TWO LADY HORROR SCENE

स्कूल से घर – एक डरावनी लड़की की कहानी

स्कूल से घर – एक भुतिया डरावनी कहानी

डरावनी और भुतिया कहानियों में आप पढने जा रहे हैं – स्कूल से घर

10th के एग्जाम नजदीक आ रहे थे. और सोना को परीक्षा के लिए काफी तैयारी करनी थी। इसलिए सोना ने तय किया कि अब से वह लाइब्रेरी में ही पढ़ेगी और वैसे भी परीक्षा को ध्यान में रखते हुए लाइब्रेरी को देर रात तक खोलने की अनुमति मिल गयी. घर पर रहकर सोना आलस और दूसरी चीजों में आकर्षित हो जाती थी.घर और स्कूल के बीच की दुरी बहुत ज्यादा नहीं थी इस कारण अब केवल लाइब्रेरी में ही.

सोना सुबह 6:00 बजे घर से निकली थी। 3:00 बजे स्कूल से छूटने के बाद सोना लाइब्रेरी में चली गई। सोना को बहुत सारा सिलेबस कवर करना था। इसलिए रात के 10:00 बज गए पता ही नहीं चला सोना खड़ी हुई, और चारों और देखा। उसे वहां पर उसके अलावा और कोई नहीं मिला। सोना ने सारी किताबें उठाई, बैग भरा, और वहां से निकल गई। सोना इतनी रात को पहले कभी अकेले घर से बाहर नहीं निकली थी, इसलिए थोड़ा डरती हुई तेजी से कदम बढ़ा रही थी।
सोना इधर-उधर चारों ओर नजर घुमाये बिना बस आगे देखते हुए चल रही थी। अभी आधे रास्ते में ही आयी थी कि हवा की गति थोड़ी बढ़ गई। हवा की तीखी प्रहार सोना के कानों में चुभ रहे थे, लेकिन सोना चले जा रही थी। अचानक हवा थम गई और एक आवाज आई…. सोना रुक जाओ….. रुक जाओ.सोना ने फटाक से पीछे देखो और फटाक से चारों ओर नजर घुमाई उसे कोई नहीं दिखा. जैसे ही सोना ने सामने देखा, सोना की आंखें आने वाले कुछ पलों के लिए फटी की फटी रह गई। सोना ने कुछ ऐसा देखा जो अब से पहले उसने कभी नहीं देखा। उसकी आंखों के सामने एक खुले बालों वाली लड़की जिसकी टांग मुड़ी हुई थी। लगड़ाते हुए सोना के सामने रही थी। जैसे जैसे वह लड़की उसके पास आ रही थी। सोना उसके हुलिए को ठीक से देख पा रही थी। सोना समझ गई कि यह कोई जिंदा लड़की तो नहीं है।


वह लड़की आते-आते कुछ बोल रही थी। रात को बाहर मत निकलना….. वरना तुझे भी मरना पड़ेगा…… मैं भी मर गई….. तुम भी मरोगी….. जो रात को बाहर निकलेगा, सब मरेंगे. रात को बाहर मत निकलना….. एसे बोलती रही और सोना के सामने आती रही। सोना ने जोर से चिका….आआअ…. चिक सुनते ही चारों ओर उजाला हो गया।
इसके पहले की सोना होश संभाले वह गिर गई। वह लड़की वहां से गायब हो चुकी थी। सोना के पड़ोसी आए और उसे अपने घर पर ले गए।
सुबह हुई …सोनाउठी। उसने देखा कि वह अपने घर पर नहीं थी। तभी आंटी आई… और बोली रात को तुम डर कर गिर गई थी, तो हम तुमको अपने घर पर लेकर आ गए. तुम्हारी मां भी यहाँ पर आई थी। पर तुम्हें सोता देखकर तुमको रात यहीं रुकने के लिए कह दिया।
वैसे तुम रात को डर क्यों गई थी, बेटा. कहीं परीक्षा की थकान तो नहीं है?
नहीं आंटी! मैंने ….मैंने…. सोना इसके आगे कुछ नहीं बोल पा रही थी। चलो कोई बात नहीं।


तुम आराम करो, तुम्हारे पापा अभी आते ही होंगे। कुछ समय बाद सोना के पापा आए और सोना को अपने साथ घर लेकर गए. मां ने भी यही पूछा बेटी तुम्हें क्या हो गया था रात को? सोना बताने लगी.. माँ वो रात को मैंने… मैंने…. इसके आगे बोल नहीं पा रही थी। माँ ने भी बोल दिया, बेटा कोई बात नहीं। इतनी रात तक स्कूल में नहीं रुका करते। सोना तैयार हुई और स्कूल गई। स्कूल के फ्रेंड्स को भी किसी ने बता दिया कि सोना रात को सड़क पर बेहोश हो गई थी। उसकी सहेलियों ने भी पूछा, सोना रात को क्या हुआ था। सोना बोलने लगी कि रात को मैंने ….मैंने….देखा था… इसके आगे कुछ नहीं बोल पाती. सोना पूरे दिन सोचती रही। आखिर वह किसी को बता क्यों नहीं पाती…. कहीं उस लड़की और मेरा कोई कनेक्शन तो नहीं हैं… नहीं! नहीं। यह सोच कर सोना पढ़ने बैठ जाती है। जैसे ही सोना पेन से कुछ लिखती है। उसको विचार आता है कि रात को मैंने जो देखा वह में एक कागज पर लिख देती हूं। उसने सारी घटना को एक कागज पर लिख दिया। सोना ने उसे मोड़ पर अपने पास रख लिया।
छुट्टी होने पर उसने अपनी सहेली को दे दिया। सहेली ने खोल कर देखा तो कागज पूरा खाली था। सहेली ने मजाक में बोला, मतलब रात को कुछ नहीं हुआ था. अब सोना समझ गई। उसने निश्चय किया कि वह उस लड़की से एक बार और मिलेगी। सोना लाइब्रेरी में बैठ गई और पढ़ने लगी। सोना रात के 9:00 बजे का इंतजार करने लगी। 9:00 बजते ही सोना हिम्मत करके वहां पर पहुंच गई, जहां उसने उस लड़की को देखा था। फिर से वैसे ही माहौल हो गया था। सोना अब की बार थोड़ी हिम्मत के साथ आई थी। फिर से वहीँ लड़की दिखाई दी। वह लड़की आते हुए बोल रही थी, रात को बाहर मत निकलना,,,, मर जाओगी…. मैं भी मर गई….तुम भी मरोगी.. सोना ने उससे बात करने की कोशिश की. क्या मुझे बता सकती हो, तुम कौन हो? वह लड़की बोली…. चली जाओ यहां से….. तुम्हे भी मार देगा…. मुझे भी मार दिया। चली जाओ रात को बाहर मत निकलना। सोना फिर से बोली, कौन हो, तुम मुझे बताओ हो सकता है, मैं तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊं। तुम कुछ नहीं कर सकती। उसने मुझे भी मार दिया। तुम्हें भी मार देगा। चली जाओ। सोना ने बोल दिया कि अगर तुमने मुझे नहीं बताया और तुम्हारे समस्या का कोई हल नहीं निकला। तो तुम्हारी आत्मा को कभी शांति नहीं मिलेगी.
तुम सुनना चाहती हो, मैं कौन हूं? तो सुनो….. मेरा नाम सरोज है। 5 साल पहले की बात है तुम्हारी स्कूल में ही पढ़ा करती थी। टोपर थी मैं स्कूल की. स्कूल की और से गोल्ड मेडल जीतना चाहती थी। देर रात तक पढ़ना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। जैसे ही एग्जाम के दिन नजदीक आये। मैंने रात को लाइब्रेरी में ही पढ़ना शुरू कर दिया। परीक्षा के 5 दिन पहले स्कूल के चपरासी मेरे साथ बदतमीजी की…उसने मेरे साथ…….. सिर्फ इतना कह कर वो रोने लगी। फिर मैं इस सदमे को सहन नहीं कर पाई और स्कूल के ऊपर जाकर नीचे कूदकर आत्महत्या कर ली. इसलिए मेरी टांग टूटी हुई है। बताओ क्या मदद कर सकती हो…..तुम मेरी कुछ मदद नहीं कर सकती हो। कुछ नहीं कर सकती तुम उसका. तुम भी मरोगी.
सोना सोचती हैं इसलिए चपरासी रात को स्कूल में नहीं रुकता. सोना उस लड़की को बोलती हैं, अगर मैं चपरासी को तुम्हे सौप दू तो…. मार दूंगी उसे। जान से मार दूंगी. तो कल ही मार देना सोना बोली…… मुझे वह चाहिए…. मुझे वह चाहिए …..जैसे मैं मरी थी, वैसे वह भी मरेगा।


अगले दिन सोना ने पत्ते पर दिल का चित्र बनाकर 9:00 पीएम लिख लिया। सोना ने बड़ी सावधानी से 9:00 बजे के आसपास चपरासी को स्कूल से बाहर लेकर आई. सोना ने उसको आवास लगाई। सरो.. सरोज… लो, मैं इसको लेकर आ गई.. तभी सरोज वहां पर आती है। अबकी बार वह हवा थी, चपरासी ने उसको पहचान लिया और सोना को धोखेबाज़ कहकर मरने लगा. फिर जिस तरह सरोज ने आत्महत्या की उसी तरह उसको स्कूल के ऊपर ले जाकर वापस उसी घटना को दोहराया. और उसने अपना बदला पूरा किया। सोना यह सब देखना नहीं चाहती थी इसलिए वह वहां से निकल गई।
अगली रात को 9:00 बजे सोना जैसे ही लाइब्रेरी से निकली और रास्ते में पहुंची तो आज भी उसने सरोज को आवाज़ लगाई। लेकिन आज सरोज नहीं आई। लेकिन सोना को कुछ महसूस हुआ। उसने ऊपर आसमान की तरफ देखा तो आज सरोज बिल्कुल परी जैसी लग रही थी….. और वह हमेशा के लिए इस धरती पर छोड़ कर जा रही थी। दोनों ने आपस में बाय-बाय किया…. सोना आज दिल से खुशी महसूस कर रही थी।

इस भुतिया डरावनी कहानी (horror stories in hindi) ‘स्कूल से घर’ से क्या सीखा – बुरे का अंत बुरा ही होता है।

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2 thoughts on “स्कूल से घर – एक डरावनी लड़की की कहानी”

  1. I love kya aap aise or stories share karte h or aaapki team bahut hi achha kaam kar rahi h per spelling mistake h but koi baat nhi people bahut enjoy kar rahe h mere experience to bahut is achha hua but thode mistakes abhi bhi h but it soo good
    Thank you
    And you have any YouTube channel where I can watch these stories
    And if yes than send me an email

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