Story on Honesty in hindi – ईमानदारी की कहानियां


ईमानदारी पर कहानियां – Honesty is the best policy story in Hindi

यदि तुम अपना ह्रदय ईमानदारी(honesty) से भरा रखोगे तो तुम्हारा शत्रु क्या पूरी दुनिया तुम्हारे सामने हथियार डाल देगी.
हिंदी कहानियां (hindi story on honesty) हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती हैं.

हालाँकि कभी कभी कहानियां(hindi story) पुरानी लगने लग जाती हैं और कभी कभी हम पुराने हो जाते हैं, जो कहानियों के महत्व को समझ नहीं पाते हैं. लेकिन कहानियां हमेशा प्रेरणा ही देती हैं, और कुछ कहानियां तो हमारे ह्रदय तक को छु कर जाती हैं. यहाँ पर हम पढने वाले हैं, ईमानदारी की हिंदी कहानियां (honesty stories in hindi).

अगर आप एक ईमानदार इंसान हैं तो इस लाइन से जरूर परिचित होंगे – Honesty is best policy या हिंदी में “ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है.” क्योंकि ईमानदार का हर काम खुले आम होता हैं.

यहाँ ईमानदारी पर छोटी और नैतिक कहानियां (short story on honesty in hindi) हैं. इन कहानियों के अर्थ को समझते हुए इन कहानियों के निचोड़ को अपने जीवन में जरूर उतारे.

क्या आप ईमानदारी का एक फायदा(story of honesty in hindi) जानना चाहोगे – ईमानदार इंसान न चाहते हुए भी प्रसिद्ध हो जाता हैं.

1 story of honesty in hindi – लालबहादुर शास्त्री जी की ईमानदारी

आपको याद होगा कि लाल बहादुर शास्त्री भारत के दुसरे प्रधानमंत्री थे. एक बार की बात हैं, जब लाल बहादुर शास्त्री भारत के प्रधान मंत्री के रूप में सेवा कर रहे थे, तब एक बार वे एक कपड़ा मिल में गए. शास्त्रीजी ने मिल के मालिक से अपनी पत्नी के लिए कुछ साड़ियाँ दिखाने का अनुरोध किया. मालिक ने उनको मिल की सबसे बेहतरीन साड़ियाँ दिखाईं.


शास्त्री जी ने मिल के मालिक से जब साड़ियों की कीमत पूछी तो उन्हें बहुत महंगी लगी. इसलिए उन्होंने दूसरी सस्ती साड़ियां मांगी. शास्त्रीजी के कहने पर मालिक ने उसे सस्ती साड़ियाँ दिखायीं. लेकिन, अबकी बार भी जो साड़ियाँ उनके सामने रखी गयी थी वे भी शास्त्रीजी को महँगी लगी. शास्त्रीजी ने मना कर दिया, और कहा, कुछ सस्ती वाली दिखाइए.


मिल मालिक को आश्चर्य हुआ और उसने शास्त्रीजी को कहा कि उनकों इन साड़ियों की कीमतों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वे भारत के प्रधान मंत्री हैं और उन्हें साड़ी उपहार के रूप में देना उनका सौभाग्य होगा.
इस पर शास्त्री जी ने उत्तर दिया कि वे इतना महंगा उपहार स्वीकार नहीं कर सकते और वे केवल एक साड़ी लेंगे जो वे खरीद सकते है.


Moral Of This Honesty story -: अपने सम्मानित पद का दुरूपयोग अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए या किसी को दबाने के लिए नहीं करें.

इस कहानी को पढ़े -: अकबर बीरबल की (Akbar Birbal Short Stories)कहानियां

2 imandari ki kahani in hindi – रिश्वत देना भी बे-ईमानी हैं

रिश्वत लेना तो बेईमानी हैं ही, लेकिन रिश्वत देना भी बेईमानी हैं. जब हम रिश्वत देंगे नहीं, तब कोई रिश्वत लेगा नहीं. ईमानदारी की यह कहानी पिपु नाम के शख्स की हैं जो, अभी ड्राइविंग के लिए प्रशिक्षण ले रहा हैं. पिपु को जल्दी से उसका ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए, क्योंकि उसको एक ड्राईवर नौकरी मिलने वाली हैं.

इसलिए पिपु हमेशा ड्राइविंग सीखने के लिए सरकारी कार्यालय में हाजिर होता हैं.
ड्राइविंग करते हुए कुछ दिन बीत जाने के बाद पिपु ने अपने टीचर से फीडबैक माँगा कि उसकी ट्रेनिंग कहाँ तक पहुंची. टीचर ने कहा कि ठीक हैं लेकिन उसका काम रुक सकता हैं.

पिपु ने कहा उसको किसी भी तरह ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए. टीचर बोला इसके लिए तुमको पांच हज़ार रूपये देने होंगे. पिपु को कुछ समझ में नहीं आया और उसने पांच हज़ार देने के लिए हाँ भर दी.


पिपु को यह बात कुछ ठीक नहीं लगी. जैसे जैसे दिन बीतते गए और पिपु के कागजाद को जांच कराने की दिनांक नजदीक आ गई. पिपु ने इसके बारे में ऑनलाइन खोजना चालू किया और जानकारी निकाली की, इस तरह से होने वाले फ्रॉड से कैसे बचे.
पिपु जब टीचर को पैसे देने गया तो उसने अपनी ऊपर वाली जेब में अपना सेलफोने रख लिया और कैमरा चालू कर दिया. वह टीचर पकड़ा गया, और पिपु को उसकी ईमानदारी का फल यह मिला की RTO ऑफिस ने उसका लाइसेंस जारी कर दिया.


इस कहानी का नैतिक(moral story on honesty in hindi) -: जान बुझकर कभी किसी को न ठगे. हो सके तो किसी की मजबूरी का फायदा कभी नहीं उठाये.

cheating in mask
1 honesty story in hindi

3 story on honesty in hindi – अपने ईमान के लिए खेल को हार गए

बॉबी जोन्स अमेरिका के बहुत ही प्रसिद्द गोल्फ के खिलाडी थे. बॉबी जोन्स अपनी ईमानदारी के लिए बहुत प्रसिद्द हैं. एक बार गोल्फ का टूर्नामेंट चल रहा था. अंतिम पड़ाव में जब बॉबी जोन्स का नंबर आया तो उनसे एक गलती हो गयी.


दरअसल हुआ यह की बॉबी अपने स्टिक से निशाना तान रहे थे, तब गलती से उनकी स्टिक बोल से स्पर्श हो गई. जो की गोल्फ के नियम 18 के खिलाफ हैं. जब कभी ऐसा होता हैं तो प्लेयर एक स्टॉक पीछे चला जाता हैं.


लेकिन बॉबी की गलती को किसी ने पकड़ा ही नहीं. निशाना लगाने के बाद एम्पायर उनका रिकॉर्ड लिखने लगे. तब बॉबी खुद ने ही कह दिया कि उनसे गलती हुई हैं, उन्होंने गलती से बोल को एडजस्ट कर लिया.


इस बात को मानने के लिए कोई एम्पायर तैयार नहीं था, लेकिन बार बार कहने पर एम्पायर ने उनको नेगेटिव अंक दिए और बॉबी एक अंक से मैच हार गए.

moral of this honesty -: चीटिंग से जीती हुई ट्रॉफी में कभी सच्ची ख़ुशी नहीं मिलती हैं.

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honesty story video in hindi

4 झूठ बोलने वाला गडरिया – hindi story on honesty

क्या झूठ बोलना बेईमानी हैं? हा! झूठ बोलना बईमानी हैं. हा! कभी कभी झूठ बोलना सही भी हो सकता हैं.
एक बार एक गडरिया था. गडरिये को कुछ काम होने के कारण आज उसने भेड़ों को चराने के लिए उसने अपने बेटे को भेंज दिया. वह लड़का बड़ा ही ढीठ किस्म का था, जबकि उसका पिता एक समझदार इंसान था.


गडरिया कुछ देर में ही अकेलेपन से उब गया, उसने कुछ शरारत करने की सोची. पास में कुछ किसान अपने खेतों में काम कर रहे थे. चूँकि जंगल पास मे ही था, तो भेड़िया कभी भी हमला कर सकता हैं. छोटा गडरिया जोर जोर से चिल्लाने लगा, बचाओ! बचाओ! भेड़िया मेरी भेड़ो को खा रहा हैं. अरे जल्दी आओ.


किसान लोग उसकी बात सुनकर घबरा गए और उसकी मदद करने के लिए जो हाथ में आया उसको लेकर भाग कर आये. किसान भाइयों ने आकर इधर उधर देखा तो उनको कुछ नहीं मिला.


गडरिया का बच्चा रोते रोते हंसने लगा, और बोलने लगा. मैंने सबको उल्लू बनाया, बड़ा मजा आया. अरे यहाँ कोई भेड़िया नहीं हैं, मैंने तो बस ऐसे ही मजाक की. आप लोग जाकर अपने खेत में काम करो.
किसान बच्चे को नादान समझ कर वहां से चले गए.


अगले दिन गडरिये ने फिर से वहीँ घटना दोहराई, एक बार फिर किसान लोगो ने उसको डांटकर छोड़ दिया.
फिर अगले दिन सच में गडरिया आ गया. अबकी बार वह बच्चा सच में रोने लगा. और जोर जोर से चिलाने लगा, बचाओ बचाओ…
किसान भी उसकी हरकतों से तंग आकर अबकी बार उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया, भेडिये ने दो चार भेड़ों को मार डाला. और एक बच्चे को लेकर जंगल में चला गया.


शाम को जब उसके पिता ने पुछा तो बताया कोई उसकी मदद करने नहीं आया. फिर अगले दिन जब गडरिये ने गाँव वालो से कहा की उन्होंने उसकी भेड़ों को क्यों नहीं बचाया.


इसके जवाब में किसानो ने उस बच्चे की हरकत के बारे में बताया. शाम को घर जाकर उसको दो थप्पड़ लगाई और भविष्य में एसी गलती न करने की सलाह दी.


नैतिक(imandari story in hindi) -: अगर आप झूठ बोलते रहेंगे तो सच बोलने पर भी कोई आप पर विश्वास नहीं करेगा. इसलिए, हमेशा सत्य बोलो.

5 story on honesty is the best policy – एक लकड़ी काटने वाले की ईमानदारी

बहुत समय पहले एक छोटे से गाँव में एक लकड़हारा रहता था. वह अपने काम के प्रति बहुत ईमानदार था. वह अपने परिवार को पालने के लिए रोजाना लकड़ी काटता और गाँव में जाकर उनको बेच देता. वह हमेशा इतना कमा लेता जिससे उसके परिवार का खर्चा निकल जाता था.

एक दिन नदी के पास एक पेड़ काटते समय उसकी कुल्हाड़ी उसके हाथ से छूट कर नदी में जा गिरी. नदी इतनी गहरी थी कि वह खुद उसे निकालने की सोच भी नहीं सकता था. उसके पास केवल एक ही कुल्हाड़ी थी जो नदी में चली गई थी. वह यह सोचकर बहुत चिंतित हो गया कि अब वह अपनी जीविका कैसे चलाएगा.


वह बहुत दुखी हुआ और उसने भगवान से प्रार्थना की. सच्चे मन से प्रार्थना करने के कारण भगवान ने उनकी सुन ली, और वहां पर हाजिर हो गए और पूछा, “क्या समस्या है, मेरे बेटे?” लकड़हारे ने समस्या बताई और भगवान से अपनी कुल्हाड़ी वापस लाने का अनुरोध किया.

भगवान ने अपना हाथ नदी में डाला और एक चांदी की कुल्हाड़ी निकाली और पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” लकड़हारे ने कुल्हाड़ी की ओर देखा और कहा “नहीं”. तो भगवान ने अपना हाथ फिर से गहरे पानी में डाला और एक सोने की कुल्हाड़ी दिखाकर पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” लकड़हारे ने कुल्हाड़ी की ओर देखा और कहा “नहीं”. भगवान ने कहा, “फिर से देखो बेटा, यह एक बहुत ही मूल्यवान सोने की कुल्हाड़ी है, क्या तुमको पूरा यकीन है कि यह तुम्हारी नहीं है?” लकड़हारे ने कहा, “नहीं, यह मेरी नहीं है.

भगवान मुस्कराए और अंत में अपना हाथ फिर से पानी में डाला और लोहे की कुल्हाड़ी निकाली और पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” इस पर लकड़हारे ने कहा, “हाँ! यह मेरी है!
भगवान् उसकी ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुए, इसलिए उन्होंने उसकी ईमानदारी के लिए उसको लोहे की कुल्हाड़ी और अन्य दो कुल्हाड़ी भी दे दीं.


नैतिक(moral story on honesty in hindi) -: हमेशा ईमानदार बने रहो. ईमानदारी आपको हमेशा सम्मानित कराएगी.

6 honesty is the best policy in hindi – प्यार और सच्चाई का बंधन

एक बहुत ही सच्चा प्यार करने वाला सादी का जोड़ा जिनको सादी हुए दस साल हो चुके थे. लेकिन उनको अभी तक कोई संतान नहीं हुई थी. उस आदमी का नाम स्टीव और उसकी पत्नी का नाम सारा था.


स्टीव और सारा को बहुत उम्मीद थी की उनकी सादी के ग्याहरवे वर्ष उनको कोई संतान हो जाएगी. क्योंकि उनके परिवार और दोस्तों के बीच तलाक के विषय को लेकर खींचातानी चल रही थी.


लेकिन उनका अटूट प्यार उनको कभी अलग नहीं होने देगा. इसी तरह कुछ महीने और बीत गए.
एक दिन स्टीव अपने काम से घर लौट रहा था, तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी दुसरे आदमी के साथ सड़क पर चल रही थी. स्टीव की पत्नी उस आदमी के साथ बहुत खुश नज़र आ रही थी.  


स्टीव ने इसी तरह एक सप्ताह तक उस पर नज़र रखी, एक दिन तो उस आदमी ने सारा के गाल पर किस देकर घर तक छोड़ने आया.
स्टीव इस बात से बहुत परेशान हो गया और उसके अन्दर बहुत ही ज्यादा गुस्सा भर गया था. एक दिन शाम को जब सारा कमरे में कुछ काम कर रही थी. तभी एक फ़ोन आया, फ़ोन स्टीव ने उठाया और चुपचाप सुनने लगा.


एक आदमी बोला – आज मैं तुम्हारे घर पर आ रहा हूँ. और आज हम सभी को सरप्राइज देने वाले हैं. इतना कहकर उसने फ़ोन को काट लिया.


स्टीव बहुत दुखी हुआ, उसको लगा की उसने अपनी पत्नी को किसी और के लिए हमेशा के लिए खो दिया है. उसने अपने हाथ में पानी के गिलास को तोड़ कर चूर चूर कर दिया.


सारा कुछ टूटने की आवाज़ को सुनकर तुरंत बाहर आई और स्टीव को पुछा तुम ठीक तो हो न. स्टीव ने सारा को जोर से धक्का दिया, और कांच के जग तो जोर से फेका, जिससे सारा के पैर में एक कांच का टुकड़ा घुस गया.
सारा ने गुस्सा का कारण पुछा तो बात सामने आई की वह कुछ दिनों से उसका पीछा कर रहा हैं. वह किसी आदमी के साथ घूम रही हैं.
सारा ने तुरंत उस आदमी को फ़ोन लगाया और वहां पर बुलाया.
उस आदमी ने आते ही स्टीव के हाथ में एक लिफाफा थमाया. लिफाफा को पढ़कर स्टीव की धड़कने रुक सी गयी और उसको खुद की गलती पर अफसोस हुआ.


सारा ने सारी सच्चाई बताई कि वह दो महीनों से गर्भवती हैं और वह आदमी एक डॉक्टर और उसका भाई हैं.
स्टीव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने अपने प्यार पर सक करने की गलती के कारण सारा से माफ़ी मांगी.

सीख(honesty stories in hindi) -: जल्दबाजी में कभी किसी को जज नहीं करना चाहिए, जब तक की आप उसको लेकर पूरे निश्चित नही हो जाते.

7 ईमानदारी की कहानी – गुलेल और एक लड़का

एक बार सेम और उसकी बहन मैरी अपने दादा-दादी के घर गए हुए थे. एक दिन दोनों सेम और मेरी खेत में गुमने गए. सेम के हाथ में एक गुल्लेल था, लेकिंन सेम का कभी निशाना सही नहीं लगता था. खेत में उसने खूब प्रयास किया लेकिन उसका निशाना सही नहीं लगा. फिर वह उदास होकर वापस घर लौटने लगा. उसने मेरी को भी आवाज़ दी. दोनों भाई बहन वापस घर को लौटने लगे.


तब सेम आवेग से बाहर होकर गुल्लेल से निशाना एक बतख की तरफ लगाया, पत्थर सीधा बतख की गर्दन पर जाकर लगा. बतख की गर्दन टूट गयी और मर गयी.


सेम डर गया और उसने बतख को जंगल में छुपा दिया. इतना सब कुछ होने पर मेरी सेम के साथ ही थी. सेम ने मेरी को घर पर बताने से मना किया था.


शाम को जब खाना खाने के बाद दादी ने मेरी को बर्तन धोने के लिए कहा तो, मेरी ने सेम की तरफ आँखे की. सेम समझ गया की उसको मेरी की सहायता करनी हैं, वरना वह सबको बता देगी.


अगले दिन दादाजी ने पुछा बच्चो क्या मेरे साथ मछली पकड़ने चलोंगे, दोनों चलने को राजी हो गए. लेकिन दादी ने कहा कि मुझे खाना बनाने के लिए मेरी की सहायता की जरुरत पड़ेगी.


मेरी ने धीरे से सेम को कहा कि तुमको ‘बतख याद हैं न’.
सेम घर पर ही रुक जाता हैं और मेरी मछली पकड़ने के लिए दादाजी के साथ चली जाती हैं.
सेम ने डरते डरते दादी को सब कुछ सच बता दिया.


दादी घुटनों के बल झुकी और सेम को कहा बेटा मुझे सब पता हैं मैं तो बस यह देख रही थी कि तुम मेरी के इशारों पर कितने दिन नाचने वाले थे.

सीख(stories on honesty in hindi) -: हमेशा अपनी गलतियों को जल्दी ही स्वीकार कर लेना चाहिए. इससे अपराध जल्दी ही दूर हो जाता हैं.  

8 ईमानदारी का किस्सा – अकबर बीरबल(story on honesty in hindi)

एक दिन एक आदमी को सड़क पर एक पोटली मिला. वह आदमी बहुत ही ईमानदार था. वह तुरंत दौड़कर बादशाह अकबर के दरबार में पहुंचा. वहां जाकर उसने बादशाह से कहा कि मुझे ये सड़क पर मिली, न जाने की गिर गयी होगी.


उसी दरबार में एक आदमी आया, जो आकर यह बोला की महाराज मेरी सोने के सिक्कों की पोटली किसी ने चोरी कर ली हैं. 
तभी बीरबल ने उस पोटली को उठा कर कहा कहीं आपकी पोटली यह तो नहीं हैं. उस आदमी ने उस पोटली को हाथ में लेकर सोने के सिक्के गिनकर बोले जहापनाह इसमें पचास मुद्राएँ कम हैं.


बीरबल थोड़े हैरान हुए और पोटली को वापस ले लिया. और उस पोटली को वापस उस आदमी को थमा दिया जिसको यह सड़क पर मिली थी.


बीरबल ने कहा शायद यह पोटली आपकी नहीं हैं. जब कभी आपकी पोटली दरबार में पहुंचेगी, आपको सूचित कर दिया जायेगा. तब तक आप इंतज़ार कीजिये.


इस प्रकार वह आदमी वहां से चला गया. और उसको अपनी गलती का बहुत पछतावा हुआ.

इस ईमानदारी की कहानी से सीख(stories on honesty in hindi) -: ईमानदारी हमेशा पुरस्कृत करती हैं.

9 खुद की ईमानदारी की परख – short story on honesty in hindi

एक बार एक छोटा लड़का एक दवाई की दुकान में गया, दुकान के अन्दर जाकर वह एक सोडा के कार्टून पर चढ गया ताकि वह फोन के बराबर पहुँच सके. फिर उसने एक पता निकाला और नम्बरों को दबाने लगा.
दवाई की दुकान वाला यह सब कुछ देख रहा था.

लड़का: हेल्लो मेडम, क्या आप मुझे अपना गार्डन काटने का काम दे सकती हैं?

महिला: ‘मेरे पास पहले से ही कोई दूसरा गार्डन काटने वाला है।’

लड़का: मेडम, मैं आपके गार्डन को उस व्यक्ति की आधी कीमत पर काट दूंगा जो अब आपका गार्डन काटता है.’

महिला: पर नहीं अभी जो लड़का हैं, वह अच्छे से सफाई कर रहा हैं.

लड़का: पर मेडम मैं आपके बगीचे के अलावा सड़क पर भी सफाई कर दूंगा. आपका घर के बगीचे को सबसे सुन्दर बना दूंगा.

महिला: नहीं, धन्यवाद.

चेहरे पर मुस्कान के साथ, छोटे लड़के ने फ़ोन को रख दिया. स्टोर-मालिक, जो यह सब सुन रहा था, लड़के के पास गया.

दुकान का मालिक: ‘बेटा… मुझे तुम्हारा रवैया बहुत पसंद आया,  क्या तुम मेरे लिए काम करना पसंद करोंगे.

लड़का: ‘नो थैंक्स’.

स्टोर का मालिक: पर क्यों, मैं तुमको उससे भी ज्यादा पैसे दूंगा.

लड़का: नहीं सर, जो जॉब मेरे पास पहले से है उस पर मैं सिर्फ अपना परफॉर्मेंस चेक कर रहा था. मैं वही हूँ जो उस महिला के लिए काम कर रहा हूँ जिससे मैं बात कर रहा था!’

सीख(stories on honesty in hindi) -: इसे हम ‘स्व-मूल्यांकन’ कहते हैं. हमें अपने आप को देखना चाहिए और तुलना करनी चाहिए, अपनी कमजोरियों को खोजना चाहिए और कमजोरियों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए. हमेशा मेहनती, ईमानदार और पूरे समर्पण के साथ काम करें. 

10 आलसी गधे की कहानी – moral story on honesty in hindi

भोला के पास खांड्या नाम का एक गधा था. भोला एक बहुत ही सहिष्णु और दयालु मालिक हैं. लेकिन भोला का गधा बहुत ही आलसी और हमेशा काम से बचने के तरीके ढूंढता रहता था.

एक बार भोला खांड्या की पीठ पर नमक लादकर बेचने के लिए जा रहा था. खांड्या अपनी क़िस्मत को कोसकर जबरदस्ती चल रहा था. तभी उसने कुछ चालाकी करने की सोची, और पास में एक नदी में कूद गया. पानी में गिरने से नमक पानी में घुल गया और उसका बोझ हल्का हो गया. खांड्या बहुत खुस हुआ.


अगले दिन खांड्या ने फिर ऐसा ही किया. कुछ दिनों तक लगातार खांड्या ऐसा हिकारत रहा. भोला को इससे बहुत नुकसान हुआ.
भोला ने खांड्या गधे को सबक सिखाने की सोची. अगले दिन खांड्या पर कपास की पोटलियाँ रख दी.


खांड्या फीर से पानी में कूद गया. लेकिन अबकी बार उसका वजन हल्का नहीं हुआ.बल्कि और ज्यादा हो गया. अब से उसको सीख आ गई. वह चुपचाप अपने रास्ते चलने लगा. भोला भी हमेशा अपने साथ कपास की बोरिया रखता, जब कभी खांड्या गलती करता तो उसकी पीठ को भारी कर देता.

नैतिक(stories on honesty in hindi) -: आलस्य को त्यागकर ईमानदारी से काम लें क्योंकि आलस्य आपको बर्बाद कर देगा.

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