Air Pollution in hindi – परिभाषा, कारण, उपाय, केस स्टडी

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Air Pollution In Hindi

air pollution in hindi – जिस हवा की हम श्वास ले रहे हैं, जिस पानी को पी रहे हैं, जो खाना हम खाते हैं – सभी किसी न किस तरह से प्रदूषित हैं. इस विशेष आर्टिकल में मैं आपको वायु प्रदूषण(air pollution in hindi), वायु प्रदूषणकी परिभाषा(Definition), कारण(Cause), उपाय(Solution) और कुछ केस स्टडी बताऊंगा, जिनको जानकर आपको पता चलेगा की हमारा वातावरण कितना प्रदूषित हैं, और इस प्रदूषण ने हमारे पर्यावरण को कितना बेबस(helpless) कर दिया हैं.

कल्पना कीजिये अगर आप एक सड़क पर लॉन्ग ड्राइव पर हो, आपके आस पास कोई दुसरी मोटर गाड़ियाँ नहीं हैं, तो आपको शांति और ताजी हवा का अनुभव होगा. अगर आप एक एसी जगह पर रहते हैं, जहाँ बहुत भीड़ रहती हैं, बहुत सारे लोग, गाड़ियों का हॉर्न अक्सर बजता रहता हैं तो आप एक क्षण के लिए अपने कानों को हाथो से बंद कीजिये. आपको एक शांति का अनुभव होगा जो हमारे पूर्वज हमारे लिए छोड़कर गए थे. इस प्रकार की जीवन-शैली ने हमारे जीवन जीवन को व्यस्त, तेज(fast) और अस्वस्थ बना दिया हैं. चारों और से पर्यावरण प्रदूषित पड़ा हैं. जल, वायु, ध्वनि प्रदूषण का आये दिन हम सामना करते हैं. चलिए इस पोस्ट को शुरू करते हैं – वायु प्रदूषण की परिभाषा के साथ.

वायु प्रदूषण की परिभाषा(definition of air pollution)

जब हमारे वायुमंडल में मानवीय या प्राकृतिक कारणों से कुछ ऐसे कण(प्रदूषक) प्रवेश कर जाते हैं, जो सम्पूर्ण पारिस्थिकी तंत्र के लिए हानिकारक होते हैं, वायु प्रदूषण कहलाता हैं. वायु प्रदूषण का हानिकारक प्रभाव सम्पूर्ण ग्रह(पृथ्वी) पर पड़ता हैं. धुल में भारी कण, चिमनियों से निकलने वाला धुआं इत्यादि जब साफ़ वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो वायु प्रदूषित हो जाती हैं, जिसका स्वास्थ्य और पारिस्थिकी तंत्र पर बूरा असर पड़ता हैं.
वायु प्रदूषण मुख्यतर मानवीय कारणों से फैलता हैं. दिल्ली में प्रति दस लाख लोगों पर 1800 लोग वायु प्रदूषण(air pollution) के कारण अपनी जान गवां देते हैं. एक और आंकड़ा दिल्ली में प्रति वर्ष दो मिलियन बच्चे lung damage जैसी गंभीर समस्या से ग्रसित हो रहे हैं. प्रदूषित वायु में भारी धातु के कण, सल्फर(S), कार्बन मोनो ऑक्साइड(CO), दुसरे अन्य हानिकारक कण हमारे शरीर में जाकर हमारे फेफड़ों को कमजोर कर देते हैं, जिससे हमारी अंदरूनी(stamina) ताकत कम हो जाती हैं, जिसके फलस्वरूप औसत जीवन दर (जिसे जीवन प्रत्याशा भी कहते हैं) कम हो जाती हैं.

जब कभी प्रदूषक स्वच्छ वातावरण में प्रवेश कर जाते हैं तो वातावरण प्रदूषित हो जाता हैं. प्रदूषक के आधार पर वायु प्रदूषण को दो प्रकारों में बाटा जा सकता हैं – प्राथमिक और द्वितीयक.

प्राथमिक क्रिया

प्राथमिक क्रिया में प्रदूषक स्रोत से सीधे वायुमंडल में मिल जाते हैं. इस प्रकार के प्रदूषकों में सल्फर डाई ऑक्साइड(SO2), नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड(NO2), कार्बन मोनो-ऑक्साइड(CO) – इस प्रकार के कण जो सीधे ही स्रोत से निकल कर वायु मंडल में मिलकर वायु को प्रदूषित करते हैं.

द्वितीयक क्रिया

द्वितीयक क्रिया में प्रदूषक पहली श्रंखला में वायुमंडल में सम्मिलित नहीं होते हैं, बल्कि किसी विशेष क्रिया के जरिये वातावरण में मिलते हैं. इस प्रकार के प्रदूषण में – क्लोरो फ्लोरो कार्बन, पराबैंगनी विकिरणों द्वारा, ओजोन परत को शामिल किया जाता हैं.

वायु प्रदूषण के कारण(causes of air pollution)

वायु प्रदूषण दो कारणों से हो सकता हैं, आपने कभी न्यूज़ में सुना या पढ़ा होगा की जंगल में आग लग जाती है या कभी कोई ज्वालामुखी विस्फोटित के कारण काफी नुकसान हो जाता हैं, इस प्रकार के कारणों को प्राकृतिक कारण और दूसरा मानवीय क्रिया-कलापों से वायु प्रदूषित हो सकती हैं.

1 प्राकृतिक कारण

जब वायु में प्रवेश करने वाले प्रदूषक प्राकृतिक चक्र के अधीन होते हैं. इस प्रकार का प्रदूषण जलवायु की विभिन्नता औ विविधता के कारण होता हैं. कुछ प्राकृतिक घटनाये, जो वायु प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं, निम्न हैं

धुल और जंगल की आग

खुली भूमि या रेगिस्तान, जिनमे कोई वनस्पति नहीं हैं, और वर्षा की कमी के कारण शुष्क हैं, वहां पर हवा स्वाभाविक रूप से धुल भरी आंधियां पैदा कर सकती हैं. इस धुल के साथ मिट्टी(dust) के कण हवा में मिल जाते हैं, और श्वास के रूप में सजीव जगत के लिया हानिकारक हैं. इस प्रकार के कण पादप जगत में होने वाली प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में बाधा बनते हैं.

जंगल की आग जंगली क्षेत्रों में एक प्राकृतिक घटना है, जब जंगल लंबे समय तक शुष्क अवस्था में रहते है, तब मौसम में बदलाव और वर्षा की कमी के परिणामस्वरूप इन आग के कारण होने वाला धुआं और कार्बन मोनोऑक्साइड(CO) वातावरण में कार्बन(CO) के स्तर में योगदान करते हैं, जो ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करके अधिक से अधिक वार्मिंग का खतरा पैदा करता हैं।

पशु और वनस्पति

पशुओं की पाचन क्रिया वायु प्रदूषण का एक अन्य क्रिया हैं, जिससे मीथेन, ग्रीनहाउस गैसे निकलती है। दुनिया के कुछ क्षेत्रों की वनस्पति – जैसे कि काला गोंद, चिनार, ओक और विलो पेड़ – गर्म दिनों में वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOC) का उत्सर्जन करते हैं। पशु और वनस्पति के कारण उत्पन्न होने वाले प्रदूषक विशेष रूप से नाइट्रोजन ऑक्साइड(NO), सल्फर डाइऑक्साइड(SO2) और कार्बन यौगिक हैं.

ज्वालामुखी गतिविधि

ज्वालामुखी विस्फोट प्राकृतिक वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत हैं। जब एक विस्फोट होता है, तो भारी मात्रा में सल्फ्यूरिक, क्लोरीन और राख वायुमंडल में उत्पन्न होती है. इसके अतिरिक्त, सल्फर डाइऑक्साइड और ज्वालामुखी राख जैसे यौगिकों को सौर विकिरण को प्रतिबिंबित करने की क्षमता के कारण प्राकृतिक शीतलन(Refrigeration) प्रभाव उत्पन्न हो सकता हैं, जो पादप जगत और मानव जीवन के लिए हानिकारक हैं.

2 मानव जनित प्रदूषण

वायु प्रदूषण में मानव का योगदान प्राकृतिक घटनाओं से कहीं अधिक हैं. मानव जीवाश्म ईंधन से लेकर भारी उद्योग तक प्रदूषण में बखूबी भूमिका निभाता हैं. मानव द्वारा गैर नियोजित(non organizing) नीतियाँ, फेक्ट्रियां, रिसर्च सेंटर, केमिकल प्लांट, आधुनिक कृषि, परिवहन, ताप विधुत केंद्र इत्यादि के माध्यम – सल्फर डाई ऑक्साइड(SO2), नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड(NO2), कार्बन मोनो-ऑक्साइड(CO), मीथेन(CH4) और अन्य हानिकारक किरणें और प्रदूषक वायुमंडल को प्रदूषित करने के लिए छोड़े जाते हैं.

जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन

कोयला, पेट्रोलियम और अन्य कारखाने के दहनशील जैसे जीवाश्म ईंधन का दहन वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। जीवाश्म इंधनों का उपयोग आम तौर पर बिजली संयंत्रों, विनिर्माण कारखानों के साथ-साथ भट्टियों और अन्य प्रकार के ईंधन जलाने वाले ताप उपकरणों में उपयोग किए जाते हैं। एयर कंडीशनिंग और अन्य सुविधाएँ प्रदान करने के लिए भी महत्वपूर्ण मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे बदले में अधिक उत्सर्जन होता है, जिसके फलस्वरूप वायुमंडल में अधिक मात्रा में प्रदूषक प्रवेश करते हैं.
जीवाश्म ईंधन के दहन से कार्बन डाई ऑक्साइड(CO2) बहुत अधिक मात्र में उत्पन्न होती हैं, जो की ग्रीन हाउस इफ़ेक्ट का प्रमुख कारण हैं. विश्व में चाइना, अमेरिका और भारत क्रमशः सबसे ज्यादा जीवाश्म ईंधनं दहन करने वाले देश हैं.

परिवहन द्वारा

परिवहन से निकलने वाला कार्बन मोनो ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड, मीथेन और हाइड्रोकार्बन(HC) इस प्रकार के प्रदूषक ग्लोबल वार्मिंग(GLOBAL WARMING) को बढ़ावा देते हैं जिसके फलस्वरूप पृथ्वी का तापमान में लगातार वृद्धि हो रही हैं.

वन-विनाश

बढती जनसँख्या, कृषि के लिए भूमि, दैनिक आवश्कताओं को पूरा करने के लिए बड़े बड़े जंगलों को साफ़ खेतों में तब्दील कर दिया गया हैं, इस प्रकार की घटनाएँ प्रकृति में असंतुलन की स्थिति पैदा करती हैं जिसके परिणामस्वरूप वायुमंडल के संघटन में अनियामितता आती हैं, और वायुमंडल प्रदूषित हो जाता हैं. 2020 की ताज़ी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 24.56 प्रतिशत भाग पर वन हैं, जबकि भूभाग के 33 प्रतिशत पर वन होने चाहिए. इसके विपरीत दिन-ब-दिन लोग बढ़ते जा रहे हैं, वनों को नष्ट किया जा रहा हैं.

उद्योग

विभिन्न प्रकार की फेक्ट्रियां जैसे – फ़ूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, कागज उद्योग, हैवी मटेल कंपनी, रिफाइनरी फेक्ट्रियां की चिमनियों से हानिकारक धुआं(smog), भारी कण(जिनमें – लेड,कॉपर, आयरन धातु के कण) और केमिकल रसायनशालाओं से विभिन्न हानिकारक गैसे निकलती हैं. इस प्रकार का धुआं श्वास के रोग, अम्लीय वर्षा और मानव जीवन को प्रभावित करता हैं.

प्रमुख वायु प्रदूषक(air pollutants list in hindi)

वायु को प्रदूषित करने वाले स्रोतों से निकलने वाले ‘प्रदूषक’ ही मुख्य कारक हैं. चलिए जानते वायु को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों के बारें में.

1 कार्बन मोनो ऑक्साइड(CO)

घरों में कपड़ो को सुखाने वाले ड्रायर, पानी गर्म करने वाले यन्त्र, सिगरेट, गैस स्टोव, मोटर कार वाहन, तंबाकू का धुआं इत्यादि स्रोतों से कार्बन मोनो ऑक्साइड(CO) का उत्पादन होता हैं.

2 सीसा(Pb)

सीसा(lead) के मुख्य स्रोत – सौन्दर्य सामग्री, पेंट्स(lead based paint), बच्चों के खिलोने में सीसा के कण पाए जाते हैं. वायु प्रदूषण स्रोत के रूप में सीसा पर्यावरण में एक गैर-बायोडिग्रेडेबल(नष्ट न होने वाले) जहरीली धातु है और अब, यह एक वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दा बन गया है. औद्योगिक इकाइयों में मुख्य रूप से कोयले के जलने और खनिजों यानी आयरन पाइराइट, डोलोमाइट, एल्यूमिना, आदि के जलने से उत्पन्न कणों के कारण सीसा के कणों का उत्पादन होते हैं।

3 नाइट्रोजन ऑक्साइड(NO)

अधिक तापमान पर चलने वाली इकाइयों में वायुमंडल से नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के दहन से नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्पादन होता हैं. भारी मोटर वाहन, यातायात के क्षेत्रों में, जैसे कि बड़े शहरों में, वायु प्रदूषण के रूप में वातावरण में उत्सर्जित नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा महत्वपूर्ण होती है।

4 जमीनी स्तर ओजोन(O3)

ओजोन सीधे जमीन पर उत्सर्जित नहीं होती हैं. लेकिन वायुमंडल में होने वाली क्रियाओं से नाइट्रोजन के ऑक्साइड और इसके अलावा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों(VOC) के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा बनाया जाता है।

5 कण प्रदूषण

कुछ कण(Suspended Particulate Matter -SPM) सीधे स्रोत से उत्सर्जित होते हैं, जैसे निर्माण स्थल, कच्ची सड़कें, खेत, धुएँ के ढेर या आग. अधिकांश कण वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की जटिल प्रतिक्रियाओं के परिणामस्वरूप बनते हैं, जो बिजली संयंत्रों, उद्योगों और ऑटोमोबाइल से उत्सर्जित प्रदूषक हैं।

6 सल्फर ऑक्साइड

सल्फर ऑक्साइड विशेष रूप से, जीवाश्म ईंधन – कोयला, तेल और डीजल – या सल्फर युक्त अन्य सामग्री के जलने से उत्सर्जित होती हैं। स्रोतों में बिजली संयंत्र, धातु प्रसंस्करण और गलाने की सुविधाएं(metals processing), और वाहन(कार) शामिल हैं.

7 क्लोरोफ्लोरोकार्बन(CFC)

क्लोरोफ्लोरोकार्बन मानवनिर्मित यौगिक हैं जो 1930 से विभिन्न अनुप्रयोगों जैसे एयर कंडीशनिंग, रेफ्रिजरेशन, फोम में ब्लोइंग एजेंट, इंसुलेशन और पैकिंग सामग्री, एरोसोल और सॉल्वैंट्स के रूप में वातावरण में पेश किए गए हैं।

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air pollution in hindi

वायु प्रदूषण के प्रभाव (effects of air pollution)

वायु प्रदूषण एक व्यापक समस्या हैं, जिसका प्रभाव सजीव और निर्जीव दोनों जगत पर पड़ता हैं. वायु के गैसों के संघटन में जब हानिकारक कणों का घनत्व बढ़ जाता हैं तो वायु प्रदूषित हो जाती हैं. इस प्रदूषित वायु से अनेकों बीमारियाँ और अम्ल वर्षा जैसी घटनाएँ देखने को मिलती हैं. ताजमहल का पिला पड़ना, 2020 में दिल्ली में 54,000 लोगो की मौत, अहमदाबाद का कॉटन डस्ट – इस प्रकार की घातक घटनाएँ वायु प्रदूषण के कारण पैदा हुई हैं.

ग्लोबल वार्मिंग

जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग हैं. ग्लोबल वार्मिंग वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए सबसे चिंताजनक विषयों में से एक है। ग्लोबल वार्मिंग ग्रीनहाउस प्रभाव का प्रत्यक्ष परिणाम है. उच्च तापमान तूफान, गर्मी, बाढ़ और सूखे सहित कई प्रकार की आपदाओं की बढ़ोतरी ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ रहे हैं. ग्लेशियर का पीछे हटना, मौसमी घटनाओं के समय में बदलाव (जैसे, फुलों का समय से पहले फूलना), समुद्र के स्तर में वृद्धि और आर्कटिक समुद्री बर्फ की सीमा में गिरावट शामिल हैं।

जलवायु परिवर्तन

आपको इस बात का अंदाजा नहीं होगा की कुछ वर्षों पहले सहारा मरुस्थल के स्थान पर हरा भरा जंगल हुआ करता था. जलवायु परिवर्तन के कारण आज वहां पर कोई इन्सान नहीं रह सकता – यह जलवायु परिवर्तन का नतीजा हैं. जब ग्रह का तापमान बढ़ता है, तो सामान्य जलवायु चक्रों में गड़बड़ी होती है, इन चक्रों के परिवर्तनों से ग्रह के वातावरण पर प्रभाव पड़ता हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण धुर्वों का बर्फ पिघल रहा हैं, और समुन्द्रों का स्तर बढ़ रहा हैं.

अम्ल वर्षा

वायुमंडल में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) सम्मिलित होकर वातावरण में जमा हो जाते हैं और पानी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, तो वे नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक एसिड के तनु विलयन बनाते हैं, और जब वे सांद्रता बारिश हो जाती है, तो पर्यावरण और सतह दोनों को नुकसान होता है। ताजमहल का पीलापन अम्ल वर्षा का ही परिणाम हैं.
अम्लीय वर्षा वनों के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकती है। जमीन में रिसने वाली अम्लीय वर्षा मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों को नष्ट कर सकती है, जो पेड़ों को स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक हैं। अम्लीय वर्षा के कारण एल्युमीनियम भी मिट्टी में मिल जाता है, जिससे पेड़ों के लिए पानी लेना मुश्किल हो जाता है।
अम्लीय वर्षा से मार्बल कैंसर की समस्या और त्वचा संक्रामक जैसी परेशानियां का सामना करना पड़ सकता हैं.

धुंध प्रभाव

स्मॉग में मौजूद कण आंखों, नाक और गले में जलन पैदा कर सकता है। इसके साथ यह दिल और फेफड़ों की समस्याओं को पैदा कर सकता है. लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है, जो अकाल मृत्यु का कारण भी बा सकता हैं.

खेतों का खराब होना

अम्लीय वर्षा, जलवायु परिवर्तन और स्मॉग सभी पृथ्वी की सतह को नुकसान पहुंचाते हैं। दूषित पानी और गैसें पृथ्वी में रिसती हैं, जिससे मिट्टी की संरचना बदल जाती है। यह सीधे तौर पर कृषि, बदलते फसल चक्रों और हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन की संरचना को प्रभावित करता है।

पराग कणों द्वारा

पौधों में पराग का उपयोग एक फूल के परागकोश से अगुणित नर आनुवंशिक सामग्री को पार-परागण में दूसरे के वर्तिकाग्र में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। लेकिन लेकिन वायुमंडल में दूषित हवा के कारण पराग की क्रिया अनियमित रूप बढ़ने लगती हैं, जिससे अत्यंत कार्बन ऑक्साइड का उत्पादन होता हैं. जब यह कण हवा में फैलते हैं तो आँखों में जलन, फीवर, खुजली, नाक बहना इस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं.

जानवरों की प्रजातियों का विलुप्त होना

जैसे-जैसे ध्रुवों की बर्फ पिघलती है और समुद्र का स्तर बढ़ता है, कई जानवरों की प्रजातियां, जिनका अस्तित्व महासागरों और नदियों पर निर्भर करता है, खतरे में हैं। धाराएँ बदलती हैं, समुद्र का तापमान बदलता है और प्रवासी चक्र बदलते हैं, और कई जानवर अज्ञात वातावरण में भोजन की तलाश करने के लिए मजबूर होते हैं। वनों की कटाई और खराब मिट्टी की गुणवत्ता का मतलब पारिस्थितिक तंत्र और आवासों पर तीर चलाना हैं।

श्वसन स्वास्थ्य समस्याएं

ऑक्सीजन खून के माध्यम से पूरे शरीर में परिवहन करती हैं, लेकिन ऑक्सीजन कभी भी रक्त के साथ बंधन(bonding) नहीं बनती हैं, वहीँ यदि ऑक्सीजन के साथ कार्बन मोनो ऑक्साइड शरीर में प्रवेश कर जाये तो फिर CO रक्त में हिमोग्लोबिन के साथ बंधन बना सकती हैं. आपको जानकर आश्चर्य होगा की CO की बंधन क्षमता ऑक्सीजन की तुलना में 300 गुना ज्यादा हैं, अगर एक बार CO शरीर में प्रवेश कर जाये तो फिर ऑक्सीजन मिलने पर भी उस बंधन को तोडा नहीं जा सकता हैं. दूसरा, हानिकारक गैसों की श्वास लेने पर नेक्रोसिन(शरीर के भीतर उत्तको और कोशिकाओं की मृत्यु होना) जैसी बिमारियों का सामना करना पड़ता हैं.
वायु प्रदूषक के शरीर में प्रवेश करने पर खांसी से लेकर अस्थमा, कैंसर या वातस्फीति तक श्वसन संबंधी बीमारियों और एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

वायु प्रदूषण को कैसे रोके(how to stop air pollution in Hindi)

अंतर्राष्ट्रीय क्योटो प्रोटोकॉल के अलावा कुछ विकसित देशो ने वायु प्रदूषण के नियमन के लिए अपने कुछ कानून बनाये हैं. यहाँ पर मैं कुछ सुझाव दूंगा और कुछ तरीके जिनकी अब तक पालना की जा रही हैं, और यदि इनकी पालना ठीक ढंग से की जाये-तो वायु प्रदूषण(AIR POLLUTION) को काफी स्तर तक कम किया जा सकता है.

अपना योगदान दे(air pollution in hindi)

  • वायु प्रदूषण(Air Pollution In Hindi) को फ़ैलाने में मुख्य भूमिका मानव की होती हैं. इसलिए सबसे पहले अपने आप को जागरूक करे की यह समस्या इतनी बढ़ क्यों रही है? इसके कारण क्या हैं? इसके लिए मैंने आपको ऊपर बहुत से कारण बताये हैं, आप इनको भली भांति जान ले. सबसे पहले आपको इन कारणों को दोहराना नहीं हैं. कुछ और सुझाव निम्न हैं,
  • पेट्रोलियम पर्दाथो को जलने से बचे. व्यक्तिगत वाहन की बजाय सार्वजानिक वाहन का उपयोग करे. अपनी गाड़ी का PUC बनवाये और उसको समय समय पर अपडेट करवाते रहे. हो सके तो CNG या इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करे.
  • एयरोसोल स्प्रे के इस्तेमाल से बचे.
  • बिजली के उपकरणों के लिए सोलर सिस्टम का उपयोग करें.
  • ज्यादा कॉस्मेटिक सामग्री और सौन्दर्य प्रदत सामग्री का प्रयोग नहीं करें.
  • फ़ूड पेकेजिंग सामग्री जिसके अन्दर सीसा(नूडल्स के अन्दर) होता हैं उनका उपयोग न करे.
  • कृषि के लिए जैविक तरीको का उपयोग करें.
  • लोगो को इसके बारें में जागरूक करें.
  • हरे पेड़ो को लगाये.
  • पर्यावरण से संबंधित किसी संघठन से जुड़े.
  • घर पर होने वाले पेंट की गुणवत्ता पर विचार करे, और आवश्यकता होने पर ही पेंट कराये.
  • बिजली की बचत करें और एयर कंडीशनर को 78 डिग्री से कम न रखें.
  • कचरे को जलाने की बजाय उसका उचित निस्तारण करे.
  • अपने कार या वाहनों के टायर की हवा को कम न रखे.

फेक्ट्रीयों या भट्टियों में वायु प्रदूषण को कैसे कम करे?

ESP द्वारा

electrostatic precipitator (ESP) द्वारा उन फेक्टरियों के भारी कणों को कम किया जा सकता हैं, जिनमे धुएं के साथ धातु(आयरन, सीसा, कॉपर इत्यादि) निकलते हैं. इस प्रक्रिया में चिमनी के उपरी मुंह पर इस प्रकार का संयंत्र लगाया जाता हैं, जो की ऋणात्मक प्रकृति का होता हैं. जब धुआं ऊपर की और निकलता हैं तो एक रासायनिक क्रिया के साथ धन और ऋण कण मिलकर चिंगारी उत्पन्न करते हैं, और बनाये गए सांचो में एकत्रित हो जाते हैं. साफ धुआ उपर चला जाता हैं. इस प्रक्रियां से एक विशेष आकर के कणों को ही अलग किया जा सकता हैं.

स्क्रबर(scurabber)

स्क्रबर का बहुत ही साधारण सा फार्मूला हैं. इसमें चिमनी के ऊपर एक स्प्रे लगा होता हैं, इस स्प्रे से एक नमी का वातावारण बन जाता हैं, जब धुल के कण इससे गुजरते है तो इस नमी के कारण वे कण भारी हो जाते हैं और वहीँ बैठ जाते हैं.

दिल्ली का प्रदूषण

दिल्ली विश्व के दस सबसे प्रदूषित शहरों में से एक हैं. पूरे भारत में प्रति वर्ष केवल जीवाश्म ईंधन के दहन से दस लाख लोगो की मौत हो जाती हैं. दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोतों में वाहन, भारी उद्योग जैसे बिजली उत्पादन, छोटे पैमाने के उद्योग जैसे ईंट भट्टे, वाहनों की आवाजाही और निर्माण गतिविधियों के कारण सड़कों पर निलंबित धूल, खुले में कचरा जलाना, खाना पकाने के लिए ईंधन का दहन शामिल हैं। फसल के मौसम के दौरान धूल भरी आंधी, जंगल की आग और खुले मैदान में आग से मौसमी उत्सर्जन समस्या को और बढ़ा रहे हैं। इस प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने पेट्रोल के दम बढ़ाये हैं, निजी वाहन के अधिक उपयोग पर रोकथाम लगाई हैं. केंद्र सरकार का राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) एक प्रमुख पहल हैं.

अहमदाबाद का कॉटन डस्ट

कपास उत्पादन की दृष्टि से गुजरात अग्रणी राज्य हैं. कपास की धुल(हैंडलिंग या प्रसंस्करण के दौरान) को प्रदूषक के रूप में परिभाषित किया जाता हैं. जिसमें एक फाइबर, बैक्टीरिया, कवक, मिट्टी, कीटनाशक और अन्य संदूषक हो सकते हैं जो कपास के साथ बढ़ने, कटाई और बाद में प्रसंस्करण के दौरान जमा हो सकते हैं या भंडारण अवधि और साँस लेते समय स्वास्थ्य पर खतरनाक प्रभाव डालता है। एक बार ऐसे ही किसी अनामित कंपनी की प्रोसेसिंग के वक्त कॉटन डस्ट के कारण काफ़ी लोगो का स्वास्थ्य स्तर गिर गया था और बहुत सी जाने गयी थी.

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Air Pollution In Hindi

आपने क्या सीखा… Air Pollution In Hindi

इस पोस्ट वायु प्रदूषण(air pollutio in hindi) में मैंने आपको वायु प्रदूषण के बारे में काफ़ी सारी जानकारी दी हैं, वायु प्रदूषण(Air Pollution) की परिभाषा, कारण प्रभाव, बचाव के उपाय को आपके साथ शेयर किया हैं. आप अपने सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं. और इस प्रकार पर्यावरण से सम्बन्धित विषयों के आर्टिकल को अपने मेल में प्राप्त करने के लिए सब्सक्राइब कर सकते हैं.

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