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Networking Business Plan in Hindi – नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस प्लान

Networking Business Plan in Hindi – नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस प्लान इन हिंदी

Networking Business Plan in Hindi – इस कम्पलीट पोस्ट में हम आपको बताएँगे कि नेटवर्किंग मार्केटिंग का बिजनेस प्लान(Networking Business Plan in Hindi) क्या होता हैं?. किस तरह एक कंपनी नेटवर्क मार्केटिंग का प्लान(network marketing plan in hindi) करती हैं. नेटवर्किंग मार्केटिंग प्लान इन हिंदी में हम आपको यह भी बताएँगे कि किस तरह नेटवर्किंग मार्केटिंग, पिरामिड आधारित सरंचना से अलग हैं.

 चलिए सबसे पहले जानते हैं कि नेटवर्किंग या नेटवर्क मार्केटिंग(नेटवर्क मार्केटिंग बिजनेस प्लान) के लिए कंपनी किस तरह अपना बिजनेस प्लान तैयार करती हैं.

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नेटवर्किंग बिजनेस प्लान इन हिंदी(Networking Business Plan in Hindi)

नेटवर्क मार्केटिंग या मल्टी लेवल मार्केटिंग या डायरेक्ट सेल्लिंग – इन सभी का उद्देश्य एक ही होता हैं. आगे हम इसी के बारें में चर्चा करेंगे कि किस तरह एक कंपनी मार्केटिंग के लिए अपना सिस्टम तैयार करती हैं. नेटवर्क मार्केटिंग के बिजनेस प्लान को अच्छे से समझने के हम इन सवालों के उत्तर जानने की कोशिश करेंगे.

  • कोई कंपनी नेटवर्क मार्केटिंग क्यों करती हैं?
  • नेटवर्क मार्केटिंग का बिजनेस मोडल क्या हैं?
  • नेटवर्क मार्केटिंग काम कैसे करती हैं?
  • नेटवर्क मार्केटिंग से कंपनी को क्या फायदा होता हैं?
  • क्या मल्टी लेवल मार्केटिंग या नेटवर्क मार्केटिंग पिरामिड सिस्टम हैं?

कोई कंपनी नेटवर्क मार्केटिंग क्यों करती हैं?

किसी कंपनी का उद्देश्य होता हैं कि वह अपने प्रोडक्ट्स या सर्विसेज को कंजूमर तक पहुंचा सके. जरा सोचिये ! वह नई कंपनी जो अभी मार्केट में आई हैं किस तरह अपने प्रोडक्ट्स को ग्राहकों तक पहुंचाएगी?

इसका केवल एक तरीका हैं – “मार्केटिंग”. चाहे ad से, चाहे पोस्टर से, ब्लॉग पोस्ट्स के जरिये या किसी मीट-अप में प्रमोशन कर सकते हैं. इन सभी के लिए बड़ी मात्रा में पैसे खर्च करने पड़ते हैं.

वही अगर कोई ऐसा तरीका जहाँ कंपनी के प्रोडक्ट भी सेल हो जाये, और इनकम भी हो जाये. तो कंपनी उस सिस्टम को चुनने में क्यूँ हिचकिचायेगी.

प्रोडक्ट मार्केटिंग के खर्चों से बचने के लिए कंपनी नेटवर्क मार्केटिंग करती हैं.

नेटवर्क मार्केटिंग करने के पीछे कंपनी का उद्देश्य

  • कंपनी को खुद का प्रचार करना नहीं पड़ता हैं.
  • कंपनी को अपनी पहचान और सेल्स बढ़ने का फायदा मिलता हैं. जैसे कि नेटवर्क – नाम से ही पता चलता हैं कि यह एक जाल या एक चैन हैं. जैसे जैसे नेटवर्क बढ़ता हैं, कंपनी का रेवेन्यु जबरदस्त ग्रोथ होता हैं.
  • नेटवर्क का प्रत्येक सदस्य अपनी मेहनत पर लोगों से जुड़ने की कोशिश करेगा. इससे कंपनी का कंजूमर तक पहुँचने का सरदर्द ख़त्म हो जाता हैं.
  • नेटवर्क मार्केटिंग से कंपनी का ad का खर्चा बच जाता हैं. यह नेटवर्क मार्केटिंग का सबसे फायदा हैं.
  • वास्तव में कोई कंपनी नेटवर्क मार्केटिंग नहीं करती बल्कि कंपनी से जुड़ने वाले करते हैं.
  • मल्टी लेवल मार्केटिंग या नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी से जुड़ने के लिए लोग पैसे जमा करवाते हैं. इससे कंपनी को बहुत बड़ी मात्रा में पैसा मिलता हैं.  

नेटवर्क मार्केटिंग का बिजनेस मोडल क्या हैं?

हर कंपनी का अपना एक प्रोडक्ट होता हैं. कंपनी उस प्रोडक्ट को अंतिम लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए नेटवर्क मार्केटिंग(mlm), अफिलेट मार्केटिंग, डायरेक्ट सेल्लिंग करती हैं.

प्रोडक्टस की मार्केटिंग करने के विभिन्न तरीकों में नेटवर्क मार्केटिंग भी शामिल हैं.

नेटवर्क मार्केटिंग का बिजनेस प्लान समझने के लिए आप इन इमेजेज को देखिये.

कंपनी का प्रोडक्ट >> नेटवर्क मार्केटर >> कंजूमर

कंपनी का प्रोडक्ट – कंपनी जो भी प्रोडक्ट बनाती हैं, उसका मूल्य तय कर उसको बेचने के लिए तैयार करती हैं.

नेटवर्क मार्केटर –  नेटवर्क मार्केटर को कई स्तर से गुजरना पड़ता हैं. उसको पहले नेटवर्क का हिस्सा बनना पड़ता हैं. फिर ट्रेनिंग लेनी पड़ती हैं. फिर कंपनी के प्रोडक्ट्स खरीदने पड़ते हैं(कुछ केस में) और उनको बेचने पड़ते हैं.

कंजूमर – एक नेटवर्क मार्केटर प्रोडक्ट सेल करने के लिए अंतिम लक्ष्य या कंजूमर तक पहुँचता हैं. और कमिशन के जरिये अपनी कमाई करता हैं.

नेटवर्क मार्केटिंग कितने प्रकार की होती हैं?   

नेटवर्क मार्केटिंग अनेक स्तरों पर काम करती हैं. हम यहाँ नेटवर्किंग मार्केटिंग के तीन प्रकार के बारे जानेंगे.

नेटवर्क मार्केटिंग के प्रकार

सिंगल-टियर नेटवर्क मार्केटिंग

टू-टियर नेटवर्क मार्केटिंग

मल्टी लेवल नेटवर्क मार्केटिंग

सिंगल-टियर नेटवर्क मार्केटिंग

सिंगल-टियर नेटवर्क मार्केटिंग में एक डिस्ट्रीब्यूटर चयनित कंपनी का प्रोडक्ट बेचता हैं. इस तरह की मार्केटिंग में उसको किसी दुसरे डिस्ट्रीब्यूटर को भर्ती करने की जरुरत नहीं होती हैं.

सिंगल-टियर नेटवर्क मार्केटिंग में इनकम का जरिया केवल और केवल प्रोडक्ट सेल्लिंग हैं. इसमें किसी प्रकार की कोई downline(पिरामिड) नहीं बनता हैं.   

टू-टियर नेटवर्क मार्केटिंग

टू-टियर नेटवर्क मार्केटिंग सिस्टम, सिंगल-टियर नेटवर्क मार्केटिंग सिस्टम से थोड़ा अलग हैं. इसमें एक downline बनती हैं. डाउन लाइन वाले डिस्ट्रीब्यूटर के प्रोडक्ट्स सैल होने पर up line वाले डिस्ट्रीब्यूटर को भी कमीशन मिलता हैं.

मल्टी लेवल नेटवर्क मार्केटिंग

मल्टी लेवल मार्केटिंग में दो से अधिक या फिक्स कमीशन के लिए मेम्बेर्स को जोड़ा जाता हैं. इसमें डाउन टू डाउन श्रंखला बढती जाती हैं और कमीशन मिलता रहता हैं.

नेटवर्क मार्केटिंग कैसे काम करती हैं?

मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM), सेल्युलर मार्केटिंग, एफिलिएट मार्केटिंग, कंज्यूमर-डायरेक्ट मार्केटिंग, रेफरल मार्केटिंग और होम-बेस्ड बिजनेस फ्रैंचाइज़िंग, ये सभी शब्द नेटवर्क मार्केटिंग के लिए ही उपयोग किये जाते हैं.

नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियां अक्सर सेल्सपर्सन की परतों(चेन श्रंखला) का निर्माण करती हैं, जिसमें एक सेल्सपर्सन दुसरे व्यक्ति को एक सेल्सपर्सन बनने के लिए आमंत्रित करता हैं.

एक सेल्सपर्सन B किसी सेल्सपर्सन A के नीचे होता हैं, लेकिन जब वह किसी अन्य सेल्सपर्सन C को अपने डाउन में जोड़ता हैं तो उस सेल्सपर्सन c के लिए वह ऊपर होता हैं. इसको इस तरह समझ सकते हैं – A >> B >> C.

A  को  B और C की सेल्लिंग पर भी कमीशन मिलेगा, B को केवल C की सेल्लिंग पर कमीशन मिलेगा. लेकिन, C को तभी कमीशन मिलेगा जब वह D को जोड़ेगा या कोई प्रोडक्ट को सेल करेगा.

यहाँ A, B, C के नीचे सैकड़ों लोग भी जुड़ सकते हैं. जितने अधिक लोग जुड़ेंगे उनका कमीशन भी उतना ही अधिक होगा.

नेटवर्क मार्केटिंग में एंट्री के बाद दो मुख्य स्टेप्स से गुजरना पड़ता हैं, एक ट्रेनिंग और दूसरा सेलिंग.  

नेटवर्क मार्केटिंग की ट्रेनिंग

ज्वाइन करने के बाद पहला कदम कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनना है यानी आप अभी से प्रोडक्ट्स बेचने वाले होंगे.

एक बार फर्म में भर्ती होने के बाद कंपनी उस पर्सन को अपने प्रोडक्ट और प्रोडक्ट की सेल्लिंग की ट्रेनिंग देती हैं.

सेलिंग

एक बार जब कोई स्टार्टअप मनी जमा कराकर, ट्रेनिंग लेकर प्रोडक्ट ले लेते हैं तो वह एक डायरेक्ट सेलिंग के लिए सेल्सपर्सन बन जाता हैं.

अब आगे की जिम्मेदारी सेल्सपर्सन की होती हैं, वह किस तरह प्रोडक्ट सैल करता हैं.  

सेल्सपर्सन को अपने परिवार, दोस्त, पड़ोसी या लोकल लोगों के बीच उस प्रोडक्ट को रखना होता हैं और उसको सैल करना होता है.

इसी के साथ सैल करते हुए उसको नए मेम्बेर्स बनाने है जिसके जरिये उसको अतिरिक्त इनकम हो सके.  

 इस प्रकार एक साधारण नेटवर्क मार्केटिंग व्यवसाय मॉडल(networking business plan in Hindi) कार्य करता है।

नेटवर्क मार्केटिंग से संबंधित महत्वपूर्ण शब्द

डायरेक्ट सेल क्या होता हैं ?

डायरेक्ट सेल – नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियां अपने उत्पादों को बेचने के लिए किसी खास स्ट्रेटेजी को follow करने के बजाय सीखे ग्राहकों को बढ़ावा देती हैं और बेचती हैं. और अपने आइटम को बेचने के लिए या डायरेक्ट सेल करने के लिए मार्केटर(डिस्ट्रीब्यूटर) को न्यौता देती हैं. मार्केटर प्रोडक्ट सेल्लिंग होने पर कुछ कमीशन पाते हैं. यहीं उनकी कमाई का जरिया हैं.

आईबीओ क्या होता हैं?

Entrepreneurs that are self-employed (आईबीओ):  आईबीओ या स्व नियोजित उद्यमी(Independent Business Operator) सभी एक ही नाम हैं. जो लोग MLM मार्केटिंग करते हैं उनको Independent Business Operator कहा जाता हैं. IBO एक इस तरह की पोस्ट हैं जिसको यह लगता हैं कि वह खुद की एक कंपनी चला रहे हैं.

एक नेटवर्क मार्केटर सेल्सपर्सन हैं या डिस्ट्रीब्यूटर?

अधिकांश मल्टी-लेवल मार्केटिंग कंपनियां अपने सदस्यों को सेल्सपर्सन के बजाय डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में संबोधित करती हैं. सेल्सपर्सन को फिक्स सैलेरी पर रखा जाता हैं जबकि एक डिस्ट्रीब्यूटर को तभी इनकम होती हैं जब कोई प्रोडक्ट सेल होता हैं.  

नेटवर्क मार्केटिंग में डाउनलाइन क्या होती हैं?

डिस्ट्रीब्यूटर अपने डाउन में कुछ और मेंबर्स को जोड़ने का प्रयास करते हैं. एक मेम्बर के नीचे दुसरे मेम्बर्स को डाउन मेम्बर्स कहा जाता हैं, डाउन मेम्बेर्स की इस श्रंखला को डाउनलाइन कहा जाता है.

जब एक मेम्बर की डाउनलाइन बढती हैं तो उसको अधिक कमिशन मिलता हैं. डाउन लाइन और पिरामिड एक ही सिद्धांत पर काम करते हैं.  

नेटवर्क मार्केटिंग में अपलाइन क्या होती हैं?

एक मेम्बर के ऊपर के सदस्यों की श्रंखला(अनुक्रम) को अपलाइन कहा जाता हैं या एक मेम्बर के ऊपर के मेम्बर को अप-मेम्बर कहा जाता हैं.

अनुक्रम या चैन के बढ़ने से अतिरिक्त कमीशन मिलता हैं, इसलिए ये लोग ज्यादा से ज्यादा मेम्बेर्स जोड़ने में लगे रहते हैं.  

 नेटवर्क मार्केटिंग में स्पोंसरशिप

कंपनी अपने पुराने मेम्बेर्स के जरिये नए मेम्बेर्स को बुलावा देती रहती हैं और उनको ट्रेनिंग देती रहती हैं. इसी ट्रेनिंग के दौरान कंपनी नए मेम्बेर्स के जुड़ने पर उनसे भी पैसे लेती हैं. जिसके जरिये नया मेम्बर बनता हैं उसको भी कुछ कमीशन मिल जाता हैं.

क्या नेटवर्क मार्केटिंग एक पिरामिड योजना है ?

नेटवर्क मार्केटिंग करने वाली कंपनियां – या तो अपने प्रोडक्ट सेल करती हैं, या अपनी सर्विस प्रोवाइड कराती हैं. लेकिन कुछ कंपनियां ये दोनों ही नहीं करती हैं.

कुछ कंपनियां केवल लोगों से जोइनिंग फीस लेकर उनसे एक चैन सिस्टम के जरिये जुड़ने और कमीशन कमाने को कहते हैं. ऐसा करने से एक पिरामिड का निर्माण होता हैं. जैसे जैसे पिरामिड बड़ा होता हैं वैसे वैसे टॉप पर बैठा मार्केटर इनकम जनरेट करता हैं.

 वास्तव में पिरामिड बेस सरंचना और नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में विभेद करना बहुत मुश्किल हैं.

भारत में नेटवर्क मार्केटिंग तो लीगल हैं, लेकिन पिरामिड स्ट्रक्चर पर आधारित मोडल इल-लीगल हैं.

इल-लीगल होने के बावजूद भी भारत की 98 प्रतिशत नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियां इस मोडल को follow करती हैं. इसी में लाखों लोग फंस जाते हैं.

यकींन मानिये जब कभी आपने नेटवर्क मार्केटिंग के बारें में सोचा होगा तो पिरामिड सरंचना को दिमाग में रखकर ही इनकम की गणना की होगी, जो कि ठीक नहीं हैं.

नेटवर्क मार्केटिंग में रेफरिंग सिस्टम(पिरामिड सरंचना) इसलिए रखा जाता हैं ताकि कंपनी को ज्यादा से ज्यादा मार्केटर मिल सके और ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट सेल हो सके.  

नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी कैसे शुरू करें

1 सबसे पहले ब्रांड नाम के साथ अपने प्रोडक्ट का उत्पादन करे.

2 नेटवर्क मार्केटिंग के लिए एक योजना बनाएं.

3 अपनी एक वेबसाइट बनायें.

4 डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर लोगों को आमंत्रित करें.

5 पेमेंट रिसिव के लिए एक ऑनलाइन पेज बनाये.

6 ट्रेनिंग और प्रोडक्ट इंट्रोडक्शन की प्रक्रिया पूरी करें.

नेटवर्क मार्केटिंग में क्या काम करना पड़ता हैं

नेटवर्क मार्केटिंग एक ऐसा बिजनेस मॉडल हैं जिसमे लोग स्वतंत्र रूप या पर्सन टू पर्सन प्रोडक्ट्स की सैल करते हैं. इस काम के लिए कंपनी के ऑफिस की जरुरत नहीं होती हैं. नेटवर्क मार्केटिंग में जुड़ने वालों को प्रोडक्ट्स बेचने के अलावा अपने डाउन में लोगों को जोड़ने के लिए मेहनत करनी पड़ती हैं. जब उसके अंडर में लोग जुड़ेंगे तभी एक नेटवर्क बन पायेगा और नेटवर्क मार्केटिंग का उद्देश्य पूरा हो पायेगा.  

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