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बुद्ध और एक अपराधी की कहानी -Gautam BUddha And A criminal

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बुद्ध और एक अपराधी की कहानी

महात्मा गौतम बुद्ध(gautam buddha) सभी के प्रति सम्यक दृष्टि रखते थे. इसलिए जो कोई भी, चाहे स्त्री हो या पुरुष चाहे कोई शुद्र सभी को अपनी शरण में जगह देते थे. एक बार की बात हैं एक अपराधी, घोर पापी मन वाला आदमी बुद्ध से मिल-कर सन्यासी बनने की सोच रहा था. लेकिन वह बुद्ध के सामने जाने से डर रहा था. क्योंकि वह अपराधी चारों तरफ से बदनाम था, इसलिए उसको डर था कोई उसको कुछ कह न दे. इसलिए उस अपराधी ने निश्चय किया – वह बुद्ध के सामने तब जायेगा, जब सभी लोग वहां से चले जायेंगे.
अगले दिन वह अपराधी बुद्ध से मिलने के लिए बुद्ध के आश्रम गया. दुर्भाग्यवश, जिस वक्त अपराधी बुद्ध के आश्रम पहुंचा तब बुद्ध भिक्षा दौर के लिए गए हुए थे. और वह अपराधी बुद्ध के भिक्षुओं द्वारा पकड़ा गया.
वह अपराधी बुद्ध के भिक्षुओं से प्रार्थना करने लगा कि मैं यहाँ पर कुछ भी चुराने के मकसद से नहीं आया हूँ. यहाँ पर आस पास के लोग मुझे एक अपराधी और पापी से पहचानते हैं. मैं डर गया था की कहीं मुझे बुद्ध की शरण मिले ना मिले, इसलिए मैं दीवार को लान्गकर यहाँ पर आया हूँ. आप मुझ पर विश्वास कीजिये, मैं यहाँ पर सन्यासी बनने के लिए आया हूँ.


बुद्ध के भिक्षु उस अपराधी को एक दुसरे भिक्षु के पास लेकर गए, जिसका नाम सारिपुत्र(sariputra) था, सारिपुत्र एक बहुत बड़ा ज्ञानी पंडित था, जो किसी का भी भूत और भविष्य देख सकता था.
बुद्ध के भिक्षुओं(buddha’s disciple) ने सारिपुत्र से कहा की – आप इस अपराधी का चेहरा पढ़िए और इसकी भविष्यवाणी कीजिये, ये आदमी अपने आपको एक अपराधी और पापी बता रहा हैं, और सन्यासी बनने के उद्देश्य से यहाँ पर आया है.
सारिपुत्र ने उस अपराधी के भूत देखा, उसने पाया की वह वाकई में एक हत्यारा, पापी और चोर था. लेकिन पिछले जन्म के भाग्य उसको यहाँ पर लेकर आये हैं. सारिपुत्र ने अपनी आँखे बंद करी और हजारों वर्ष पीछे गया, उसने पाया की वह अपराधी हजारों वर्षों से एक पापी था, कभी उसमे सुधार नहीं हुआ. अपराधी की भूत कुंडली देखकर सारिपुत्र डर गया और कांपने लगा, यह आदमी तो बहुत खतरनाक हैं. यह किसी के लिए भी ठीक नहीं हैं, इसको बुद्ध भी ठीक नहीं कर सकते हैं, सारिपुत्र ने तुरंत उसको आश्रम से बाहर भिजवाया.
वह आदमी वहां से बाहर चला गया, अपराधी को यह सुनकर बहुत बूरा लगा की अब वह कभी सुधर नहीं सकता. यह सोचकर उसने आत्महत्या करने का निश्चय किया. उसने एक बड़ा पत्थर देखा और उस पर अपने सर को पीटने लगा. तभी बुद्ध भिक्षा लेकर वापस लौट रहे थे. बुद्ध ने उस आदमी को रोका, और उसको अपने साथ आश्रम में लाकर आ गए.
कुछ दिनों के बाद वह अपराधी बुद्ध की शरण में बुद्ध का एक पक्का अनुयायी बन गया था.
आश्रम ने सभी लोग बहुत अचम्भित थे. सारिपुत्र ने बुद्ध से पुछा की मैंने इस व्यक्ति के हजारों साल का इतिहास देखा हैं, हजारों वर्षों में वह एक पापी था, लेकिन वह बदल कैसे गया. अगर यह आदमी इतने दिनों में सुधर सकता हैं तो फिर उन हजारों वर्षों क्या और फिर किसी के भूत देखने का क्या मतलब हैं?
बुद्ध ने सारिपुत्र से कहा की तुमें इसका भूत देखा हैं जबकि मैंने इसका भविष्य देखा हैं. किसी भी क्षण, जब कोई सोच लेता हैं की उसे बदलना हैं तो वह बदल सकता हैं. इस आदमी ने भी वहीँ किया हैं, तुरंत लिया गया फैसला निर्णयात्मक होता हैं.

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