Plastic Pollution In Hindi – प्लास्टिक प्रदूषण कारण, दुष्प्रभाव, समाधान

Plastic Pollution In Hindi – एक विश्वव्यापी समस्या

Plastic Pollution In Hindi – प्लास्टिक पर्यावरण के लिए इसलिए हानिकारक हैं क्योंकि यह कभी नष्ट नहीं होता, प्लास्टिक का जहरीला रसायन मानव हार्मोन को बदल सकता हैं, पानी को ख़राब करता हैं, हमारे समुद्री जीवों के जीवन को खतरे में डालता हैं. ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को कम करने के अलावा इसका कोई दूसरा उपयोग नहीं हैं. “प्लास्टिक के बिना जीवन संभव हैं.” प्लास्टिक की खोज कोई सदियों पुरानी नहीं हैं.

प्लास्टिक सबसे पहले 1907 में खोजा गया था. लेकिन बहुत कम समय में ही इस प्लास्टिक का उपयोग इतना बढ़ गया हैं की “प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या पूरे विश्व को चुनौती दे रही हैं. “प्लास्टिक प्रदूषण से संबंधित(Plastic Pollution In Hindi) इस विशेष आर्टिकल में प्लास्टिक प्रदूषण(plastic pollution) क्या हैं? प्लास्टिक प्रदूषण के कारण, दुष्प्रभाव और इसको कम करने के उपाय के बारें में विस्तृत रूप से जानेंगे. फ़िलहाल के आप ये जान लीजिये कि ‘प्लास्टिक क्या होता हैं?’

प्लास्टिक क्या होता हैं?

प्लास्टिक सिंथेटिक(संश्लेषित) या अर्ध-सिंथेटिक कार्बनिक बहुलक(पोलीमर) होते है. दूसरे शब्दों में, प्लास्टिक में कार्बन और हाइड्रोजन शामिल होते हैं. प्लास्टिक किसी भी कार्बनिक बहुलक से बनाया जा सकता है, अधिकांश औद्योगिक प्लास्टिक पेट्रोकेमिकल्स से बने होते है. प्लास्टिक दो प्रकार के होते हैं – थर्मोप्लास्टिक्स और थर्मोसेटिंग पॉलिमर.

1 थर्मोप्लास्टिक

थर्मोप्लास्टिक को गलाया जा सकता हैं और इसको पुन: चक्रित किया जा सकता हैं. मोल्डिंग मशीन की सहायता से इसको नए उत्पादों में बदला जा सकता हैं.

2 थर्मोसेटिंग

थर्मोप्लास्टिक्स एक प्रकार का कठोर प्लास्टिक हैं. इस प्रकार के प्लास्टिक को वापस गलाया नहीं जा सकता हैं, जिस कारण इसका पुन: चक्रण संभव नहीं हैं.

प्लास्टिक प्रदूषण क्या हैं(what is Plastic Pollution In Hindi)

लगभग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद प्लास्टिक का उपयोग इतना बढ़ गया हैं की अगर सोचकर देखा जाये तो प्लास्टिक के बिना जीवन थोडा असंभव लगता हैं. जब धरती पर प्लास्टिक की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ जाती हैं, कि इसके हानिकारक प्रभाव शुरू हो जाते हैं, इस स्थिति में पर्यावरण प्लास्टिक से प्रदूषित हो जाता हैं. वातावरण में प्लास्टिक की मात्रा बढ़ने पर प्लास्टिक खुले स्थानों जैसे – गलियों-सड़कों, नालियों, नदियों, समुद्रों के आस पास और सागरों के अन्दर देखने को मिलता हैं.

विकासशील देशो में इसके प्रभाव को एक घातक समस्या के रूप में देखने को मिलता हैं क्योंकि वहां पर इसको निस्तारित करने लिए या संग्रहण करने के लिए साधन की सुविधाएँ नहीं होती हैं. प्लास्टिक स्वयं भी प्रदूषण फैलाता हैं और एक प्रदूषक घटक के रूप में भी काम करता हैं. प्लास्टिक को जलाने से वायु प्रदूषण, जमींन में डंप करने पर भूमि प्रदूषण, समुद्र में जाने पर वहां की प्रजातियों की मुक्त गति को बाधित करता हैं.
पॉलिथीन प्रदूषण या प्लास्टिक कचरा इतना सर्वव्यापी हो गया है कि संयुक्त राष्ट्र को भी इस वैश्विक समस्या के लिए संधि लिखनी पड़ी.

पर्यावरण में प्लास्टिक के स्रोत (source of plastic in enviornment)

प्रतिवर्ष भारत लगभग 9.46 मिलियन टन नए प्लास्टिक का उत्पाद करता हैं, जिसमे से 46 प्रतिशत प्लास्टिक कचरे के रूप में इधर उधर बिखरा मिलता हैं. यहाँ पर कुछ मुख्य स्रोत जहां से प्लास्टिक हमारे वातावरण में पहुँचता हैं.

  1. डिजिटल उपकरणों का प्लास्टिक कचरा

आप जिस फ़ोन, लैपटॉप का उपयोग कर रहे हैं या आपके घर के अन्दर जिस टेलीविज़न का उपयोग किया जाता हैं, या इस तरह सभी इलेक्ट्रिक उपकरणों में प्लास्टिक का समावेश होता हैं.

  1. घरों का पॉलिथीन कचरा

दुसरे पर्दाथो की तुलना में प्लास्टिक के सस्ता होने के कारण विकासशील देशो में इसका भरपूर उपयोग होता हैं. सभी घरों के अन्दर नज़र लगाई जाये तो छोटे पेन की निब से लेकर, बड़े बड़े उपकरण जैसे फ्रिज, वाहन सभी के अन्दर प्लास्टिक का उपयोग किया जाता हैं, जिनका सही ढंग से निस्तारण न करने पर पॉलिथीन प्रदूषण होता हैं.

  1. मैन्युफैक्चरिंग कम्पनियों का प्लास्टिक कचरा

लगभग सभी कम्पनियाँ अपने उत्पादित सामान को ग्राहक तक पहुँचाने के लिए प्लास्टिक के डब्बों या पोलीथिन की पैकेजिंग करती हैं. इसलिए गांवों-कस्बों-शहरों की सड़कों, नहरे-नालियां सभी जगह छोटे छोटे प्लास्टिक के बैग्स देखने को मिल जाते हैं.

  1. अन्य प्लास्टिक कचरा

इन सभी के अलावा हॉस्पिटल में काम आने वाले उपकरण, सिगरेट के बट्स – जिनके फिल्टर में छोटे प्लास्टिक फाइबर होते हैं, पानी की बोतलें, बोतल के ढक्कन, खाने के रैपर, किराने के बैग, स्ट्रॉ सभी प्लास्टिक के बने होते हैं.

प्लास्टिक खतरनाक क्यों हैं?

क्या आपने कभी इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की हैं की प्लास्टिक आख़िरकार हमारे लिए खतरा क्यों बना हुआ हैं? दरअसल प्लास्टिक पेट्रोलियम से बना एक सिंथेटिक कार्बनिक बहुलक है जिसमें पैकेजिंग, भवन और निर्माण, घरेलू और खेल उपकरण, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि सहित विभिन्न प्रकार के उपयोगो के लिए काम में लिया जाता हैं.

प्लास्टिक सस्ता, हल्का, मजबूत होता है. हर साल 300 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है, जिसमें से आधे का उपयोग शॉपिंग बैग, कप और स्ट्रॉ जैसी एकल-उपयोग वाली वस्तुओं को डिजाइन करने के लिए किया जाता है.

विकासशील एशियाई या अफ़्रीकी देशो में या गरीब देशो में प्लास्टिक का सस्ता होने के कारण इनका भरपूर उपयोग किया जाता हैं. प्लास्टिक का उपयोग करने के बाद इसके निस्तारण की समस्या इसको एक विश्वव्यापी समस्या बनाती हैं.

प्लास्टिक न तो गलता हैं, न हीं जलता हैं. सालों तक प्लास्टिक हमारे वातावरण में मौजूद रहता हैं, और प्रतिवर्ष नया उत्पादित होने वाला प्लास्टिक कचरा भी उसमे शामिल हो जाता हैं, इस तरह यह समस्या बढती जा रही हैं. और प्लास्टिक हमारे सामने एक खतरा बना हुआ हैं.
यहाँ पर प्लास्टिक के बारें में कुछ तथ्य दिए गए हैं, जिससे यह समझने में आसानी होगी की प्लास्टिक(पॉलिथीन प्रदूषण) एक खतरा क्यों हैं?

प्लास्टिक के बारें में तथ्य(facts about plastic in hindi)

यहं पर कुछ ऐसे प्लास्टिक के बारे में तथ्य हैं जिनके ऊपर आप विश्वास नहीं करेंगे, लेकिन यदि प्लास्टिक केवल सौ वर्षों के भीतर पूरी पृथ्वी को भ्रमित कर सकता हैं तो यह भी संभव हो सकता हैं.

  • हमारे महासागरों में अब तक कुल 5 ट्रिलियन किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक कचरा तैर रहा हैं.  
  • दुनिया भर में, समुद्र तट या बीच का कूड़ा का 73 प्रतिशत प्लास्टिक है. जिसमे से अधिकतर सिगरेट बट्स, बोतलें, बोतल कैप्स, खाने वाले सामान के रैपर, किराने की थैलियों देखने को मिलेगी.
  • विश्व प्लास्टिक उत्पादन 1950 में 2.1 मिलियन टन से बढ़कर 1993 में 147 मिलियन से 2015 तक 406 मिलियन हो गया है, यह पर्यावरण के लिए अशुभ संकेत हैं.
  • 2050 तक, पृथ्वी पर लगभग हर समुद्री पक्षी, प्रजाति प्लास्टिक का सेवन करने के लिए मजबूर हो जाएगी.
  • 2015 तक, 6.3 बिलियन टन से अधिक प्लास्टिक कचरा पृथ्वी पर फ़ैल चूका था. उसमें से लगभग 9 प्रतिशत का पुनर्नवीनीकरण किया गया था, 12 प्रतिशत को जला दिया गया था, और 79 प्रतिशत लैंडफिल या पर्यावरण में जमा हो गया हैं.
  • दुनिया भर में, हर मिनट लगभग दस लाख प्लास्टिक पानी की बोतलें बेची जाती हैं.
  • ऐसा अनुमान लगाया गया हैं कि प्लास्टिक का क्षरण लगभग 450 तक या इससे अधिक समय में होता है.
  • आज प्लास्टिक का सबसे बड़ा स्रोत पैकेजिंग सामग्री है. पोलीथिन का तह कचरा अब विश्व स्तर पर उत्पन्न होने वाले सभी प्लास्टिक कचरे का लगभग आधा है – इसमें से अधिकांश को कभी भी पुनर्नवीनीकरण या खत्म नहीं किया जा सकता है.
  • समुद्री जानवरों की अब तक करीब 700 प्रजातियों एसी पायी गयी हैं जो खाने की क्रिया में प्लास्टिक से जूझ रही हैं.
  • 40 प्रतिशत से अधिक प्लास्टिक सिर्फ एक बार इस्तेमाल किया जाता है, और फिर फेंक दिया जाता है.

मुझे इस बात की चिंता है कि हम जिस हवा में सांस लेते हैं और जिस पानी को हम पीते हैं. यदि अत्यधिक मछली पकड़ना जारी रही, यदि इसी तरह प्रदूषण जारी रहा, तो इनमें से कई प्रजातियां के चेहरे इस पृथ्वी से हमेशा के लिए गायब हो जाएंगी – बर्नार्ड मार्कस(plastic pollution in hindi)

bird and fishing net
plastic pollution at seaways

प्लास्टिक प्रदूषण के कारण(cause of plastic pollution)

प्लास्टिक प्रदूषण(plastic pollution in hindi) की समस्या को हल करना आसन लग सकता हैं, क्योंकि रीसायकल करना या सरकार द्वारा स्थानीय या वैश्विक स्तर पर किसी पहल की शुरुआत कर देना इस बात की सहानुभूति लगती हैं की यह समस्या ठीक हो सकती हैं. लेकिन सच्चाई यह हैं कि प्लास्टिक का उत्पादन बड़े स्तर से लेकर छोटे स्तर तक निरंतर हो रहा हैं. यहाँ पर कुछ कारण दिए गए हैं, जो की पॉलिथीन प्रदूषण का कारण बनते हैं.  

  1. सादा पुराना कचरा

प्लास्टिक हर जगह है, यहां तक कि उन वस्तुओं पर भी जिनकी आप उम्मीद नहीं कर सकते हैं. दूध के डिब्बों में प्लास्टिक की लाइन लगी होती है, पानी की बोतलें जो आपको हर जगह मिल जाती हैं, और कुछ उत्पादों में छोटे प्लास्टिक के मोती भी हो सकते हैं.
जब भी इनमें से किसी एक भी वस्तु को फेंक दिया जाता है या सिंक में धोया जाता है, तो जहरीले प्रदूषकों के पर्यावरण में प्रवेश करने और नुकसान करने की अधिक संभावना होती है.
कचरा को डंप करना और लैंडफिल बड़ी समस्याएं हैं, क्योंकि जब प्लास्टिक को जब जमींन में दबाया जाता हैं तो सैकड़ों वर्षो तक वन्यजीवों, भूजल को प्रभावित करेगा.
 

  1. प्लास्टिक का अति उपयोग

चूंकि प्लास्टिक कम खर्चीला है, यह आज दुनिया में सबसे व्यापक रूप से उपलब्ध और अत्यधिक उपयोग की जाने वाली वस्तुओं में से एक है. तेजी से शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि ने सस्ते प्लास्टिक की मांग को बढ़ा दिया है. चूंकि यह एक किफायती और टिकाऊ सामग्री है, इसलिए इसका उपयोग पैकेजिंग सामग्री से लेकर प्लास्टिक की बोतलों और कंटेनरों, स्ट्रॉ से लेकर प्लास्टिक कैरी बैग तक हर संभव तरीके से किया जाता है.
इतने सस्ते होने के कारण, हमारे पास एक डिस्पोजेबल की मानसिकता है. हम उनका बहुत ज्यादा उपयोग किये बिना, एक बार मे ही उसको फेंक देते हैं. जब इसका निपटान किया जाता है, तो यह आसानी से विघटित नहीं होता है और खुली हवा में जलाने पर आस-पास की भूमि या वायु को प्रदूषित करता है.

  1. प्लास्टिक का विघटन न होना

प्लास्टिक बनाने वाले रासायनिक बंधन(एकलक) मजबूत होते हैं और लम्बे समय तक टिकने के लिए बने होते हैं. प्लास्टिक की अपघटन दर आमतौर पर 500 से 600 वर्ष तक होती है.
EPA (पर्यावरण संरक्षण एजेंसी) के अनुसार, प्लास्टिक का हर छोटा टुकड़ा जिसको कभी भी बनाया और लैंडफिल में भेजा गया या पर्यावरण में डंप किया गया था, अभी भी मौजूद है. अर्थात प्लास्टिक का अभी एक अंश भी खत्म नहीं हुआ हैं.

  1. मछली पकड़ने के जाल

वाणिज्यिक मछली पकड़ना दुनिया के कई हिस्सों के लिए एक आर्थिक कार्य है, और मिलियन लोग अपने दैनिक अस्तित्व के लिए मछली खाते हैं. हालांकि, इस उद्योग ने कई तरह से महासागरों में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या में योगदान करने में मदद की है. कुछ बड़े पैमाने पर ट्रोलिंग कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले जाल आमतौर पर प्लास्टिक से बने होते हैं. सबसे पहले, ये लंबे समय तक पानी में डूबे रहते हैं, अपनी मर्जी से विषाक्त पदार्थों का रिसाव करते हैं, और अक्सर टूट जाते हैं या खो जाते हैं, जहां कहीं भी गिरते हैं, वहीं रह जाते हैं।

  1. प्लास्टिक और कचरे का गलत निपटान

प्लास्टिक का निपटान अक्सर गलत तरीके से किया जाता है, प्लास्टिक को अक्सर लैंडफिल में समाप्त करने की कोशिश की जाती हैं, यह कोई निश्चित हल नहीं हैं, क्योंकि प्लास्टिक एक टिकाऊ पर्दाथ हैं, इसलिए इसे तोड़ना और समाप्त लगभग असंभव है. प्लास्टिक को जलाना अविश्वसनीय रूप से विषैला होता है और हानिकारक वायुमंडलीय स्थितियों और घातक बीमारियों को जन्म दे सकता है.
रीसाइक्लिंग में भी प्लास्टिक के कण वातावरण में उड़ते हैं, जो जलन और कई प्रकार की बिमारियों को जन्म देते हैं.

  1. वायु के प्रवाह में इनका उड़ना

कई बार कचरा हवा के द्वारा ले जाया जाता है. प्लास्टिक, जो बहुत हल्का होता है, मंद हवाओं में भी उड़ जाता है और बारिश से सीवरों, नालों, नदियों और अंत में महासागरों में बह जाता है. इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ को भी प्लास्टिक प्रदूषण के अन्य कारणों के रूप में माना जाना चाहिए.

प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभाव(serious effect of plastic pollution)

अब तक आप यह समझ चुके होंगे की प्लास्टिक एक “कभी खत्म न होने वाली चीज हैं”. इसलिए इसके दुष्प्रभाव का स्तर इतना ऊँचा हैं कि यह वातावरण पर कहर बरसा सकता हैं. प्लास्टिक से होने वाले दुष्प्रभाव दीर्घकालीन और स्थायी हो सकते हैं.

  1. मानव स्वास्थ्य पर प्लास्टिक के प्रभाव

जिस तरह से समुद्र प्लास्टिक से प्रदूषित हो रहा हैं तो वहां से प्राप्त होने वाली मछलियाँ दूषित या अविकसित होती हैं. जब मानव समाज इस प्रकार के भोजन का सेवन करते हैं तो कई स्थायी बीमारियों का शिकार हो सकता हैं. वैज्ञानिकों ने एक सर्वे में पाया कि 114 समुद्री प्रजातियों में माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है. दूसरा, हम पैकेजिंग के माध्यम से प्लास्टिक का उपभोग करते हैं. कई प्लास्टिक वस्तुओं में मौजूद बीपीए(ब्लड प्रेशर, सुगर और ब्रेन से संबंधित) जो भोजन के माध्यम से सीधे संपर्क में आते हैं.
हम बोतलबंद पानी के जरिए माइक्रोप्लास्टिक पीते हैं. डब्ल्यूएचओ ने 2018 में चौंकाने वाला शोध प्रकाशित किया जिसमें 90% बोतलबंद पानी में माइक्रोप्लास्टिक की उपस्थिति का खुलासा हुआ, जिसके परीक्षण से पता चला कि 259 में से केवल 17 प्लास्टिक से मुक्त थे. इस प्रकार के पानी के उपयोग से पेट या आँतों के कैंसर की समस्याएँ पैदा हो सकती हैं.

  1. प्लास्टिक खाद्य श्रंखला को प्रभावित करता हैं

जमींन में प्लास्टिक का निस्तारण करने के बाद प्लास्टिक छोटे छोटे कणों में टूट जाता हैं. प्रदूषण फैलाने वाले इन प्लास्टिक के टुकड़ों को जब सबसे नन्हे जीवों, जैसे प्लवक ग्रहण करते हैं तो इनके आगे की श्रंखलाओं पर सतत रूप से नकारात्मक असर पड़ता हैं. अत: जब ये जीव प्लास्टिक के अंतर्ग्रहण के कारण जहर बन जाते हैं, तो इससे बड़े जानवरों के लिए समस्याएँ पैदा हो जाती हैं जो भोजन के लिए उन पर निर्भर होते हैं.
यह खाद्य श्रृंखला के साथ-साथ हर कदम पर कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है.

  1. भूजल प्रदूषण(water pollution by plastic)

पृथ्वी पर मौजूद पानी का केवल कुछ हिस्सा लगभग 0.3 प्रतिशत ही पीने के लायक हैं. कैलिफोर्निया से लेकर भारत के कुछ हिस्सों में जल संरक्षण पहले से ही एक चिंता का विषय है, लेकिन प्लास्टिक और कचरे के लीक होने से दुनिया का पानी बहुत खतरे में है. अगर आपने कभी कूड़े का ढेर देखा है, तो कल्पना करें कि हर बार बारिश होने पर क्या होता है – तो कल्पना करें कि आप जिस पानी को पिते हैं उसमे भी इसके अंश मौजूद रहते हैं. भूजल और जलाशय पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों के रिसाव के कारण अतिसंवेदनशील है.
महासागरों को प्रभावित करने वाले अधिकांश कूड़े और प्रदूषण भी प्लास्टिक से ही निकलते हैं. इसका कई समुद्री प्रजातियों पर भयानक परिणाम हुआ है, और इसका परिणाम उन लोगों पर भी हो सकता हैं जो मछली खाते हैं.

  1. प्लास्टिक से भूमि प्रदूषण

जब प्लास्टिक को लैंडफिल में डंप किया जाता है, तो यह पानी के साथ परस्पर क्रिया करता है और खतरनाक रसायन बनाता है. जब ये रसायन भूमि में रिसते हैं, तो वे पानी की गुणवत्ता को खराब करते हैं. हवा अपने तेज प्रवाह से प्लास्टिक को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है और जमा करती है, जिससे भूमि पर कूड़े की वृद्धि होती है.

  1. प्लास्टिक से वायु प्रदूषण

प्लास्टिक को खुली हवा में जलाने से जहरीले रसायनों के निकलने से पर्यावरण प्रदूषण होता है. प्रदूषित हवा, जब मनुष्यों और जानवरों द्वारा साँस ली जाती है, तो उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और सांस की समस्या पैदा कर सकती है.

  1. प्लास्टिक जानवरों को मारता हैं

इधर उधर जब प्लास्टिक के कूड़े के ढेर लग जाते हैं तो घुमने वाले जानवर इनको खा लेते हैं और यह प्लास्टिक उनके पेट में जमा हो जाता हैं, जो शीघ्र ही उनकी जान ले लेता हैं.

  1. प्लास्टिक एक जहर है

मनुष्य कई जहरीले रसायनों का उपयोग करके कृत्रिम रूप से प्लास्टिक बनाता है. इसलिए, प्लास्टिक के उपयोग और उसके संपर्क को दुनिया भर के लोगों को प्रभावित करने वाली कई स्वास्थ्य चिंताओं से जोड़ा जा सकता हैं. प्लास्टिक बनाने, भंडारण करने, निपटाने और उसके आस-पास रहने की प्रक्रियाएं जीवित चीजों के लिए बेहद हानिकारक होती हैं.

  1. प्लास्टिक की सफाई महंगी है

प्लास्टिक के अंधाधुंध उपयोग के कारण वातावारण में इसकी उपलब्धता इतनी बढ़ गयी हैं की इसको साफ करनेके लिए सालों करोड़ों खर्च किये जाते हैं. जैसे जैसे आबादी बढ़ रही हैं, प्लास्टिक के निस्तारण की समस्या बढ़ रही हैं. दुनिया के कई हिस्सों में कचरा डालने के लिए जगह ढूंढना एक समस्या बनती जा रही है.
साथ ही, अधिक प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्रों में पर्यटन में कमी आती है, जिससे उन अर्थव्यवस्थाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है.

प्लास्टिक प्रदूषण के समाधान और उपाय

वास्तविकता यह है कि प्लास्टिक प्रदूषण को तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक या तो कंपनी इसको बनान बंद न कर दे या, सरकार फ़ूड पैकेजिंग या कॉस्मेटिक सामग्री और पानी की बोतलों पर कोई शख्त निर्णय ले. इस समस्या का समाधान मानव समाज और कंपनियों द्वारा ही किया जा सकता है, जो हर स्तर पर कचरे को कम करने वाले नियमों को लागू करने के लिए सहमत हो. प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए शीर्ष युक्तियाँ यहं पर दी गयी हैं:

  1. पर्यावरण के अनुकूल चीजों का इस्तेमाल करें

प्लास्टिक बैग की बजाय हम कागज, कपडे या झूट के बैग का इस्तेमाल कर सकते हैं. हमेशा अपने साथ एक कपड़े के बैग को रखे, जब कभी आपको कुछ खरीदना हो तो आप इस बैग में उसको कैर्री कर सकते हों. अगर आप प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं तो बार बार उसका इस्तेमाल करें.

  1. बोतलबंद का इस्तेमाल बंद करें

लगभग हर घर में प्लास्टिक की बोतल के अलावा दुसरे पर्दाथ की बोतल जरूर होगी, आप उसका उपयोग कीजिये जितना हो सके प्लास्टिक की पानी बोतल के इस्तेमाल से बचे.
अधिकतर पानी की बोतले एक बार उपयोग के बाद फेंक दी जाती हैं, और इसका मतलब है कि हर बार जब कोई बोतल को फेंकता हैं तो, वह कूड़ेदान में चली जाती है. चूंकि ये प्लास्टिक की बोतलें आमतौर पर पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट से बनाई जाती हैं, इसलिए इसे प्राकृतिक रूप से सड़ने में 400 साल से अधिक का समय लगता है.

  1. बॉक्स फ़ूड पैकेजिंग का इस्तेमाल ना करे

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि खाने के बॉक्स को बनाने और पैक करने में कितना प्लास्टिक शामिल होता है. आइसक्रीम का कप-बॉक्स, बेकरी का सामान, छोटे प्लास्टिक कंटेनर, ढक्कन और बर्तन का इस्तेमाल बखूबी किया जाता हैं. कृपया करके इनकी बजाय आप दुसरे माध्यम को अपनाएं.

  1. सब कुछ रीसायकल करें

सर्वप्रथम कोशिश करें की आप प्लास्टिक को उपयोग में लायें ही नहीं, लेकिन अगर आवश्यकता हो तो इसका बार बार उपयोग करें, और जब यह कचरा बन जाये तो इसका उचित तरीके से निदान करें, ताकि इसका रीसायकल हो सके.

  1. डिस्पोजेबल प्लास्टिक का उपयोग न करें

हम अपने दैनिक जीवन में लगभग 90% प्लास्टिक की वस्तुओं का केवल एक बार उपयोग करते हैं और फिर चक कर देते हैं, जैसे कि किराने की थैलियां, प्लास्टिक की चादर, डिस्पोजेबल कटलरी, स्ट्रॉ और कॉफी-कप के ढक्कन. सबसे पहले डिस्पोजेबल प्लास्टिक का इस्तेमाल करना बंद करें. इस प्रकार के डब्बों और थैलियों में वाला भोजन किसी भी तरह से आपे लिए सुरक्षित नहीं हैं.

  1. लोगो को अहसास कराएँ

अपने आस पास की स्थानीय दुकानों और रेस्तरा को इस बात का अहसास कराएँ कि प्लास्टिक हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए कितना घातक हैं. आप उनको प्लास्टिक के कम उपयोग की सलाह देने के साथ आप अपने गली मौहल्लो में पोलीथिन कचरा पात्र रखवा सकते हैं.

  1. पर्यावरण संबंधी मुद्दो से जुड़े

जहाँ तक हो सके अपने आपको जानकारी से अपडेट रखे, पर्यावरण और प्रदूषण से संबंधित मुद्दों पर लोगो में जागरूकता फैलाये और जब कभी मौका इले तो इन पर खुल कर अपने विचार रखे.

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आपने क्या सीखा ….(what did you learn about plastic pollution in hindi)

इस पोस्ट के जरिये मैंने प्लास्टिक प्रदूषण(पोलीथिन कचरा) के बारें में आपके साथ बहुत सारें विषयों पर चर्चा की हैं. हमने प्लास्टिक प्रदूषण की परिभाषा(plastic pradushn kya hain), इसके कारण(cause of plastic pollution), प्रभाव(effects of plastic pollution) और इसके प्रभावी उपायों(solution of plastic pollution) के बारे में जाना.plastic pradushn(plastic pollution in hindi) के बारें में आप अपने विचारों और सुझावों को कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे.

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