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शहर का काजी – अकबर बीरबल की मजेदार कहानियां

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शहर का काजी – अकबर बीरबल की हिंदी कहानी

‘अकबर बीरबल की हिंदी कहानियां‘ की इस श्रृंखला में आप पढ्न वाल हैं – शहर का काजी

दो मित्र थे रामलाल और श्यामलाल. रामलाल गरीब और सीधा-साधा आन आदमी था. जबकि श्याम लाल लालची और बेईमान. फिर दोनों में दोस्ती थी. एक बार रामलाल को प्रदेश जाना पड़ा. वह अपना सारा सामान श्याम लाल के पास रख गया ताकि सुरक्षित रहे.

वर्ष भर बाद वह वापस आया और श्याम लाल से अपना सामान माँगा. मगर बेईमान श्यामलाल में लालच में आकर सामान देने साफ़ इंकार कर दिया.रामलाल ने इसकी बड़ी मिन्नत की. लेकिन कोई फायदा नही हुआ. अंत में दुखी होकर श्याम लाल के खिलाफ शिकायत करने के लिए रामलाल बीरबल के पास पहुंचे. और बीरबल को सारी बात सुनाई. बीरबल ने सारी बातों को ध्यान से सुना और एक सलाह दी. बीरबल ने रामलाल से कहाँ कि तुम दो दिन बाद जाकर अपना सामान मांगना. अगर नही दे तो उसे धमकाना की मैं दीवानजी के पास जा रहा हूँ. रामलाल बेचारा अपने घर चला गया.

बीरबल ने सोच विचार कर सेवक से कहकर श्याम लाल को बुलाया. बीरबल ने उसकी अच्छी आवभगत की. फिर उसे कहा… श्यामलालजी जहापनाह एक नयी अदालत खुलवाना चाहते हैं. जहाँ हिन्दुओ के मुकदमे सुने जायेंगे. बादशाह ने मुझे उस अदालत का न्यायधीश चुनने के लिए ज़िम्मेदारी सोंपी हैं. काफ़ी सोचने और विचारने के बाद मैंने सोचा हैं कि क्यों न तुम्हारा नाम बादशाह को सुझाऊ. श्यामलाल बहुत खुश हुआ और बोला बीरबलजी आपने बिलकुल ठीक किया हैं. मैं तो आपको ही अपना आदर्श मानता हूँ. इसलिए पूरी ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाऊंगा. ठीक हैं, श्यामलालजी अब हमने आपकी इच्छा जान ली हैं, अब इसके बारे में हम बादशाह से बात करेंगे. ऐसा, बीरबल ने कहा. अब तुम जाओ. श्यामलाल ख़ुशी ख़ुशी वापस गया. और सोचने लगा अगर मैं शहर का काजी बन गया तो मजा ही आ जायेगा.
श्यामलाल घर पहुंचा ही था कि फिर रामलाल आ धमका. उसने फिर सामान का तगादा किया. श्यामलाल ने फिर उसे मना कर दिया. रामलाल ने बीरबल के कहे अनुसार उसे धमकाया की अगर अभी मुझे सामान नही देते हो तो मैं दीवानजी के पास चला जाऊंगा. (दीवानजी मतलब – बीरबल)

ये कहकर रामलाल लौटने ही वाला था कि श्याम लाल ने लपक कर उसके पैर पकड़ लिए. अरे! अरे! यार क्यों नाराज हो रहे हो, मैं तो तुम से मजाक कर रहा था. ले अपना सारा सामान ले जा. फिर श्यामलाल ने उसे अपना सारा सामान दे दिया. दरअसल श्यामलाल ने सोच लिया की अगर रामलाल बीरबल के पास गया, तो, मेरा काजी का पद तो गया. कुछ दिनों तक श्यामलाल बीरबल के बुलावे का इंतजार करता रहा. लेकिन बुलावा नही आने पर वह खुद ही जा पहुंचा. और पुछा मैं काजी(न्यायधीश) कब बनूँगा. बीरबल बोले किसी बेईमान को न्यायधीश बनाने से अच्छा न्यायालय खोला ही न जाए. दोस्त के साथ बेईमानी करने वाला क्या काजी बन सकता है. बेईमान को काजी नही बनाया जा सकता. श्यामलाल का सिर शर्म से झुक गया.

इस अकबर बीरबल के किस्से(akbar birbal kahaniya) से हमने क्या सिखा – कपट और लालच किसी भी तरह से हमको ऊपर नही उठने देता, बल्कि ओर गिराता हैं.

अरे जाओ जल्दी लाओ उसको – अकबर ने लिए मजे

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