली फेक्ट्री, फेरीवाले की आवाज़, सन्डे के दिन पड़ोसियों का शोर शराबा को इसमें शामिल किया जाता हैं.

  1. कम आवृत्ति वाला शोर

(Low-frequency noise) इस प्रकार के शोर से कोई भी हर वक्त हम ग्रसित रहता हैं, कम आवर्ती वाला शोर जैसे – दूर दूर से आने वाले ट्रक या रेलों की आवाज़, कपड़ो का शोर हो सकते हैं. यह शोर मीलों तक फैला रह सकता हैं.

ध्वनि प्रदूषण के कारण(cause of noise pollution)

ध्वनि प्रदूषण[NOISE POLLUTION] के अनेक कारण हो सकते हैं. यहाँ पर मनुष्यों और वन्यजीवों पर ध्वनि प्रदूषण के विभिन्न कारण, जो आम तौर पर पर्यावरण को प्रभावित करते हैं, नीचे दिए गए हैं.

  1. मशीनों द्वारा

अगर आप फेक्टरियों में काम करने वाले मजदूर लोगो से परिचित हो तो वे अक्सर ईअर प्लग पहन कर काम करते हैं. क्योंकि बड़ी बड़ी शोरगुल कंपनियों में चलने वाली मशीनें से उत्पन्न ध्वनि न केवल वहां काम करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता हैं बल्कि आस पास के क्षेत्र को भी शोर से प्रदूषित करती हैं. ऐसे इलाके के नजदीक अगर कोई शैक्षिक संस्था या निवास स्थान हो तो वहां पर रहने वाले लोगो का मानसिक संतुलन और ध्यान शक्ति पर बड़ी मात्रा में हानि पहुंचा सकती हैं. इन फेक्ट्रियों के अलावा कम्प्रेसर, जनरेटर, एग्जॉस्ट फैन, ग्राइंडिंग मिल, आरा मशीन जैसे विभिन्न उपकरण भी शोर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

  1. गलत तरीके से शहरी नियोजन

एक पानी के टैकर के पीछे लगने वाली लाइन और वहां पर होने वाले झगड़े से जरूर परिचित होंगे. भारत जैसे विकाशशील देश में अधिंकाश आबादी ऐसे इलाकों में निवास करती हैं, जनसंख्या घनत्व हद से ज्यादा हैं. अधिक भीड़ वाले स्थानों पर बने हुए छोटे घर, छोटे घर और बड़े परिवार, वहां पर उनके चलने वाले लघु व्यवसाय और बुनियादी सुविधाओं के लिए होने वाले झगड़ों से वहां पर अत्यंत शोर उत्पन्न होता है. इस प्रकार की घटनाये न केवल उनकी नींद को प्रभावित करता हैं बल्कि बच्चों के विकास में भी बाधा डालता हैं. आपको जानकर हैरानी होगी की दिल्ली में 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चो की श्रवण क्षमता पर पड़ने वाले कुप्रभाव का आंकड़ा प्रतिवर्ष बढ़ता जा रहा हैं.

  1. सामाजिक कार्यक्रम

जब आप कभी बाज़ार गए हो तो फेरी वालो ने आपके ध्यान को आकर्षित करने लिए जोर से आवाज़ जरूर लगाई होगी, और आज कल तो घर-गली के आस पास भी जोर जोर से आवाज़ लगाते हैं, आप उनकी आवाज़ से जरूर परिचित होंगे.
कोई भी सामाजिक कार्य में संभवत यह प्रयास किया जाता है स्पीकर की आवाज़ उच्चतम स्तर पर हो. चाहे शादी हो, पार्टी हो, पब हो, डिस्क हो या पूजा स्थल, हो या कोई पार्टी की मीटिंग लोग आमतौर स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं और उस क्षेत्र में स्थित सभी भवनों[बिल्डिंग्स] को हिला कर रख देते हैं.
लोग पूरी आवाज में गाने बजाते हैं और आधी रात तक नाचते झूमते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आसपास रहने वाले लोगों के नीद की हालत काफी खराब हो जाती है।

  1. वाहनों से उत्पन्न

भारत जैसे देश की बात करें तो यहाँ पर औधोगिक क्षेत्रो में जनसँख्या घनत्व अत्यधिक होता हैं, इसलिए वहां पर आबादी इतनी होती हैं कि हर वक्त सड़के, मेट्रो सभी खचा-खच भरे रहते हैं. सड़कों पर चलने वाले वाहनों के हॉर्न, गाड़ियों के इंजन से उत्पन्न होने वाली तरंगे आस पास रहने वाले लोगो, यात्रा करने वाले लोगो, इमारतों के लिए नुकसानदायक हैं.

सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहन के अलावा, घरों के ऊपर से उड़ने वाले हवाई जहाज, भूमिगत रेलगाड़ियाँ भारी शोर उत्पन्न करती हैं. एक एयरोप्लेन से आने वाला शोर 130 dB तक की आवाज पैदा कर सकता है, जो कि हमारी श्रवण क्षमता का उच्चतर स्तर 90 dB हैं.
इस प्रकार का उच्च शोर एक ऐसी स्थिति की ओर लेकर जाता है जो सामान्य स्वस्थ व्यक्ति को ठीक से सुनने की क्षमता को छीन लेता है।

  1. निर्माण गतिविधियां

विभिन्न इमारतों के निर्माण से लेकर, दुनिया भर के हर हिस्से में लगभग खनन, पुलों, स्टेशनों, सडकों, फ्लाईओवरों का निर्माण जैसी गतिविधियाँ चलती रहती हैं. इससे प्रभावित होने वालों का एक बड़ा वे लोग हैं जो इन गतिविधियों में भाग लेते हैं, जबकि इसके दूसरे हिस्से में वे लोग शामिल हैं जो अपने घरों से या यात्रा करते समय इस प्रकार के शोरों का सामना करते हैं।

  1. घरेलू काम

बढ़ती तकनीकी के दौर में हम सभी गैजेट्स से घिरे हुए हैं और अपने दैनिक जीवन में उनका बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं. टीवी, मोबाइल, मिक्सर ग्राइंडर, प्रेशर कुकर, वैक्यूम क्लीनर, वॉशिंग मशीन और ड्रायर, कूलर, एयर कंडीशनर जैसे गैजेट्स का शोर की मात्रा आपको मामूली लग सकती हैं. फिर भी, यह आपके पड़ोसियों के जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है।

  1. जानवरों की आवाज

इन सभी कारणों में कुत्ते की आवाज़ को नज़र अंदाज नहीं किया जा सकता हैं. कुत्ते की भौकने की आवाज़ 60-80 dB के आसपास शोर पैदा कर सकते हैं।

ध्वनि प्रदूषण से होने वाले प्रभाव

ऊपर हमने ध्वनि प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों और उन तमाम कारणों को जाना जिनके जरिये “ध्वनि का प्रदूषण” यानी शोर उत्पन्न होता हैं. लाउडस्पीकर से पैदा होने वाला शोर किसी भी बहुमंजिला ईमारत को भी हिला कर रख देता हैं. मानसिक संतुलन, ध्यान में कमी, चिडचिडापन से लेकर गर्भपात तक समस्याएं पैदा हो सकती हैं. यहाँ पर ध्वनि प्रदूषण से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ का सक्षेंप में वर्णन किया गया हैं. ध्वनि प्रदूषण का प्रभाव सम्पूर्ण पर्यावरण पड़ता हैं. सजीव, निर्जीव, पादप सभी पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता हैं.

  1. सुनने की समस्या

“सुनना” एक क्रिया हैं, अर्थात जब हमारा कान कुछ भी सुन रहा होता हैं, तब तक हमारे शरीर की एनर्जी कुछ हद तक खर्च होती रहती हैं. बाहरी स्रोतों से आने वाली सभी तरंगो को हमारा कान फ़िल्टर नहीं कर पाता हैं . सामान्यत वे तरंगे जिनको हमारा कान फ़िल्टर नहीं कर पाता हैं, वे तरंगे हमारे लिए घातक होती हैं. ज्यादा देर तक उच्च डेसिबल की ध्वनि सुनने से “सुनने” की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं.


ऊँची आवाज के लगातार संपर्क में आने से हमारे कान के परदे कमजोर हो सकते है और सुनने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे टिनिटस या बहरापन हो सकता है। उच्च ध्वनियाँ दूसरी ध्वनि के प्रति हमारी संवेदनशीलता को भी कम करता है.

  1. मानसिक संतुलन

रिसर्च के अनुसार जो लोग भीड़ वाले या उच्च ध्वनि के इलाके या कार्यालयों, निर्माण स्थलों, डांस क्लब, लाउडस्पीकर जैसे धार्मिक स्थलों के पास स्थित घरों को भी शामिल किया जा सकता हैं, ऐसे इलाकों के संपर्क में रहने से मनुष्य के साथ साथ जानवर के मानसिक संतुलन में गिरावट आती हैं. इंसानों का व्यवहार बिगाड़ जाता हैं, नींद में कमी, लगातार तनाव, अवसाद, चिंता, ब्लड प्रेशर का असुंतलन जैसी घटनाओं का सामना कर पड़ सकता हैं.

  1. शारीरिक समस्याएं

ध्वनि प्रदूषण[noise pollution] के कारण सिर में दर्द, उच्च रक्तचाप, श्वसन संबंधी समस्या और गैस्ट्राइटिस, कोलाइटिस और यहां तक कि दिल के दौरे की समस्या हो सकती हैं. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिलाओं में गर्भपात की समस्याएं भी ध्वनि प्रदूषण एक कारण बना हुआ हैं.

  1. व्यवहार का परिवर्तन होना

एक स्वस्थ दिमाग का समाज में व्यवहार एक कुशल और आदर्श होता हैं, क्योंकि उसका दिमागी संतुलन और उसके चारों ओर का वातावरण प्राकृतिक होता हैं. चाहे कोई भी प्रदूषक हो, पारिस्थितिकी को प्रभावित करता हैं. लगातार शोर[noise] मस्तिष्क की प्रतिक्रियाओं और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित करता है. जिससे समय के साथ यह अच्छे व्यवहार के प्रदर्शन का स्तर कम करता है. हमारे कान में प्रवेश करने वाली तरंगो को पढने का काम दिमाग करता हैं, जैसा की आपको बताया की हमारे कान और दिमाग एक निश्चित स्तर की तरंगो को ही समझ पाता हैं .

उच्च डेसिबल की ध्वनि तरंगे[शोर] बहुत अधिक मात्रा के कान में प्रवेश करता हैं अत: ये तरंगे मस्तिष्क में जाती है तो दिमाग के काम करने की दर या प्रतिक्रिया दर कम होती है और साथ ही मन सुस्त हो जाता है।
इस प्रकार के माहौल में रहने वाले विधार्थी की याददाश्त बहुत कमजोर हो जाती हैं, जिससे पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि रेलवे स्टेशनों या हवाई अड्डों के पास रहने वाले स्कूली बच्चों के दिमाग का स्तर कुछ सीमा तक कम हो सकता हैं.

  1. नींद की समस्या

हमारे शरीर का कोई निश्चित टाइम टेबल या रिद्हम नहीं होता हैं, इसलिए अगर सही तरीके से निश्चित पैटर्न का अनुसरण नहीं किया जाये तो बहुत कम समय में बड़े नुकसानदायक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. अत्यधिक उच्च स्तर का शोर सोने के पैटर्न में बाधा डाल सकता है, जिससे चिडचिडापन और असहज स्थिति पैदा हो सकती है. आप अगली सुबह अच्छे तरीके से शुरुआत नहीं कर पायेंगे.

  1. हृदय संबंधी समस्या

लाउडस्पीकर या शोर वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगो का रक्तचाप का स्तर, हृदय रोग और तनाव से संबंधित समस्याएं बढ़ रही हैं. हाई ब्लड प्रेशर का एक प्रभाव हैं की यह ह्रदय की धड़कन को बढ़ा देता हैं, जिससे प्रति मिनट पम्पिंग बढ़ जाता हैं.

  1. वार्तालाप में व्यवधान

उच्च डेसिबल का शोर लोगो को आपस में बात करने के लिए परेशान कर सकता हैं. वार्तालाप में व्यवधान से गलतफहमी हो सकती है, और आपको दूसरे व्यक्ति को समझना मुश्किल हो सकता है। लगातार तेज आवाज आपको तेज सिरदर्द दे सकता है और आपके भावनात्मक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

  1. वन्य जीवन पर प्रभाव

अगर आपको पता हो तो चमगादड़ अपने शिकार का पता लगाने के लिए ध्वनि तरंगो का उपयोग करते हैं. इसलिए शोर की तरंगे मानव समाज की भांति जानवरों के समुदाय को भी बुरी तरह प्रभावित करता हैं. ध्वनि प्रदूषण के कारण वन्यजीवों को मनुष्यों की तुलना में कहीं अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे ध्वनि पर अधिक निर्भर होते हैं.


बायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित एक ताजे अध्ययन में पाया गया कि वातावरण में फैले हुए शोर जानवरों की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित करता है।
शोर से जानवर आसानी से प्रभावित और विचलित हो जाते हैं, और कई व्यवहार संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं। जैसे, सुनने की क्षमता में व्यवधान होने पर कोई विशेष प्रजाति किसी का आसानी से शिकार बन जाती हैं, और इससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन प्रभावित होता हैं. अत्यधिक शोर से जानवरों के जनन क्रिया पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं.

  1. ऊंचाई पर स्थित भवनों के लिए समस्या

लाउडस्पीकर के शोर से उपन्न होने वाली तरंगे जब बार बार दीवारों से टकराती हैं तो दीवार कमजोर हो सकती हैं, और जनहानि का कारण बन सकता हैं. अक्सर रेलवे स्टेशन के आस पास के घरों में इसको महसूस किया जा सकता हैं.

ध्वनि प्रदूषण रोकने के उपाय[solution of noise pollution]

अब तक हमने ध्वनि प्रदूषण के कारण[cause of noise pollution] और इसके दुष्प्रभाव[bad effects of noise polluion] के बारे में जाना, लेकिन जब तक हम इस समस्या का निदान नहीं करेंगे तो इसके कुप्रभावों से बचेंगे कैसे? तो यहाँ पर ध्वनि प्रदूषण को कुछ सीमा तक कम करने के लिए कुछ उपाय हैं. अगर आप भी अपने आस पास के शोर से परेशान हैं तो सर्वप्रथम आप खुद शोर को कम करे. आपके द्वारा उत्पन्न की गई ध्वनि, आपके लिए आनंद का विषय हो सकता हैं, लेकिन आपके पड़ोसियों और आस पास वाले लोगो के लिए नहीं.
100 डेसिबल से अधिक ध्वनि हानि का कारण बन सकता हैं. यहाँ पर घर या कार्यालयों में ध्वनि प्रदूषण को कम करने के आसान और प्रभावी तरीके हैं,

  1. घर की खिड़कियाँ बंद करें

जब कभी शोर की स्थिति हो तो खिड़कियाँ बंद कर दे. केवल खिड़कियों को बंद करके हमारे घरों और इमारतों में प्रवेश करने वाले शोर की मात्रा को कम करना संभव है।

  1. इयरप्लग लगाएं

अधिक शोर वाली फेक्ट्रियां अक्सर अपने मजदूरों को ईयर प्लग लगाने का सुझाव देती हैं. क्योंकि ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए इयरप्लग पहनना एक किफायती उपाय है. इयरप्लग की एक जोड़ी सोते समय या दिन के किसी अन्य समय पर पहनी जा सकती है. जब कभी आप अपने कान के पर्दों पर भारी टकराव महसूस करते हैं, उस वक्त आप ईअर प्लग का इस्तेमाल कर सकते हैं.

  1. साउंड प्रूफ दीवारों का इस्तेमाल करें

म्यूजिक रिकॉर्डिंग और मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए ध्वनिरोधी [साउंड प्रूफ] कमरों का उपयोग किया जाता हैं. अगर आप ऐसे स्थान पर रहने के लिए मजबूर हो जहाँ पर शोर का स्तर अधिक हो तो, इसके लिए घर की दीवारों और छत में साउंड प्रूफ मेटेरियल का उपयोग कर सकते हैं.

  1. एंटी वौइस हेडफ़ोन

आपने कभी रियलिटी शो में दो किरदारों के एक खेलते हए देखा होगा – एक अपने कानों पर हैडफ़ोन डालता हैं दूसरा कुछ बोलता हैं जिसको वापस होठ पढ़कर दोहराना होता हैं.
अधिकांश लोगों को इसके बारे में पता नहीं होगा, लेकिन ध्वनि-शोर को कम करने के लिए इस प्रकार के हेड-फ़ोन अच्छे माध्यम हैं।

  1. शोर के अनुकूल फर्श और फर्नीचर का उपयोग करें

विनाइल फ्लोरिंग एक विशेष प्रकार के मेटेरिअल से बना होता हैं जो फर्श ध्वनि प्रदूषण को कम करने का उल्लेखनीय तरीका हो सकता हैं. हालाँकि, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप किस स्थान पर किस प्रकार की मंजिल पर रह रहे है। विनाइल फ्लोरिंग आमतौर पर शोर की एक बड़ी मात्रा को कम करता है.

  1. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का वॉल्यूम कम रखे

गेम सिस्टम, कंप्यूटर, हाई-फाई सिस्टम और टीवी उच्च मात्रा में होने पर ध्वनि प्रदूषण में योगदान कर सकते हैं, और पड़ोसियों को डिस्टर्ब कर सकते हैं. समाधान यह है कि जब उपयोग में न हों तो उन्हें बंद कर दें और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए एक छोटा सा योगदान दे.

  1. मशीनरी का बार-बार लुब्रिकेशन करें

ध्वनि प्रदूषण को कम करने और मशीनों की दक्षता में सुधार करने के लिए मशीनों का उचित स्नेहन और बेहतर रखरखाव किया जाना चाहिए. चूंकि स्नेहन धुरी या घुमने वाले भागों के बीच घर्षण को कम करता है, और शोर को कम करने में मदद करता है।

  1. पौधे लगाएं

शहरी परिवेशों में, प्रमुख राजमार्गों के आसपास, और निवास स्थानों पर भी शोर के स्तर को कम करने के लिए हरे पेड़-पौधे लगवाये जाने चाहिए. हरे पेड़ दिखने में सुन्दर होने के साथ, वायु की गुणवता में सुधार लाते हैं, और ध्वनि प्रदूषण को भी कम करते हैं.

  1. पुराने ऑटोमोबाइल को बदले

पुराने वाहन ध्वनि प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। कुछ पुराने ऑटो साधन जिनका इंजन काफ़ी समय से अपडेट नहीं हुआ, हद से ज्यादा शोर करते हैं. इस प्रकार के वाहन न केवल ध्वनि प्रदूषण बल्कि, वायु प्रदूषण का भी हिस्सा बनते हैं. इसलिए इनको बदला जाना चाहिए.

  1. अस्पताल, स्कूल और आवासीय क्षेत्रों में “नो हॉर्न जोन”

ट्रकों, बसों और कारों से निकलने वाले हॉर्न काफी हद तक ध्वनि प्रदूषण पैदा करते हैं और इस तरह, “नो हॉर्न ज़ोन” की शुरूआत से अस्पतालों, स्कूलों और आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सकती है।

  1. शोर स्तर की जाँच कराएँ

शोर के स्तर को सीमा के भीतर रखने के लिए औद्योगिक परिसर और इनडोर में ध्वनि स्तर के बार-बार सत्यापन की आवश्यकता होती है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि ध्वनि स्तर की नियमित जांच हो।

  1. शोर नियम तोड़ने पर कानून का सहारा ले  

अगर कोई लाउडस्पीकर का इस्तेमाल बिना परमिशन कर रहा हैं और किसी को उससे दिक्कत हो रही हैं तो कानून का सहारा ले सकते हैं.

  1. साइलेंट ग्रीन वेव से

बड़े बड़े राजमार्गों और बिजी सड़कों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशन पर शोर को कम करने के लिए ग्रीन तरंगो का इस्तेमाल किया जान चाहिए. इस प्रकार की तरंगे ऑपरेटिंग मशीनों से उत्पन्न होने वाले शोर को कम करती है.

  1. मीटिंग करें

आइये हम सभी मिलकर अच्छे पड़ोसी बनते हैं. अगर आपको भी शोर से दिक्कत होती हैं तो आपके पड़ोसी को भी कहीं न कहीं इस बात का जरूर दुःख होता होगा की उनके आस पास शोर बहुत अधिक हैं.


अत: कोई ऐसा क्षेत्र जहाँ पर बहुत सरे लोग रहते हैं या बहुमंजिला ईमारत में रहने वाले लोग आपस में बैठकर एक मीटिंग कर सकते हैं या कोई नियम या कानून बना सकते हैं की कोई भी बिना किसी कारण से शोर नहीं करेगा, ज्यादा लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करेगा. जिस विषय पर शोर से परेशानी होती हैं उस पर विचार विमर्श कर सकते हैं.

  1. खुद से वादा कीजिये

आप प्रॉमिस कीजिये कभी अपनी बाइक या कार का हॉर्न बिना मतलब के नहीं बजायेंगे. लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करके पड़ोसियों को डिस्टर्ब नहीं करेंगे. एक जिम्मेदार नागरिक बनेगे और लोगो को प्रदूषण के विषय के बारे में जानकारी देंगे और “पब्लिक अवेरनेस” फैलायेंगे.

प्रदूषण क्या होता हैं – कितने प्रकार का होता हैं.

आपने क्या सीखा…

इस विशेष पोस्ट में मैंने आपके साथ ध्वनि प्रदूषण[noise pollution in hindi] के बारे में जानकारी शेयर की हैं. इसके अलावा, ध्वनि प्रदूषण[dhwani pradushan] के कारण[cause], प्रभाव[effect] और कम करने के उपाय[solution] के बारे में बताया हैं. ध्वनि प्रदूषण[sound pollution in hindi] के विषय को लेकर अगर आप कोई सूझाव देना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में आप उसका वर्णन कर सकते हैं.

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