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सभ्यता क्या हैं ? सभ्यता के प्रकार, विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताए

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सभ्यता क्या हैं ? इसकी परिभाषा क्या है ? सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है ? सबसे पहले जानते है कि, सभ्यता और संस्कृति में अंतर क्या है. कई बार हम बोलचाल की भाषा में सभ्यता और संस्कृति को एक ही मान लेते है. लेकिन वास्तव में सभ्यता और संस्कृति दोनों अलग-अलग है. ये दोनों आंशिक रूप से भिन्न है. अंग्रजी में सभ्यता को ‘Civilization’ और संस्कृति को ‘culture’ कहा जाता है.

सभ्यता क्या है ? Meaning of civilization

इसकी की कोई विशिष्ठ परिभाषा नही है. इसके अर्थ को समझ कर यह कहा जा सकता है कि, सभ्यता मानव के सामाजिक एवं भौतिक विकास को बताती है. इससे मानव के प्रारम्भिक विकास का पता चलता है. अतीत से लेकर वर्तमान तक मनुष्य ने जो सम्पूर्ण उन्नति की है चाहे वो भौतिक, मानसिक या आध्यात्मिक रूप से हो, उसे हम ‘सभ्यता’ कहते है. यह भी कहा जा सकता है कि, मनुष्य द्वारा प्रकृति से प्राप्त साधनों और अपने मष्तिष्क का उपयोग कर जो भौतिक प्रगति की है, उसे सभ्यता कहा जा सकता है. सभ्यताए परिवर्तनशील और प्रगतिशील होती है. प्राचीन काल में मानव जंगली जीवन जीते थे. प्रारम्भ में मानव सर्दी,गर्मी, बरसात को सहन करता हुआ जंगलो में रहता था.

कालान्तर में इनसे बचने के लिए गुफाओ, कच्ची झोपड़ियो में रहना शुरू किया. वर्तमान में गगनचुम्बी इमारतो को देखा जा सकता है. पहले मानव जीवन यापन के लिए कंद,मूल और शिकार पर निर्भर रहते थे. इसके बाद मानव ने कृषि, पशुपालन और व्यावसाय करना शुरू किया. प्रारम्भ में मानव आवागमन अपने पैरो से करता था. उसके बाद उसने बैल,ऊंट,और घोड़ो को काम में लिया. वर्तमान में कार,ट्रेन,एयरोप्लेन आदि कई अविष्कार देखे जा सकते है. यही नही अब तो इंसान मंगल ग्रह और चाँद पर बसने की योजना बना रहा है. मानव के जीवन स्तर में इसी परिवर्तन को सभ्यता कहा जा सकता है. ( सभ्यता क्या हैं )

संस्कृति क्या है ? संस्कृति का अर्थ ?

मनुष्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओ से ही संतुष्ट नही हो सकता. क्योंकि भौतिक साधन केवल शरीर की प्यास मिटा सकती है मन की शांति को नही. मानव ने अपने मन और आत्मा को तृप्त करने के लिए जो अपने अन्दर विकास किया है, उसे संस्कृति कहते है. संस्कृति मानव के मनोभाव,विचारधारा और कर्म से निर्मित होती है. जैसे हम मन को शांत रखने के लिए नृत्य,संगीत आदि मनोरंजन करते है. संस्कृति मानव के संस्कारो पर आधारित होती है. ये संस्कार मानव के मन, मश्तिष्क और आत्मा से जुड़े होते है.

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विभिन्न संस्कृतिओ से ही व्र्ह्त सभ्यता का विकास होता है. अर्थात् संस्कृति सभ्यता का ही अंग है. जिसमे मनुष्य के जीवन यापन, रहन सहन, रीति रिवाज आदि शामिल होते है.इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि, सभ्यता मानव द्वारा भौतिक क्षेत्रो में प्रगति को बताती है. जबकि संस्कृति मानव जीवन के आध्यात्मिक, मानसिक विकास को बताती है.

सभ्यता के प्रकार

विश्व की सभी प्राचीन सभ्यता नदीयों के किनारे पनपी थी. जैसे सिन्धु नदी के तट पर सिन्धुघाटी सभ्यता. जिसे हरप्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है. मिस्र की नदी के तट पर बसी मेसपोटामिया या मिस्र की सभ्यता. इसके अलावा माया सभ्यता, चीन की सभ्यता, नील नदी की सभ्यता आदि विश्व की प्राचीनतम प्रकार की सभ्यताए है.

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सिन्धुघाटी या हडप्पा सभ्यता की विशेषताए

सिन्धुघाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओ में से एक है. यह प्राचीन काल में बहने वाली नदी सिन्धु नदी के तट पर बसी थी. इस कारण इसे सिन्धुघाटी सभ्यता कहा गया. इसे हडप्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि 1921 में इस क्षेत्र में सर्वप्रथम खोजा गया शहर हडप्पा ही था. इस सभ्यता का उद्भव तम्रपाषण काल में भारतीय उपमहाद्वीप के उतर-पश्चिम भाग में हुआ था. यह सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी.

इसका विस्तार उतर में जम्मू से लेकर दक्षिण में गुजरात तक और पश्चिम मे बलुचिस्तान से लेकर उतर प्रदेश के मेरठ तक था. हडप्पा सभ्यता से प्राप्त महत्वपूर्ण स्थल निम्नलिखित है. हडप्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी,  कालीबंगा, रोपड़ आदि स्थल मिले है. हडप्पा सभ्यता का सामाजिक एवं धार्मिक जीवन कैसा था ? हडप्पा सभ्यता में समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार होती थी. समाज मुख्यतोर पर मातृसत्तात्मक था. प्राप्त साक्ष्यो के आधार पर यह मातृदेवी की पूजा की जाति थी. इसके अलावा हडप्पा कालीन लोग पशुपति देवता, लिंग, योनि,पशुओ तथा वृक्षों की पूजा करते थे. साथ ही वे टोने-टोडके, तंत्र-मंत्र, ताबीज आदि पर विश्वास रखते थे.

हडप्पा सभ्यता नगर योजना-

यह सभ्यता अपने नगर नियोजन प्रणाली, जल निकासी प्रणाली और सफाई के लिए जानी जाती है. शहर दो भागो में विभक्त था. एक को दुर्ग कहा जाता था. जहा आमतोर पर शासक, उच्च और कुलीन वर्गीय लोग रहते थे. जबकि दूसरा शहर के निचले भाग में था. जहा सामान्य जनता निवास करती थी. सड़के ग्रिड प्रणाली पर आधारित जो एक दुसरे को समकोण पर काटती थी. आमतोर पर प्रत्येक घर में आँगन, जल के स्रोत के रूप में एक कुआं, एक रसोईघर और एक स्नानघर था. घरो के दरवाजे मुख्य सड़क के सामने न खुलकर गली की ओर होते थे. घरो के निकट छोटी-छोटी नालीया जो मुख्य सड़क के पास बड़े नाले में मिलती थी. इस प्रकार हडप्पा सभ्यता का नगर नियोजन सुव्यवस्थित था.

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हडप्पा सभ्यता का आर्थिक जीवन –

यह सभ्यता मुख्यतोर पर नगरीय थी.  परन्तु यहा कृषि, पशुपालन और व्यापार किया जाता था. वस्तुओं का आदान प्रदान विनिमय द्वारा होता था. यहाँ के लोग गेहु, जों, राइ, मटर आदि की खेती करते थे. लोथल नामक स्थल से चावल की खेती के साक्ष्य भी मिले है. इस सभ्यता के लोग बैल, भेस, बकरी, भेड़, कुत्ते, सुअर तथा बिल्ली पालते थे. साथ ही ये लोग हाथी तथा गेंडे से भी परिचित थे.

सिन्दुघाटी सभ्यता के लोगो के जीवन में व्यापार का अधिक महत्त्व था. वे पत्थर, धातु, धातु तथा हड्डीयों से बने मनको का व्यापार करते थे. इस सभ्यता से लिपि भी मिली है जिसे अभी तक पढ़ा नही जा सका है. यहा की लिपि चित्रात्मक थी जो दायी से बाई ओर लिखी जाति थी. हडप्पा सभ्यता का अंत – हडप्पा सभ्यता के विनाश के बारे में अलग अलग इतिहासकारो का अलग-अलग मत  है. कोई मानता है इसका विनाश प्रकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, अकाल या भूकंप से हुआ है. लेकिन कुछ इसके अंत का कारण बाहरी आक्रमण को मानते है. ( सभ्यता क्या हैं )

हडप्पा सभ्यता के बारे में अधिक पढ़ने के लिए यहा पर क्लिक करे- हद्दपा संस्कृति और सभ्यता की हिस्ट्री

वैदिक सभ्यता ( सभ्यता क्या है )

इतिहासकारो ने वैदिककाल को दो भागो में बाँटा है. एक ऋग्वेदिक काल (1500-1000) ईसा पूर्व और दूसरा उत्तर वैदिक काल (1000-600) ईसा पूर्व. आर्यों द्वारा स्थापित यह सभ्यता एक ग्रामीण सभ्यता थी. सर्वप्रथम आर्य पंजाब और अफगानिस्तान के क्षेत्रो में बसे थे. आर्यों के नाम पर ही इसका नाम वैदिक सभ्यता पड़ा. आर्यन संस्कृत के ज्ञानी थे. वैदिक सभ्यता से ही हिन्दू धर्म का सूत्रपात हुआ है. वैदिक सभ्यता के स्रोत हमें वेदों से मिलते है. वेद मूलरुप से चार ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अर्थवेद है. वेदों को आज भी हिन्दू धर्म में पवित्र ग्रंथ माना जाता है. इन चारो वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन है. संस्कृत भाषा में लिखित इन वेदों में वैदिक सभ्यता की सम्पूर्ण जानकारी मिलती है.

सामाजिक जीवन

वैदिक समाज में परिवार पितृप्रधान होता था. अथार्त परिवार का मुखिया पिता होता था. जिसे गृहपति कहा जाता था. संयुक्त परिवार की प्रथा प्रचलन में थी. समाज में स्त्रियों की स्थति सम्मानजनक थी. वैदिक सभ्यता में समाज चार वर्गो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वेश्य और शुद्र में बटा था. जिसका वर्णन ऋग्वेद के 10वे मण्डल में बताया. इन वर्गों का सामाजिक स्तर भिन्न-भिन्न था जो इनके कर्म पर आधारित था. जिसमे ब्राह्मण वर्ग सबसे उच्च तथा शुद्र सबसे निम्न था. स्त्रियों को शिक्षा और वर चुनने का अधिकार था. निर्धनता, भुखमरी, अस्प्र्यश्ता, सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बालविवाह आदि ऐसी कुरीतियों का स्थान नही था. अथार्त वैदिक समाज का सामाजिक जीवन सुव्यवस्थित था. सभ्यता क्या हैं

सभ्यताए-क्या-है

धार्मिक जीवन– ऋग्वैदिक काल में एकेश्वरवाद प्रचलन में था. अथार्त एक ही ईश्वर को मानते थे. जबकि उत्तरवैदिक काल में बहुदेवतावाद प्रचलित था. यानी बहुत सारे ईश्वर को मानते थे. ऋग्वेद में 33 देवी-देवताओ का वर्णन मिलता है. वैदिककाल में यज्ञों की महत्वता बहुत अधिक थी. जैसे अश्वमेघयज्ञ जिसमे अश्व(घोड़े) की बलि दि जाती. तथा पुरुषमेघ यज्ञ जिसमे पुरुष की बलि दी जाती, आदि प्रचलन में थे. आर्थिक जीवन– वैदिक सभ्यता का आर्थिक जीवन कृषि और पशुपालन पर निर्भर था. यहा की मुख्य फसल यव थी. व्यापर अत्यंत सीमित था. ये लोग तांबे और कांसे से परिचित थे. घरेलु उद्योगों का चलन था जैसे बढई, कुम्हार, चर्मकार, वस्त्र-बुनाई एवं दरी उद्योग आदि. वैदिक सभ्यता का अंत- वैदिक सभ्यता के अंत के बाद महाजनपदो का निर्माण हुआ. इसके बाद वैदिक सभ्यता का प्रभाव कम हो गया. ( सभ्यता क्या हैं )

मिस्र की सभ्यता ( सभ्यता क्या है )

इस सभ्यता को नील नदी की सभ्यता भी कहा जाता है. यह सभ्यता विश्व की सबसे लम्बी नदी नील के तट पर विकसित हुई थी. जो कि अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है. मिस्र सभ्यता अपने-आप में काफी रोचक और रहस्यमई है. मिस्र का इतिहास 3400 ईसा पूर्व से भी पुराना रहा है. संभवतः इस सभ्यता को सर्वप्रथम इथियोपिया, नूबी और नीलियम जातियों ने जन्म दिया. मिस्र सभ्यता तीन कालखंड पिरामिड काल, सामंतशाही काल और साम्राज्यवादकाल में बटीं है. जिसमे पिरामिड काल सर्वाधिक रोचक एवं गौरवपूर्ण रहा था.

सभ्यता-क्या-है

सामाजिक जीवन-

मिस्र सभ्यता में निरंकुश राजतंत्र चलता था. राजा का पद वंशानुगत होता था. सामंत और पुरोहितों की सहायता से राजा राज्य शासन संचालित करता था. मिस्र की जनता राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि मानती थी. प्राचीन मिस्र में समाज कई वर्गों में बांटा था. जैसे राजवंश, पुरोहित, सामंत यह सभी उच्च वर्ग के थे. व्यापारी मध्यमवर्ग जबकि किसान, दास एवं अन्य निम्न वर्ग में आते थे. प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर यह माना जाता है कि, यहां के लोग मनोरंजन के लिए नृत्य, संगीत, नटवाजी, पशु खेल, जुआ आदि करते थे.

धार्मिक जीवन-

मिस्र वासी आस्तिक थे अथार्त ईस्वर को मानते थे. ये लोग सूर्य पूजा को अधिक महत्व देते थे. तथा सूर्य, नदिया और चंद्रमा को प्राकृतिक शक्तियों का प्रतीक मानते थे. आर्थिक जीवन- मिस्र वासी कृषि, पशुपालन के अलावा व्यापार भी करते थे. यहां के लोग धातु, लकड़ी, मिट्टी एवं कांच और कपड़े के काम में कुशल थे. ऐसे घरेलू उद्योग शुरू हुए. व्यापार संभवत वस्तु विनिमय द्वारा होता था. उस समय अरब और इथोपिया इस के निकटवर्ती व्यापारिक केंद्र थे. ( सभ्यता क्या हैं )

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गीजा के पिरामिड-

गीजा के पिरामिड क्या है ? पिरामिड मिस्र सभ्यता की कला और स्थापत्य का बेजोड़ नमूना है. जहां पर मिस्र के राजा, रानियों के मरने पर उन्हें दफनाया जाता था. एक तरह से इन्हें समाधि स्थल कहा जा सकता है. जो कई सौ ऊँचे और कई सौ चोड़े बनाए जाते थे. पिरामिड बनाने के पीछे संभवत कोई धार्मिक कारण रहे होंगे. इन पिरामिडो को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि, मिस्र वासी गणित एवं ज्यामितीय से परिचित रहे होंगे. इन्हें आज भी देखा जा सकता है. यह मिस्र की प्राचीन संस्कृति का जीता जागता सबूत है. यह इतने आकर्षक और विशाल है कि, इन्हें विश्व के सात अजूबों में गिना जाता है. पिरामिड मिस्र की सभ्यता की शान है.

मेसोपोटामिया की सभ्यता ( सभ्यता क्या है )

इसे इराक की सभ्यता भी कहते है. क्योंकि वर्तमान में जहा इराक और सीरिया जैसे देश बसे है वहा हजारो ईसा पूर्व यह सभ्यता फली-फूली थी. मेसोपोटामिया मूलतः दो शब्दों से बना है. मेसा यानी ‘मध्य में’ तथा पोटामिया यानी ‘नदिया’ अथार्त दो नदियों के बीच का क्षेत्र. मेसोपोटामिया की सभ्यता दजला और फरात नामक नदियों के मध्य विकसित हुई थी. यह सभ्यता चार अन्य सुमेरिया, बेबीलोन, असीरिया, कैल्डरिया सभ्यताओ का विस्तृत रूप थी.

इसके बारे में इतिहासकार मानते है कि, सुमेरियन ने इसे जन्म दिया. बेबीलोन ने इसे विकसित किया तथा असीरिया ने इसे आत्मसात किया. ऐसा माना जाता है कि, मेसोपोटामिया सभ्यता के लोगो ने सर्वप्रथम खेती और पशुपालन शुरु किया था. यहा के लोग आस्तिक थे. यहा देवताओ को पूजा जाता था. मेसोपोटामिया सभ्यता के अंत के विषय में कहा जाता है कि, सिकन्दर महान ने 331 ईसा पूर्व इसे नष्ट किया और इसपर अधिकार कर लिया था. सभ्यता क्या हैं

माया सभ्यता (Mayan Civiligation)

इसे माया सभ्यता या मेक्सिको की सभ्यता या अमेरिका की प्राचीन सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है. इस सभ्यता का विस्तार मेक्सिको, ग्वेटमाला, होंडुरस और युकाटन द्वीप तक था. माया सभ्यता का आरम्भ लगभग 1500 ईसा पूर्व माना जाता है. जिसमे 300-900 ईसा पूर्व के मध्य यह अपने चरमोत्कर्ष पर थी. इतिहासकार इस सभ्यता को भारतीय सभ्यता की मिलीजुली सभ्यता मानते है. क्योंकि माया भी एक भारतीय शब्द है. और इसके उत्खनन से प्राप्त साक्ष्यो में भगवान गणेश और सूर्य की प्रतिमा मिली है. जिससे यह प्रतीत होता है कि इसका प्राचीन भारतीय सभ्यताओ से संबंध था.

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