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भुतिया दिवाली – चुड़ैल के साथ दिवाली

भुतिया दिवाली – चुड़ैल की कहानी

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एक गाँव में भोला नाम का लड़का अपनी माँ के साथ रहता था. भोला कि माँ लोगो के घरो में कम किया करती थी, जिससे घर का गुजारा चल जाता था. फिर एक दिन भोला की माँ बीमार पड गयी. जिससे घर का गुजारा भी मुश्किल हो गया था. फिर दिवाली का त्यौहार आ गया. पूरे गाँव में सभी के घरो में दिए जलाये गए, सभी घरो को रौशनी से सजाया गया था, केवल एक घर को छोड़कर. एक और जहाँ सभी लोग अपने अपने घरो में खुशिया मना रहे थे, मिठैया खा रहे थे. तभी भोला मेडिकल से आता हैं और कहता हैं माँ लो दवाई ले लो माँ.
दवाई लेते हुए माँ अपने बेटे से कहती हैं बेटा मुझे माफ़ कर दो! मैं दिवाली के दिन तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर सकी. कोई बात नही माँ….
इतना कहकर भोला बाहर चला गया. घूमते घूमते भोला गाँव के बाहर एक हवेली के पास पहुँच गया. इतनी बड़ी हवेली और इतना अँधेरा देखकर भोला चोंक गया. नज़र घुमती हुई हवेली के उपरी मंजिल पर पड़ी. हवेली के उपरी मंजिल पर एक लड़की खड़ी थी. भोला ने ध्यान से देखा लड़की उदास थी. भोला ने सोचा हो न हो इस लड़की की दिवाली भी ठीक नही हैं, चलो मिलकर दुःख बाँट लेते हैं. ऐसा सोचकर भोला हवेली के दरवाज़े तक गया. जैसे ही भोला दरवाज़े के पास पहुंचा दरवाज़ा अपने आप खुल गया. पहले तो भोला थोडा सा डरा, लेकिन फिर आगे बढ़ा, भोला ने देखा की दरवाज़े के पास ही एक बूढा अंकल खड़ा था, शायद इसी ने दरवाज़ा खोला होंगा. भोला ने उस अंकल से पुछा कि – दादा इतनी बड़ी हवेली और इतना सन्नाटा क्यों जबकि आज तो दिवाली हैं.

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बुढा खांसते हुए बोला. साहब अपने काम में हमेशा बिजी रहते हैं, और वो जो खड़ी हैं साहब की बेटी हैं, उसका नाम सोनी हैं. साहब ने उसे बाहर जाने सा मना किया हैं. इसलिए जब वो अकेली रहती हैं. तब उदास हो जाती हैं.
भोला हवेली के अन्दर जाता हुएँ तो उसे अजीब सा डर लगता हैं.
भोला जैसे ही आगे बाधा भोला को एक सुन्दर कपड़ो में एक स्त्री दिखी.
वो स्त्री दिखने में तो सुन्दर थी लेकिन जैसे ही वो बोली भोला डर गया. …है ईई… कहाँ जा रहा हैं… हवेली की तरफ अपने कदम बढ़ाये तो मैं तुझे खा जाउंगी.
भोला ने गुट निगला…. और डरते हुए बोला… चुड़ैल आंटी…मुझे मत खाना. मैं किसी को नुकसान पहुँचाने नही आया. मैं तो बस उस लड़की को देखने आया हूँ. प्लीज प्लीज मुझे मत खाना…मैं तो छोटा बच्चा हूँ, छोटे बच्चे भगवान का रूप होते हैं. आप कहोगी तो मैं नाच भी लूँगा..इतना कहकर भोला नाचने लगा…. छोटा बच्चा समझ के नही आँख दिखाना रे डूबी डूबी डम डम…अक्ल का कच्चा समझ के न धमकाना रे डूबी डूबी… ये सब देखकर सोनी के चेहरे पर स्माइल आ गई… और बोली अरे! तुम कोन हो यहाँ आओ… क्यूँ आंटी जाऊ वो बुला रही हैं…


हाँ ठीक हैं जाओ लेकिन मैं यहीं हूँ. मेरी बेटी को नुकसान पहुँचाने की कोशिश भी की तो तुम्हारी खैर नहीं.
अरे चुड़ैल आंटी मैं कोई चोर आतंकवादी थोड़े ही हूँ जो किसी का नुकशान करूँगा. मैं तो खुद नसीब का मारा हूँ.
अरे तुम कोन हो! पहले तो तुम्हे कभी देखा नहीं.
मैं पास के गाँव का ही हूँ… पर तुम रो क्यों रही थी? तुम्हारे पास तो सब कुछ हैं?

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सब कुछ होने से क्या खुशिया आ जाती हैं. मरे पास सब कुछ तो हैं लेकिन लोग नहीं हैं. पापा हमेशा बाहर रहते हैं और काम वाली बाई वो घर का काम करती हैं उसके साथ मैं क्या खेलूं .
पर तुम्हारी माँ.. तुम्हारी माँ कहाँ है..?….भोला बोला
ये सुनकर सोनी फिर से उदास हो जाती हैं.
क्या हुआ… अच्छा तुम रहने दो उदास मत हो… क्या तुम मेरे साथ खेलोगी…
हाँ! पर तुम मेरे पापा को मत बताना. वरना वो मुझे डाटेंगे. उन्होंने मना किया हैं इस घर से बाहर जाने को.
ठीक मैं तुम्हारे साथ ही खेलूँगा. और किसी से बोलूँगा भी नहीं.
फिर दोनों बगीचे में खलने लग जाते हैं. सोनी को खुस देखखर चुड़ैल बहुत खुस हुई.
थोड़ी देर बाद भोला बोला अब मुझे चलना चाहिए.
आज तुम तो अपने घर पर दिवाली के खूब मजे करोंगे.
नही मेरी माँ बीमार हैं. और हमारे पास इतने पैसे भी नहीं हैं की हम घर को भी सजा सके.
इतना कहकर भोला अपने घर की तरफ निकल गया. सोनी फिर अपने घर के अन्दर चली गयी. और उदास होकर सोचनी लगी मेरे पास इतने पटाखे होते हुए भी मुझे कोई ख़ुशी नहीं हैं. अबकी बार भी मुझे अकले दिवाली मनानी पड़ेगी. चुड़ैल सोनी को उदास देखकर वापस भोला के पीछे जाती हैं और उसे रोकती हैं..रूक जाओ भोला..

आप पढ रहे हैं. भुतिया दिवाली डरावनी कहानिया.


अब क्या हुआ चुड़ैल आंटी ..मैं तो अपने घर ही जा रहा हूँ. और मैंने आपकी बेटी को कोई नुकशान भी नहीं पहुचायां हैं…
तुम्हारे साथ खेलकर मेरी बेटी बहुत खुश हुई और तुम अब यहाँ से कहीं नही जाओंगे. तुम्हारा बस एक ही काम हैं.. मेरी बटी को खुश रखना.
नहीं! नहीं! मैं ऐसा नहीं कर सकता. घर पर मेरी माँ अकेली हैं. मुझे उनके पास जाना हैं.
नहीं मैं तुम्हे मार दूंगी और तुम्हारी माँ को भी. नहीं तो फिर वापस चलो.


भोला डर जाता और उनके साथ चला जाता हैं.
चलता हूँ पर आप मेरी माँ को कुछ मत करना.
उदास सोनी भोला को देखकर फिर से खुश हो जाती हैं. अरे! तुम वापस आ गये, क्या तुम मेरे साथ दिवाली मनाने आये हो.
हां! वो तुम अकेली हो और दिवाली कैसे मनाओगी, मेरे पास भी पठाखे नही हैं तो मैं वापस आ गया.
फिर दोनों बगीचे में पठाखे और फुलझड़िया से खेलते हैं, कुछ समय बाद भोला उदास हो जाता हैं. भोला को देखखर सोनी बोली क्या हुआ! तुम्हे और पठाखे चाहिए तुम मेरे सारे पठाखे ले लो.
नही मुझे मेरी माँ की चिंता हो रही हैं. वो घर पर अकेली हैं. भोला ने अपने घर का सारा हाल सुनाया. सोनी भी भावुक हो गयी. काश मैं तुम्हारी कुछ मदद कर पाती. पर तुम चिंता मत करो मैं मेरे पापा से बात करुँगी. वो जरुर तुम्हारी मदद करेंगे.
इतने में वहां पर सोनी के पापा आ जाते हैं और भोला को देखकर बहुत गुस्सा हो जाते हैं. नौकरानी को बुलाकर उसे बहुत डाटा. सोनी रोने लगी…इसे कुछ मत कहना ये तो मेरे साथ खेलने आया.
तुम इसे जानती तक नही हो. कैसे इसको अन्दर आने दिया.
ये सब देखखर चुड़ैल को गुस्सा आ जाता हैं और वो सबके सामने आ जाती हैं.
बस करो महेश तुम्हे अपनी बेटी उदासी नहीं दिखती.
अअअ..अरे!… चु..चुड़ै….चुड़ैल…कोन हो तुम….कोन हो.
हहह…. मैं….तुम्हारी बीबी ….पूनम.
पूनम तुम….तुम्हे मरे तो कितने साल हो गुए.
मैं हमेशा अपनी बेटी के आस पास ही थी मैं, तुम तो अपनी बेटी को टाइम देते नहीं हो. क्या करोंगे इतने पैसे का जब तुम्हारी बेटी ही खुश नहीं हैं.
और तुम्हे दिखाई नहीं देता वो कितनी खुस हैं. तुम तो इसे खेलने नहीं देते. न ही बाहर जाने देते. मैं लेकर आई हूँ इस लड़के को.
महेश को अपनी गलती का अहसास होता हैं. और अपनी बेटी को गले लगा देता है. फिर सोनी भोला के बारे में बताती हैं. महेश भोला की मदद करता हैं और अपनी हवेली में उसे और उसकी माँ को एक कमरा देता हैं. भोला का भी अच्छे स्कूल में दाखिला करवा देता हैं. फिर सभी ख़ुशी ख़ुशी रहते हैं.
और फिर एक दिन पूनम वापस सभी के सामने आई और महेश को कहा – महेश हमेशा अपनी बेटी का ख्याल रखना, अब मैं मुक्त होना चाहती हूँ. पूनम ने सभी को बाय किया.और आकाश में विलुप्त हो गयी. तो ये थी ….भुतिया दिवाली की कहानी.

इस भुतिया डरावनी कहानी से क्या सीखा (horror stories in hindi)भुतिया दिवाली- जीते-जी इस संसार से मोह हटा सके तो ठीक हैं नहीं तो मरते मरते इस संसार को हमेशा के लिए अलविदा कहकर जाये. नही तो आत्मा(dark energy) की शक्ती आस पास भटकती रहेगी.

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1 thought on “भुतिया दिवाली – चुड़ैल के साथ दिवाली”

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