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पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय – भुतिया कहानी

पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय – डरावनी भुतिया कहानी

भूतिया डरावनी कहानियां में आप पढने जा रही हैं पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय

आज ऑफिस में काम थोडा ज्यादा होने के कारण रोशन को घर पहुचने में थोड़ी देरी हो गई. घर आते ही रोशन ने अपना बैग एक तरफ़ रखा टाई ढीली की और सोफे पर आराम से बैठ गया. पांच मिनट बाद उठकर खाने के लिए कुछ ढूंढने लगा, पर कुछ नहीं मिला फिर कुछ बनाने का मन बनाया लेकिन, मुह बनाकर वो चला गया. चलो! आज खाना नहीं बनायेंगे. बाहर से कुछ मंगा लेते हैं. गूगल पर पिज़्ज़ा हब डालकर कोई नंबर निकाला. और फ़ोन मिलाया.
हेल्लो! मुझे बिग साइज़ पिज़्ज़ा चाहिए. क्या आप ला सकते हैं.
जी सर! हम आपके आर्डर को शीघ्र ही डीलीवर कर देंगे. कृपया करके अपना एड्रेस बताएं…
जी लिखिए…504 गीता मेंशन बागुली रोड. जी सर हम 15 मिनट के अन्दर ही आपका पिज़्ज़ा आर्डर डिलीवर कर देंगे.
इतना कहते ही पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय ने अपना फ़ोन कट कर दिया.
रोशन सोचने लगा. पिज़्ज़ा इतना जल्दी ……डिलीवर कब से करने लगा. अपने को क्या करना हैं…जल्दी आयेंगा… जल्दी खायेंगे… जल्दी सोयेंगे. 10 मिनट बाद बेल बजती हैं, और आवाज़ आती हैं – पिज़्ज़ा. रोशन ….अरे इतनी जल्दी.
रोशन ने उठकर दरवाज़ा खोला. पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय को अन्दर बुलाया. आपने ही बिग साइज़ पिज़्ज़ा आर्डर किया था. जी मैंने ही….इतना कहकर रोशन पैसे लेने के लिए वापस गया.
कितने हुए… इसके कोई पैसे नहीं… ये फ्री ऑफ़ कोस्ट हैं. अरे एसे कैसे…
मैंने कह दिया न… पिज़्ज़ा बॉय ने चिल्लाकर बोला.
अरे भाई इतना गुस्सा क्यों हो रहे हो… ऐसा कहते हुए जैसे ही रोशन पीछे मुड़ा, उसके तो होश उड़ गए. पिज़्ज़ा बॉय जमींन से चार फीट की ऊंचाई पर था और उसका चेहरा पहले जैसा बिलकुल नहीं था. आधा काला और खून से सना हुआ चेहरा देखकर रोशन की तो हवा टाइट हो गयी. अरे तुम्म्ममम कोन ….कोन हो तुम?
ह्ह्ह्ह ही ….पिज़्ज़ा …..पिज़्ज़ा बॉय हूँ मैं.


अरे भाई तुम जाओ यहां से.
मैं तो चला जाऊंगा पर तुम्हे भी साथ चलना पड़ेगा.
जिसके पहले की रोशन कुछ बोले पिज़्ज़ा बॉय उसको लेकर उड़ गया… और फिर लौट कर कभी नहीं आया. पिज़्ज़ा बॉय ने उसके साथ क्या किया किसी को भी मालूम नहीं.
रोशन किराये के घर पर रहता था. कुछ दिनों तक मकान मालकिन ने उसका इंतज़ार किया, उसको फ़ोन भी लगाया, उसके घर भी फ़ोन किया. लेकिन वहां से भी कुछ मालूम नहीं पड़ा. कुछ दिनों बाद रोशन के घर वाले आये और उसका सारा सामान लेकर चले गए. और उसका कमरा खली कर दिया.


दो महीने बाद…..
स्नेहा की कॉलेज अभी ख़त्म हो गए और स्नेह अभी कोई जोब करना चाहती है. इसलिए उसने निश्चय किया की वो अभी एक कमरा लेगी. गीता मेंसन पर टू लेट का ad देखकर उसने मालकिन से संपर्क किया और कमरा बुक करा लिया. मकान मालकिन अच्छी थी लड़की देखकर उसने कहा बेटा कोई भी जरुरत हो तो, कोई खाने की तकलीफ तो, कुछ भी काम हो तो मुझे बता देना बेटा. ठीक हैं आंटी….
स्नेहा ने पास मैं ही एक आईटी कंपनी में जॉब मिल गयी. फ्रेशर होने के कारण काम का लोड कुछ ज्यादा था. शुरू शुरू में स्नेहा जोश के साथ सभी काम कर लेती थी. लेकिन कुछ समय बाद ऑफिस का काम, खाना बनाना, कपडे धोना थोडा थक जाती थी वो..इसलिए कभी कभी वो सोचती थी की खाना अगर बाहर से मंगाया जाये तो शायद काम का लोड कुछ कम हो जाये.
स्नेहा ने फ़ोन उठाया और सर्च किया….ok google… pizza hub near me…. उसने नंबर पर काल किया. मुझे पिज़्ज़ा चाहिए. क्या आप मेरा आर्डर ले सकते अभी. जी बिलकुल.. आप अपने एड्रेस दीजिये… हम 15 मिनट में आपका आर्डर डिलीवर कर देंगे. 504 गीता मेंशन बागुली रोड. ओके हम अभी आपका आर्डर डिलीवर करते हैं. स्नेहा चोंक गयी. ये पिज़्ज़ा इतना जल्दी डिलीवर कब से होने लगा. चलो कोई बात नहीं.
10 मिनट बाद टिंग टोंग टिंग… घंटी बजती हैं. कोन…. पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय …
अरे इतनी जल्दी… स्नेहा ने गेट खोला और उसको दरवाज़े पर रुकने को कहा. स्नेहा अन्दर जाकर पैसे लेने गयी और बोली भैया कितने हुए इसके. मेडम ये पिज़्ज़ा फ्री हैं. इसका कोई चार्ज नहीं हैं. स्नेहा हैरान होती हुई जैसे ही पीछे मुड़ी उसने देखा कि पिज़्ज़ा बॉय अपना गेट-अप चेंज कर चूका था. पिज़्ज़ा बॉय 30 डिग्री के कोण पर झुका हुआ और जमीन से चार फीट की ऊंचाई पर था. स्नेहा एक दम से बेहोश हो गयी और गिर गयी. पिज़्ज़ा बॉय उसको उठाकर ले जाना चाहता था. लेकिन स्नेहा के गले में येशु का लॉकेट था इसलिए पिज़्ज़ा बॉय छटपटाते हुए वापस चला गया. अगले दिन स्नेहा ऑफिस के बाद घर नहीं गयी. वो सीधा चर्च के लिए निकल गयी. स्नेहा ने फ़ादर को सारी बात सुनाई.
फ़ादर ने कहा की कोई बात नही बेटा. तुम इस लॉकेट को कभी अपने गले से बाहर मत निकालना. गलती से भी मत. बहुत ही जल्दी मैं तुम्हारे घर को जल से पवित्र कर दूंगा. अब तुम निश्चिन्त होकर घर जाओ.
स्नेहा अपने घर लौट आयी. स्नेहा ने अपनी सहेली दिया को फ़ोन किया. दिया क्या तुम आज फ्री हो, दिया ने हा भरा और कहाँ मुझे थोड़ी देर हो जाएगी. पर मैं आउंगी जरूर ….ठीक हैं बाय! दिया ने फ़ोन कट कर दिया. एक घंटे बाद टिंग टंग टिंग घंटी बजती हैं. अरे दिया तुम इतनी जल्दी…. अरे मेरा काम जल्दी ख़त्म हो गया, तो मैं जल्दी चली आयी.
तुम बैठो मैं अभी नहा कर आती हूँ. ठीक हैं….
स्नेहा नहाने चली गयी. इस भरोसे की दिया बैठी हैं, स्नेहा ने अपना लॉकेट उतार दिया. स्नेह नहाकर जैसे ही बाहर आई. तो दिया को देखकर चोंक गयी. दिया एक हाथ में चाकू लेकर दुसरे हाथ की पांचो उंगलियों में कट कट गुमाए जा रही थी. दिया दिया…क्या हो गया हैं तुम्हे…..
दिया मत कहो मुझे… मत कहो…. पिज़्ज़ा…..पिज़्ज़ा बॉय ….हूँ मैं…..स्नेहा की तो मानो जान ही निकल गयी. उसने गले पर भी हाथ फेरा पर उसने तो लॉकेट उतार दिया था. जैसे ही पिज़्ज़ा बॉय आगे बढ़ता उसके पहले फादर वहां पर आ गए… और अपनी ताकत से उस बॉय को रोक लिया. फ़ादर ने कहा बेटी अपना लॉकेट पहन लो. और एक तरफ आ जाओ. फादर ने पुछा कोन हो तुम…? क्यों इस बच्ची के पीछे पड़े हो…
मैं इस बच्ची को ही नहीं सभी यंग टीनेजर को मारूँगा.
पर क्यों…..तुम सब मासूमो की जान लेने को क्यों तुले हो?
वो सब मत पूछो.. मुझे छोड़ो… छोड़ो मुझे…छोड़ दो मुझे… ह्ह्ह
पहले तुम परिचय बताओ… बताओ क्या हुआ तुम्हारे साथ ….क्या पता जीसस तुम्हारी मदद कर पाए.


दो साल पहले की बात हैं. रात बहुत हो चुकी थी. मैं घर पर जाने ही वाला था की मेनेजर के पास इसी एड्रेस से एक कॉल आया था. और पांच पिज़्ज़ा आर्डर किये थे. मेनेजर ने बोला की आज का लास्ट आर्डर हैं इसको डिलीवर कर दो फिर घर चले जाना. मुझे क्या पता था की वो आर्डर मेरी जिंदगी का लास्ट आर्डर होगा. मैं ठीक आधे घंटे बाद वहां पर पिज़्ज़ा लेकर पहुंचा. मैं उनको पिज़्ज़ा दे ही रहा था की, मुझे फटकार लगाई गयी की इतना लेट क्यों आये.
साहब रात बहुत हो गयी हैं इसलिए सारे वर्कर्स घर चले गए हैं. इसलिए थोड़ी देर हो गयी हैं.


पांचो के पांचो शराब के नशे में धुत थे. कोई भी मेरी बात सुनने को तैयार नही था मैंने उनसे पैसे मांगे. बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद भी उन्होंने मुझे कोई पैसा नहीं दिया.
मैं थोड़ी देर वहीँ पर खड़ा रहा. मैंने फिर मांगे तो वो सभी मुझे मारने लगे. सभी ने बारी बारी करके मुझे मारा. मैं खुद को संभाल नहीं सका. वो मुझे पिटते पिटते खिड़की के पास ले गए. और वहीँ से मुझे धक्का दे दिया. फिर मेरी कहानी ख़त्म हो गयी.
लेकिन जो भी इस घर में आकर रहता हैं. उसका पिज़्ज़ा का आर्डर मैं ही लेकर आता हूँ और सभी को मार डालता हूँ. पिज़्ज़ा को डिलीवर करने में तीस मिनट का समय लगता हैं. लेकिन मैं पंद्रह मिनट में ही यहाँ पर पहुँच जाता हूँ. और सभी को मार डालता हूँ. और इसी खिड़की से लेकर उड़ जाता हूँ.
फादर ने उसकी घटना को ध्यान से सुना. देखो तुम्हारे साथ जो भी हुआ उसका मुझे बहुत दूख़ हैं. लेकिन इन मासूम लोगो को तुम नुकसान पहुंचाना छोड़ दो. मैं तुम्हे मुक्ति दिला सकता हूँ. इतना कहकर फादर कुछ जाप करने लगते हैं और पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय की आत्मा हवा में मिलती हुई गायब हो जाती हैं.
फादर स्नेहा को आशीवार्द देकर वापस लौट जाते हैं.
आधे घंटे बाद टिंग टोंग टिंग….. घंटी बजती हैं. स्नेहा दरवाज़ा खोलती हैं.
हाय स्नेहा..अरे दिया तुम…तुम तो ऐसे बोल रही हो की मैं अभी गयी और वापस लौट कर चली आई.
अच्छा कल तुम्हारे साथ कुछ हुआ था.. आई ऍम सॉरी बट मुझे कुछ काम था तो मैंने फ़ोन कट कर दिया. अब बताओ…..
अम्मम अब रहने दो… अगर तुम उस टाइम सुनती तो बता देती. पर (धीरे धीरे) अब तुमको वो जानने की कोई जरुरत नहीं हैं. चलो खाने के लिए पिज़्ज़ा आर्डर करते हैं. हा ठीक हैं, मेरे लिए मिड साइज़ का ही करना(दिया). स्नेहा ने फ़ोन लगाया. जी मेम.. दो पिज़्ज़ा मिड साइज़ के…. ओके आप एड्रेस लिखवा दीजिये… आधे घंटे में डिलीवर हो जायेगा.

इस भुतिया डरावनी कहानी(horror stories in hindi) पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय से क्या सीखा – अपने स्वार्थ के लिए किसी को भी रत्ती भर का भी नुकसान मत पहुचाओ क्या पता कल उसकी आत्मा हमसे ही बदला लेने के लिए यहाँ पर रुकी हो.

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