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दुनिया का सबसे ऊंचा बड़ा बिल्डिंग टावर इमारत (duniya ki sabse unchi building)

दुनिया का सबसे बड़ा टावर (duniya ka sabse uncha bada tower). दुनिया का सबसे ऊंचा बिल्डिंग कौनसा है? UAE संयुक्त अरब अमीरात दुनिया का दसवां सबसे अमीर देश है। अपनी अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए दुनिया का सबसे ऊंचा टावर (इमारत) बना डाला. दुनिया का सबसे बड़ा टावर (बिलडिंग) बनाने के बाद भी दो अन्य टॉवरो का निर्माण कर रहे हैं। 2022 और 2024 में विश्व के सबसे बड़े टावर खोलने जा रही हैं। इसका निर्माण अभी चल रहा है। इस आर्टिकल में आप क्या जानने वाले है.

  • दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग कौनसी है?
  • दुनिया का दुसरा सबसे बड़ा टावर इमारत
  • भारत में सबसे ऊंची इमारत कौन सी है?
  • *मुंबई की सबसे ऊंची इमारत कौनसी है?
  • दुनिया का सबसे ऊंचा बिल्डिंग टावर कौनसा है?
  • सऊदी अरब की सबसे ऊंची बिल्डिंग इमारत कौनसी है?

दुनिया का सबसे(duniya ka sabse bada tower) बड़ा टावर और ऊंचा टावर

दुनिया का सबसे बड़ा ऊंचा टॉवर या इअमारत अथवा बिलडिंग बुर्ज खलीफ़ा (burj khalifa tower) है. बुर्ज खलीफ़ा इमारत, खाड़ी प्रदेश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची रिहायशी बिल्डिंग है. बुर्ज खलीफा का शाब्दिक अर्थ – “खलीफा टावर”. बुर्ज खलीफा का शाब्दिक अर्थ है- खलीफा टावर. पहले इस टावर को दुबई बुर्ज से जाना जाता था। खलीफा शब्द जोड़ने का एक कारण था। हुआ यह कि अबू धाबी ने संकट के समय दुबई की वित्तीय सहायता की थी. क्योंकि टावर को बनाने की लागत 109 करोड़ थी।

इसलिए जब इस टावर को खोला गया तब इसका नाम अबू धाबी के राष्ट्रपति “जायद अल मकतूम” के नाम से लिया गया। यह अपने नाम के आगे खलीफा लगाते हैं। खलीफा इस्लाम धर्म का पवित्र शब्द है। खलीफा अर्थ होता है – दुनिया का सर्वोच्च नेता।

बुर्ज खलीफा टावर का निर्माण क्यों किया गया?

दुनिया का सबसे बड़ा टावर बुर्ज खलीफा संयुक्त अरब अमीरात में स्थित हैं। संयुक्त अरब अमीरात UAE की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल पर आधारित हैं। वहां की सरकार के दिमाग में यह चल रहा था कि अगर तेल की इकोनामी डगमगा गई तो पूरा देश आर्थिक संकट में पड़ जाएगा। कुल मिलाकर तेल आधारित अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के लिए इस टॉवर का निर्माण किया गया। इसलिए जब इस टॉवर का निर्माण हो रहा था, देश की जीडीपी गिर गई थी। जैसे ही बनकर तैयार हुआ तो 6% बढ़ गई।

खलीफा टावर का भौतिक स्वरूप

बुर्ज खलीफा की ऊंचाई 828 मीटर है। पहले पहले इसकी ऊंचाई को गुप्त रखा गया ताकि इसको कोई पार नहीं कर सके. लेकिन पिछले 10 सालों से बुर्ज खलीफा ने अपने शीर्ष स्थान को कायम रखा। सबसे ऊंची मंजिल 156 नंबर पर है। बुर्ज खलीफा के इतने ऊंचा होने के कारण ऊंचाई से दुबई का शानदार नजारा देखा जा सकता है। इसलिए 124, 125, 148 पर बैक बनाए गए हैं. जहां से दुबई का नजारा देखा जा सकता है।

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खलीफा बुर्ज का उपयोग क्या है?

बुर्ज खलीफा बहुउदेश्य लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बनाया गया है। बुर्ज खलीफा में ऑफिस, रहने के लिए घर, होटल, रेस्टोरेंट, पर्यटन के लिए डेक की व्यवस्था की गई है।

टावर बुर्ज खलीफा का सूर्यास्त का नज़ारा

एक ही दिन में दो सूर्यास्त देखना एक कल्पना हो सकती है। लेकिन फर्श पर सूर्यास्त के पश्चात लिफ्ट की सहायता से टेक पर जाकर दूसरे सूर्यास्त को देखा जा सकता है।

बुर्ज खलीफा का आकार और विकास बोर्ड

टावर की लंबाई टावर को पूरे विश्व में एक अलग पहचान देती हैं। दुबई तेल व्यापार पर निर्भरता को कम करने के लिए पर्यटन को अमीरात का दूसरा उद्योग बनाना चाहता है। एक बार दुबई के एक शेख्म न्यूयॉर्क के एंपायर स्टेट बिल्डिंग की यात्रा पर गए थे। तब से बुर्ज खलीफा निर्माण का विचार उनके दिमाग में चल रहा था। यह 1960 की बात है।

सीएन टॉवर, टोरंटो, कनाडा (दुनिया का दुसरा सबसे बड़ा टावर इमारत)

553.33 मीटर (1,815 फीट और 5 इंच) की ऊंचाई पर, सीएन टॉवर ने रिकॉर्ड को तीन दशकों से अधिक के लिए सबसे लंबे समय तक फ्रीस्टैंडिंग के रूप में रखा, जब तक कि इसे 2007 में बुर्ज खलीफा द्वारा अलग नहीं किया गया था। यह 2009 में सबसे ऊंचे टॉवर का खिताब गँवा दिया जब कैंटन टॉवर का निर्माण किया गया था, लेकिन सीएन टावर पश्चिमी गोलार्ध में सबसे अधिक ऊंचाई वाली संरचना है और दुनिया में नौवीं सबसे ऊँची इमारत हैं.

CN टॉवर पर निर्माण 6 फरवरी, 1973 को शुरू हुआ और जून 1976 में लगभग 40 महीने बाद पूरा किया गया। 2016 में, CN टॉवर ने पूरे वर्ष विशेष कार्यक्रमों के साथ अपना 40 वां जन्मदिन मनाया।

CN टॉवर (इमारत) को $ 63 मिलियन (2018 में $ 270 डॉलर के बराबर) की मूल लागत पर बनाया गया था और 15 वर्षों में अपने निवेश को वापस कर दिया।
2 अप्रैल, 1975 को, एक विशालकाय एरिकसन AIR CRANE सिलोरस्की हेलीकॉप्टर के रूप में लोगो को भ्रम में डाल दिया, CN बिल्डिंग के एंटीना के अंतिम टुकड़े को जगह में रखा, ऑफिशियली इसे निर्माण से पहले इसको दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बना दिया।

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CN टॉवर पक्षी की चोटों को रोकने के लिए पक्षी प्रवास के मौसम में अनावश्यक बाहरी रोशनी को कम करता है। CN टॉवरकी सरंचना लगभग पूरी तरह से लंबवत है। 2008 में, CN टॉवर के लिफ्ट पर ग्लास पैनल लगाए गए थे, जिसने तुरंत 346 मीटर (1,135 फीट) में उच्चतम ग्लास पैनल वाले लिफ्ट के लिए विश्व रिकॉर्ड बनाया था। CN टॉवर (बिलडिंग) में 1,200-फुट का हेक्सागोनल कोर है जो पूरी ऊँचाई के टॉवर को स्थिरता और लचीलापन प्रदान करता है। 360 रेस्तरां हर 72 मिनट में पूरी तरह से चक्कर लगाता है, जिससे डाइनर्स को 1,000 फीट से अधिक नीचे टोरंटो का एक दृश्य दिखाई देता है।

क्या भविष्य में बुर्ज खलीफा से उच्चा कोई और टावर बनेगा

बुर्ज खलीफा गगनचुंबी इमारत है. जिसकी उचाई 828 मीटर हैं। पिछले 10 सालों से बुर्ज खलीफा अपने स्थान शीर्ष पर स्थान बनाए हैं। लेकिन शीघ्र ही दो अन्य टावर बुर्ज खलीफा को प्रतिस्थापित कर देंगे। एक “क्रीक टावर” और दूसरा जेद्दा टावर. दोनों टावर का निर्माण UAE में ही हो रहा है। जेद्दा टॉवर (जेद्दाह टाॅवर) की ऊंचाई 1 किलोमीटर (3300 फ़ीट) तक रखने का अनुमान है। सऊदी अरब की सबसे ऊंची बिल्डिंग “जेद्दाह टाॅवर” बनने जा रही है. जो कि, आने वाले समय में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत (duniya ki sabse unchi imarat – जेद्दाह टाॅवर) होगी. जबकि वर्तमान में हम सभी जानते ही है दुनिया की सबसे ऊंची बिलडिंग या इमारत बुर्ज खलीफ़ा है.

मुंबई की सबसे ऊंची इमारत

(mumbai) मुंबई, भारत की आर्थिक राजधानी है. यह बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के लिए विख्यात है. इसके अलावा यहाँ की गगनचुम्बी इमारते (बिल्डिंग्स) यहा की शान बढाती है. मुंबई की सबसे ऊंची इमारत बिलडिंग कौनसी है? क्या आप जानते है. मुंबई की सबसे ऊंची इमारत या बिलडिंग का नाम इम्पीरियल टावर्स (भारत की सबसे ऊंची इमारत) है. यह न केवल मुंबई का सबसे ऊंचा टावर है बल्कि यह भारत का भी सबसे ऊंचा एव सबसे बड़ा टावर (इमारत) है.

इसकी खास बात यह है कि, यह जुड़वाँ टावर है. जो पास पास में बनाए गए है. इन्हें देखने पर दोनों ट्विन जैसे लगते है. इस कारण इम्पीरियल टावर्स को ट्विन टावर्स (twin towers) भी कहते है. इन दोनों टावर्स (इम्पीरियल टावर्स) की ऊंचाई 256 मीटर है. जिसमे 160 फ्लैट्स है. एक 3 BHK फ्लैट की कीमत करीब 15 करोड़ से 20 करोड़ है.

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