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ग्लोबल वार्मिंग(Global Warming in Hindi) – कारण, प्रभाव और उपाय

gleshires are melting and conver into water

ग्लोबल वार्मिंग(Global Warming in Hindi)

ग्लोबल वार्मिंग(Global Warming in hindi) या भूमंडलीय ताप एक पूर्ण रूप से मानव जनित समस्या हैं. आश्चर्य की बात हैं, मानव ने बिना प्रकृति के बारे में सोचे अंधाधुंध विकास करते हुए, इस स्वर्ग रूपी पृथ्वी को रहने लायक नहीं छोड़ा. ग्लोबल वार्मिंग के बारे में वैज्ञानिको को 1840 में सबसे पहली बार पता चला था. हालाँकि ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को लेकर बहुत सी रिपोर्ट्स को प्रकाशित किया गया हैं, लेकिन उन आंकड़ों में भिन्नता हैं. लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं हैं की यह एक समस्या नहीं हैं. 2020 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 1850-1900 और 1981 के तापमान की तुलना करने पर 2011 से 2020 का दशक सबसे गर्म रहा, और तापमान का अंतर 1.2 डीग्री सेल्सियस बढ़ गया हैं. इसी कारण महासागरों का जल स्तर बढ़ रहा हैं, ग्लेशियरों का द्रव्यमान कम हो रहा हैं और पिघल कर तेजी से नदियों में तब्दील हो रहे हैं. ग्लोबल वार्मिंग से सम्बन्धित(about global warming) इस पोस्ट में मैं आपको ग्लोबल वार्मिंग की परिभाषा(defination) और अर्थ(global warming meaning in hindi), ग्लोबल वार्मिंग के कारण(cause of global warming) और इसके प्रभाव सभी विषयों की चर्चा करेंगे, शुरुआत करते हैं, ग्लोबल वार्मिंग की परिभाषा के साथ.

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ग्लोबल वार्मिंग क्या हैं(what is global warming in Hindi)

जिस तरह से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा हैं, और वातावरण में हानिकारक घटकों की बढ़ोतरी हो रही हैं उसके अनुरूप ग्रीन हाउस गैसे बढ़ रही हैं. ग्रीह हाउस के बढ़ने से पृथ्वी के सम्पूर्ण तापमान में वृद्दि हो रही हैं, पृथ्वी के बढ़ते तापमान को ही ग्लोबल वार्मिंग(भूमंडलीय ताप) कहते हैं.
1880 में तापमन के रिकॉर्ड कीपिंग शुरू होने के समय की तुलना में आज भूमि और महासागर का तापमान बढ़ गया हैं. ग्रीन हाउस गैसे सूर्य से आने वाली किरणों को सोख लेती हैं और और सतह और हवा दोनों के तापमान को बढ़ा देती हैं.
ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में ग्लोबल वार्मिंग को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया हैं – पृथ्वी के वायुमंडल के समग्र(overall) तापमान में क्रमिक(year by year) वृद्धि आमतौर पर कार्बन डाइऑक्साइड, सीएफ़सी और अन्य प्रदूषकों के बढ़े हुए स्तर के कारण होने वाले ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण होती है, इसे ग्लोबल वार्मिंग से जाना जाता हैं.

ग्लोबल वार्मिंग एक विश्व व्यापक समस्या हैं. अक्सर जब कभी इस विषय की बात आती हैं तो सभी यह सोचने लगते हैं कि यह कोई वैज्ञानिकों के काम की चीज हैं, और इस विषय को नकार देते हैं. जैसा कि मैंने आपको बताया कि ग्लोबल वार्मिंग एक पूर्ण रूप से मानव द्वारा बनाई गयी समस्या हैं. अत: यह मेरी, आपकी और सबकी समस्या हैं.
ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु परिवर्तन(climate change) हो रही हैं. समुद्र स्तर का बढ़ना, ग्लेशियरों का पिघलना, महासागरों का गर्म होना, जानवरों की प्रजातियों का नष्ट होना इत्यादि प्रभाव ग्लोबल वार्मिंग के ही परिणाम हैं. जैसे जैसे जलवायु परिवर्तित हो रहा हैं, लोगो के रहने के लिए आवास, आजीविका के स्रोत और खरतनाक मौसम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं.

ग्लोबल वार्मिंग के प्रमाण

प्राचीन इतिहास(बहुत वर्षो पहले) की तुलना में पृथ्वी की जलवायु बदल गई है। पिछले 650000 वर्षों में हिमनदों के बदलने के सात चक्र हुए हैं, लगभग 11700 साल पहले आधुनिक जलवायु युग की शुरुआत हुई – और मानव सभ्यता की शुरुआत भी इसी समय हुई थी. इस युग में जलवायु परिवर्तन होने का बहुत ही आम कारण हैं – पृथ्वी द्वारा सूर्य की उर्जा को ग्रहण करना और वापस न छोड़ना.
यहाँ पर कुछ ऐसे प्रमाण हैं जो कि यह साबित करते हैं की वाकई में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हैं.
आधुनिक उपकरणों की खोज के पश्चात् वैज्ञानिको ने पृथ्वी के अलावा उपग्रहों और ग्रहों पर नज़र रखनी शुरू कर दी, और कई प्रकार की जानकारी और आंकडें एकत्रित कर लिए. कई वर्षों के आंकड़ों का अंतर बदलती जलवायु के बदलती जलवायु के परिणामों के अंतर को स्पष्ट करता हैं.
19वीं शताब्दी के मध्य से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों की ट्रैपिंग शुरू कर दी गई थी, तब से कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर दर्शाता हैं कि ग्रीन हाउस गैसो के घनत्व में वृद्दि हुई हैं.
ग्रीनलैंड, अंटार्कटिका से जाने वाले ग्लेशियर इस बात का प्रमाण हैं कि ग्रीनहाउस गैस के स्तर में बदलाव के कारण प्राचीन साक्ष्य जैस पेड़ के छल्ले, महासागर तलछट, प्रवाल भित्तियों और तलछटी चट्टानों की परते जलमग्न हो गई हैं.

ग्लोबल वार्मिंग होने के कारण(causes of global warming in hindi)

उन तमाम कारणों को ग्लोबल वार्मिंग के लिए ठहराया जा सकता हैं जो किसी न किसी तरह से पृथ्वी के तापमान में वृद्दि करते हैं. यहाँ पर कुछ कारणों का संक्षिप्त वर्णन दिया गया हैं जो कि ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देते हैं.
ग्लोबल वार्मिंग वर्तमान और भावी समस्या हैं। ईपीए(EPA) के अनुसार, 1990 से 2005 तक मानवीय गतिविधियों के कारण दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं। वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता में वृद्धि इस वृद्धि का लगभग 80 प्रतिशत है।

ग्रीन हाउस गैसे

ग्लोबल वार्मिंग(Global Warming) का संबसे मुख्य कारण ग्रीन हाउस गैसों का बढ़ना है. ग्रीन हाउस गैसों में मुख्य चार गैसे हैं. पृथ्वी की ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में गर्मी को बढाती हैं, और पृथ्वी को गर्म करती हैं। ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए जिम्मेदार मुख्य गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, और जल वाष्प और फ्लोरिनेटेड गैसें (जो सिंथेटिक हैं) शामिल हैं। ग्रीन हाउस गैसे वातावरण में एक आवरण फैलाती हैं जिसमे से सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं लेकिन वापस बाहर नहीं जा पाती हैं. इसके कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्दि होती हैं.

बिजली संयंत्र(power house)

वर्तमान में बहुत सारे विकासशील देश बिजली उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन जलाते हैं, यहाँ तक कि अमेरिका में कार्बन डाइ-ऑक्साइड उत्सर्जन का चालीस प्रतिशत बिजली उत्पादन से होता है। बिजली उद्योग के 93 प्रतिशत उत्सर्जन कोयले के जलने से होता है।

परिवहन

परिवहन से ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन कुल यू.एस. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 28 प्रतिशत है, जो इसे यू.एस. GHG उत्सर्जन का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनाता है। 1990 और 2018 के बीच, परिवहन क्षेत्र में GHG उत्सर्जन किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में निरपेक्ष रूप से अधिक बढ़ा है.

कृषि

औद्योगिक खेती और पशुपालन वातावरण में भारी मात्रा में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता हैं। दुनिया भर में उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन का बीस प्रतिशत का योगदान खेती करती है।

वनों की कटाई

वनों की कटाई से भारी मात्रा में ऑक्सीजन की कमी आती हैं. सभी जीवों को साँस लेने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती हैं. जनसख्याँ वृद्दि, जानवरों की संख्या की वृद्दि से स्वशन क्रिया के पश्चात् भारी मात्रा मे कार्बन डाई ऑक्साइड की बढ़ोतरी होती हैं. चूँकि कार्बन डाई ऑक्साइड के सबसे बड़े ग्राही पेड़ों की संख्या में कमी आने के कारण वायुमंडल में इसकी लगातार वृद्दि हो रही हैं. कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रीन हाउस का मुख्य स्रोत हैं.

उर्वरक एवं कीटनाशक

नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के उपयोग से फसल के लिए उर्जा की मात्रा बढ़ जाती है। नाइट्रोजन ऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में 300 गुना अधिक गर्मी को पैदा कर सकते हैं। नाइट्रस ऑक्साइड का 62 प्रतिशत कृषि उपोत्पादों से आता है।

तेल कुएं में ड्रिलिंग

तेल ड्रिलिंग उद्योग से जलने से वातावरण में जारी कार्बन डाइऑक्साइड पर प्रभाव पड़ता है। जीवाश्म ईंधन की पुनर्प्राप्ति, प्रसंस्करण और वितरण में लगभग 8 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड और 30 प्रतिशत मीथेन प्रदूषण होता है।

प्राकृतिक गैस ड्रिलिंग

प्राकृतिक गैस एक स्वच्छ ईंधन स्रोत के रूप में जाना जाता है, लेकिन कुल प्राकृतिक गैस का अनुमानित नौ प्रतिशत वातावरण में चला जाता है, प्राकृतिक गैस ड्रिलिंग बड़े पैमाने पर वायु प्रदूषण का कारण बनती है, शेल निक्षेपों से प्राकृतिक गैस निकालने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग तकनीक भूजल स्रोतों को भी प्रदूषित करती है।

कूड़ा करकट

जैसे ही कचरा भूमि में सड़ने लगता हैं, उसमे से मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड गैसे निकलने लगती हैं. वातावरण में लगभग अठारह प्रतिशत मीथेन गैस कूड़ा करकट और अपशिस्ट से आती है।

ज्वालामुखी का विस्फोट

ज्वालामुखी फटने पर बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलती हैं। ज्वालामुखी ग्लोबल वार्मिंग का अत्यंत छोटा कारण हैं. एक विस्फोट से अल्पकालिक वैश्विक शीतलन होता है. हवा में राख और सौर ऊर्जा की अधिक मात्रा के कारण ज्वालामुखी भी ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार हैं.

carbon dioxide pi chart

ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग(वैश्विक जलवायु परिवर्तन) से हिमनद सिकुड़-सिमट गए हैं, नदियों और झीलों में पिघलते बर्फ के कारण पानी स्तर बढ़ रहा हैं, पौधे और पेड़ जल्दी फूल(grow) रहे हैं। कुछ वर्षों पहले वैज्ञानिको ने भविष्यवाणी की थी, कि आने वाले समयमें ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जल स्तर बढेगा, अत्यधिक गर्मी पैदा होगी, गर्म लहरे और जलवायु परिवर्तन हो जायेगा, इसके परिणाम हमारे सामने हैं.
वैज्ञानिक आज भी दावा कर रहे हैं कि आने वाले दशकों तक वैश्विक तापमान में वृद्धि जारी रहेगी, मुख्य रूप से मानव गतिविधियों द्वारा उत्पादित ग्रीनहाउस गैसों(green house gases) के कारण. इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC), जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों के 1,300 से अधिक वैज्ञानिक शामिल हैं, ने अगली सदी में 2.5 से 10 डिग्री फ़ारेनहाइट के तापमान में वृद्धि का अनुमान लगाया है। IPCC के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की सीमा समय के साथ अलग-अलग होगी और इसके प्रभाव भी भिन्न भिन्न होंगे. राष्ट्रीय जलवायु आकलन रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग परिवर्तन इस सदी और उसके बाद भी जारी रहेगा.

औसत तापमान में वृद्दि

ग्लोबल वार्मिंग के सबसे तात्कालिक और स्पष्ट प्रभावों में से एक दुनिया भर में तापमान में वृद्धि है। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, पिछले 100 वर्षों में औसत वैश्विक तापमान में लगभग 1.4 डिग्री फ़ारेनहाइट (0.8 डिग्री सेल्सियस) की वृद्धि हुई है।
NOAA और NASA के आंकड़ों के अनुसार, 1895 में रिकॉर्ड कीपिंग शुरू होने के बाद से, सबसे गर्म वर्ष 2016 था. वर्ष 2016 21वीं सदी के औसत तापमान से 1.78 डिग्री फेरनहाइट (0.99 डिग्री सेल्सियस) अधिक गर्म था. 2016 से पहले, 2015 विश्व स्तर पर रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्ष था, और 2015 से पहले 2014.

ग्लोबल वार्मिंग के कारण ऋतु प्रभाव

मौसम का परिवर्तन होने का आधार पवने हैं. मानसून भी एक प्रकार की पवन हैं. हमारे वातावरण में 32 से अधिक प्रकार की पवने हैं. ये पवने बहुत ही नाजुक होती हैं, इनमे से कुछ ठंडी और कुछ गर्म होती हैं. सामान्य परिवर्तन से भी कई बार धुंध, बर्फ का जमना, तेज तूफ़ान, अत्यधिक ठण्ड, बिना मौसम के बरसात हो जाती हैं.
उदहारण के लिए वैश्विक तापमान के बढ़ने से ध्रुवीय जेट स्ट्रीम – ठंडी उत्तरी ध्रुव हवा और गर्म भूमध्यरेखीय हवा के बीच की सीमा – दक्षिण की ओर पलायन कर सकती है, जिससे ठंडी आर्कटिक हवा आ सकती है। यही कारण है कि कुछ राज्यों में ग्लोबल वार्मिंग की लंबी अवधि की प्रवृत्ति के दौरान अचानक ठंड या सामान्य से अधिक गर्मी हो सकती है.
ग्लोबल वार्मिंग(Global Warming) के कारण ही ग्रीष्म ऋतू में वर्षा होती हैं, इसका कारण मानसून पवनों की अनियामियता या पवनों के कारण पैदा हुआ तूफान हैं.

समुद्र का स्तर और समुद्र का अम्लीकरण

सामान्य तौर पर, जैसे ही बर्फ पिघलती है, समुद्र का स्तर बढ़ जाता है। 2014 में, विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने बताया कि दुनिया भर में समुद्र के स्तर में औसतन प्रति वर्ष 0.12 इंच (3 मिलीमीटर) की वृद्धि हुई है। यह 20वीं सदी में 0.07 इंच (1.6 मिमी) की औसत वार्षिक वृद्धि से लगभग दोगुना है।
आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों में पिघलने वाली ध्रुवीय बर्फ, ग्रीनलैंड, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, यूरोप और एशिया में बर्फ की चादरों और ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र के स्तर में अकल्पनीय वृद्दि हुई हैं. इसके लिए ज्यादातर मनुष्य ही दोषी हैं. 27 सितंबर, 2013 को जारी IPCC की रिपोर्ट में, जलवायु वैज्ञानिकों ने कहा कि 95 प्रतिशत निश्चित हैं कि महासागरों को गर्म करने, तेजी से पिघलने वाली बर्फ और बढ़ते समुद्र के स्तर के लिए मनुष्यों ही जिम्मेदार हैं.
EPA के अनुसार, 1870 के बाद से वैश्विक समुद्र का स्तर लगभग 8 इंच बढ़ गया है, और आने वाले वर्षों में वृद्धि की दर में तेजी आने की उम्मीद है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो कई तटीय क्षेत्र, जहां पृथ्वी की लगभग आधी मानव आबादी रहती है, जलमग्न हो जाएगी.
ग्लोबल वार्मिंग के कारण महासागरों के लिए समुद्र का स्तर ही एकमात्र ऐसी चीज नहीं है जो बदल रही है। जैसे-जैसे CO2 का स्तर बढ़ रहा है, महासागर उन गैस में से कुछ को अवशोषित करते हैं, जिससे समुद्री जल की अम्लता बढ़ जाती है.
EPA के अनुसार, 1700 के दशक की शुरुआत में औद्योगिक क्रांति शुरू होने के बाद से, महासागरों की अम्लता में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वर्ने ने कहा, “महासागरों में कई समुद्री जीव कैल्शियम कार्बोनेट (कोरल, ऑयस्टर) से गोले बनाते हैं. “इसलिए जैसे ही हम समुद्र में अधिक से अधिक CO2 जोड़ते हैं, यह और अधिक अम्लीय हो जाता है, जो समुद्री जीवों को अधिक से अधिक गोले(सीप) बनाने के लिए प्रेरित करता हैं. यह उनक प्रजातियों के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।”
इसी तरह अगर अम्लीकरण की प्रवृति जरी रही तो शीघ्र ही ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बेरियार रीफ दुर्लभ की स्थिति में आ जाएगी. EPA की रिपोर्ट ने ग्रेट बैरियर रीफ के हिस्से को ब्लीचिंग से प्रभावित हुए बताया हैं.

पौधे और पशु

पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र पर ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव गहरा और व्यापक होने की उम्मीद है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, गर्म तापमान के परिणामस्वरूप पौधों और जानवरों की कई प्रजातियां पहले से ही अपने स्थान से पलायन कर उतर की ओर आगे बढ़ रहे हैं। कई जानवर नई जलवायु व्यवस्था में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं और विलुप्त हो सकते हैं।
जर्नल नेचर क्लाइमेट में 2013 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण 2080 तक पृथ्वी के पौधों के आधे से अधिक और जानवरों के एक तिहाई प्रजातियाँ उनकी वर्तमान स्तर से गायब होने की सम्भावना हैं.

सामाजिक प्रभाव

ग्लोबल वार्मिंग की समस्या जितनी नाटकीय लग रही हैं, इसका प्रभाव भी इतना ही विनाशकारी होने वाला हैं. कृषि प्रणालियों को करारा झटका लगने की संभावना है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बदलते मौसम के कारण, सूखे, गंभीर मौसम, संचित हिमपात की कमी, कीटों की अधिक संख्या और विविधता, निचले भूजल स्तर और कृषि योग्य भूमि के नुकसान के कारण से दुनिया भर में गंभीर फसल विफलता और पशुधन की कमी हो सकती है। जिसके फलस्वरूप अनाज की गुणवत्ता गिरेगी.
कम पौष्टिक भोजन के अलावा, मानव स्वास्थ्य पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव भी गंभीर होने की आशंका है।

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने मलेरिया और डेंगू बुखार जैसी मच्छर जनित बीमारियों के साथ-साथ अस्थमा जैसी पुरानी स्थितियों के मामलों में वृद्धि की सूचना दी है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में सबसे अधिक संभावना है। मच्छर जनित बीमारी जीका वायरस के 2016 के प्रकोप ने जलवायु परिवर्तन के खतरों को उजागर किया। विशेषज्ञों ने कहा कि जब गर्भवती महिलाएं संक्रमित होती हैं तो यह रोग भ्रूण में विनाशकारी जन्म दोष का कारण बनता है, और जलवायु परिवर्तन मच्छरों के लिए उच्च-अक्षांश क्षेत्रों को रहने योग्य बना सकता है. लंबी, गर्मी भी बीमारियों के प्रसार का कारण बन सकती है.

ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के उपाय

ग्लोबल वार्मिंग(Global Warming) कभी खत्म न होने वाली समस्या हैं. ग्लोबल वार्मिंग न तो किसी सरकार की समस्या हैं न ही किसी वैज्ञानिक के संघटन की, बल्कि यह समस्या प्रति जन की हैं. जब तक प्रत्येक मानव इसके लिए योगदान नहीं देगा तब तक इसका कोई हल नहीं निकलेगा. इसलिए जहाँ तक संभव हो सके इस विषय को भली भांति समझ ले, ताकि आपको ध्यान में रहे की आपको क्या करना हैं और क्या नहीं?
यहाँ पर कुछ ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के कुछ उपाय दिए गए है, इनकी अनुपालना जरूर करें.

अधिक से अधिक रिसाइकिल करें

जहाँ तक संभव हो सके नष्ट न होने वाले चीजों का इस्तेमाल न करें, या पुन: चक्रित होने वाले पर्दाथो का उपयोग करे. इसका उद्देश्य पर्यावरण में जारी कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करना है। अगर आप घर पर पैदा होने वाले कचरे का आधा भी रीसायकल करते हैं, तो आप हर साल 2000 पाउंड तक CO2 बचा सकते हैं।

जीवाश्म ईंधन का कम उपयोग करें

वायु प्रदूषण प्रमुख कारकों में से एक है जो ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि का कारण बनता है। कारों का उपयोग कम से कम करें और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। जब भी संभव हो पैदल चलने, बाइक चलाने या कारपूलिंग करने का प्रयास करें। यदि आप ड्राइविंग के घंटे कम करते हैं, तो आप प्रत्येक मील के लिए एक पाउंड CO2 की बचत करेंगे।

हरे पेड़ लगाओ

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन में वनों की कटाई एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और जलवायु को नियंत्रित करते हैं। जितने ज्यादा पेड़ लगायेंगे, उतनी ज्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड का रीसायकल होगा और ऑक्सीजन का उत्पादन होगा. इसलिए, ज्यादा से ज्यादा हरे पेड़ लगाने की सख्त आवश्यकता है क्योंकि केवल एक अकेला पेड़ अपने पूरे जीवनकाल में एक टन कार्बन डाई ऑक्साइड को अवशोषित कर सकता है।

अक्षय ऊर्जा(नवीकरणीय ऊर्जा) पर निर्भर रहो

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक सौर, भूतापीय, पवन और बायोमास जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग शुरू करना और जीवाश्म ईंधन का उपयोग बंद करना है। इसलिए अपने घर में बिजली की आ-पूर्ति के लिए अक्षय(न खत्म होने वाली) ऊर्जा संसाधनों का उपयोग करें।

ऊर्जा कुशल उपकरणों का प्रयोग करें

ऊर्जा कुशल उपकरणों जैसे कि बल्ब, एलईडी लाइट या सौर ऊर्जा से चलने वाले शॉवर सिस्टम में निवेश करके, आप ऊर्जा की खपत को कम कर सकते हैं और स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में मदद कर सकते हैं। यह न केवल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने का सबसे सस्ता तरीका है बल्कि यह वातावरण में जारी कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को भी कम करता है।

कम गर्म पानी का प्रयोग करें

क्या आप जानते हैं कि यदि आप ठंडे पानी को अपनाते हैं और कपड़े धोने के लिए गर्म पानी का उपयोग बंद कर देते हैं, तो आप प्रति वर्ष 500 पाउंड CO2 बचा सकते हैं.

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग सिमित करे

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे टेलीविजन, कंप्यूटर, स्टीरियो, म्यूजिक प्लेयर को उपयोग में न होने पर बंद करना सुनिश्चित करें। यह बिजली उत्पन्न करने के लिए उपयोग किए जाने वाले ईंधन को बचाने में मदद कर सकता है जो बदले में वातावरण में जारी हजारों टन कार्बन डाइऑक्साइड को कम कर सकता है।

जागरुकता फैलाएँ

ग्लोबल वार्मिंग, इसके परिणामों, कारणों और ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए हम अपने दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों के साथ क्या कदम उठा सकते हैं, इसके बारे में बात करें। जलवायु परिवर्तन के बारे में अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए सोशल मीडिया की शक्ति का उपयोग करें।

अल्ट्रा व्हाइट पेंट

ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का निदान करने के लिए अल्ट्रा व्हाइट पेंट का उपयोग किया जा सकता हैं. यह पेंट सूर्य की आने वाली किरणों को 99 प्रतिशत वापस परावर्तित कर देती हैं. इसलिए आस पास वातावरण की तुलना में अल्ट्रा व्हाइट की सतह ज्यादा ठंडी होती हैं.
सामान्य पेंट कैल्शियम कार्बोनेट(Calcium Carbonate) रसायन से बने होते हैं जबकि अल्ट्रा व्हाइट पेंट बेरियम सल्फेट(Barium Sulphate) से बना होता हैं.
इस पेंट को वेंटाब्लैक(Vantablack) के समान माना जा सकता हैं, जो दृश्य प्रकाश की 99 प्रतिशत मात्रा को अवशोषित करने में सक्षम होता हैं.

इन आसान से नियमों और युक्तियों का पालन करके, हम सभी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने और ग्लोबल वार्मिंग को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, इस प्रकार, आने वाली पीढ़ियों के लिए इस पृथ्वी को संरक्षित कर सकते हैं।

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आपने क्या सीखा…

इस पोस्ट में मैंने आपको ग्लोबल वार्मिंग के बारे(about global warming in hindi) में बताया. ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ(meaning of global warming in hindi), इसके प्रभाव, कारण और इसको कम करने के उपाय बताये हैं. इस पोस्ट को लेकर आपके विचार आप विचार और सुझाव नीचे टिप्पणी बॉक्स में लिख सकते हैं.

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