कंपनी के प्रकार(Types of Company hindi) – Company Ke Prakar

कंपनी के प्रकार – Company Ke Prakar

कंपनी के प्रकार क्या होते हैं(Company Ke Prakar)? कम्पनी कितने प्रकार की होती हैं?क्या कोई अकेला आदमी किसी कम्पनी को शुरू कर सकता हैं आइये इन सभी के बारें में जानते हैं? पहले यह जानते हैं कि कंपनी कितने प्रकार की होती हैं?

2013 के पहले कंपनियों का वर्गीकरण, कंपनी अधिनियम 1956 के आधार पर किया गया था. लेकिन 2013 में कंपनी अधिनियम संशोधन के पश्चात् कुछ बदलाव किये गए. जिसके बाद कंपनी के प्रकार में कुछ बदलाव आये हैं. चलिए इनके बारें में विस्तार से जानते हैं कि कंपनी के प्रकार क्या हैं?

कंपनी के प्रकार

भारतीय कंपनी अधिनियम 2013(Indian Companies Act 2013) के अनुसार कंपनियों को उनके दायित्व, नियंत्रण, और निगमन के आधार पर वर्गीकृत किया गया है.

 इनके अंतर्गत –

1 चार्टर्ड कंपनी(chartered company)

2 दायित्व वालीके आधार पर कंपनी(company on liability basis)

3 अंश पूंजी वाली कंपनी(share capital company), शामिल होती हैं.

कंपनी के प्रकार(types of company in hindi)

चलिए अब हम इसको अच्छे से समझते हैं. हम इनको एक-एक करके विस्तार से जानते हैं कि कंपनी कितने प्रकार की होती हैं.

निगमन के आधार पर(on the basis of incorporation)

निगमन के आधार पर कंपनी को तीन भागों में विचाजित किया गया हैं.

  • A चार्टर्ड कंपनी(chartered company)
  • B विधान के द्वारा निर्मित कंपनी(company created by legislation)
  • C निगमित या पंजीकृत कंपनी(incorporated or registered company)

दायित्व के आधार पर कंपनी(company on liability basis)

  • A असीमित दायित्व वाली कंपनी(A company with unlimited liability)
  • B सीमित दायित्व वाली कंपनी((Limited Liability Company)

गारंटी के आधार पर सीमित दायित्व वाली कंपनी(a company with limited liability on the basis of guarantee)

अंशों के आधार पर सीमित दायित्व वाली कंपनी

नियंत्रण के आधार पर(based on control)

  • सरकारी कंपनी(government company)
  • सूत्रधारी कंपनी(facilitator company)
  • सहायक कम्पनी(subsidiary company)
  • सहयोगी कम्पनी(associate company)

अन्य कंपनियां

  • एकल व्यक्ति कम्पनी(Single person company)
  • लघु कम्पनी(Small company)
  • विदेशी कम्पनी(Foreign company)
  • धरा 8 कम्पनी(Section 8 Company)
  •  उत्पाद कंपनी(Product company)

निगमन के आधार पर कंपनी के प्रकार(on the basis of incorporation)

चार्टर्ड कंपनी(chartered company)

चार्टर्ड कंपनी वह कंपनी होती है जिसका निर्माण राजा की आज्ञा के अनुसार राज पत्र पर लिखित नियमों के अनुसार होता था. चार्टर्ड कंपनी को इस प्रकार से समझा जा सकता है कि इसका निर्माण किसी राजा के कहने या उसके फरमान पर होता था. वर्तमान समय में भारत में इस तरह की कोई भी कंपनी संचालित नहीं होती हैं.

भारत की अर्थव्यवस्था एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है. इस कारण से चार्टर्ड कंपनी आज के समय में भारत में संचालित नहीं होती हैं. उदाहरण के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी चार्टर्ड कंपनी थी.

विधान के द्वारा निर्मित कंपनी(company created by legislation)

विधान के द्वारा निर्मित कंपनी में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है, जो भारतीय संसद या विधानसभा के द्वारा बनाए गए कंपनी के सभी नियमों का पालन करती हैं. इसको इस प्रकार से भी समझा जा सकता है कि हमारी सरकार लोक कल्याण के लिए संसद के दोनों सदनों से किसी विशेष कंपनी का प्रस्ताव पास कर कंपनी का निर्माण करती हैं.

उदाहरण के लिए एलआईसी विधान के द्वारा निर्मित कंपनी कम्पनी हैं. एलआईसी, का निर्माण सरकार ने अपने दोनों सदनों से बिल को पास करके किया था. विधान के द्वारा निर्मित कंपनी का उद्देश्य यह होता है कि वह प्रजा का अधिक से अधिक कल्याण कर सके और लोगों का हित कर सके विधान के द्वारा निर्मित की गई कंपनी पर भारतीय संविधान तथा कंपनी अधिनियम के सभी नियम व कानून लागू होते हैं.

 उदाहरण -: भारतीय जीवन बीमा निगम भारतीय रिजर्व बैंक.

निगमित या पंजीकृत कंपनी(incorporated or registered company)

निगमित कंपनियों में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जो या तो कंपनी अधिनियम 1956 का अनुसरण करती हैं या कंपनी अधिनियम 2013 को फॉलो करती है.

उदाहरण -: टाटा, रिलायंस, विप्रो.

दायित्व के आधार पर कंपनी के प्रकार(company on liability basis)

असीमित दायित्व वाली कंपनी(company with unlimited liability)

असीमित दायित्व वाली कंपनियों में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जिनमें कंपनियों का पूरा अधिकार उनके मालिक के हाथ में होता है. असीमित दायित्व कंपनी को अनलिमिटेड कंट्रोल कंपनी भी कहा जाता है. असीमित दायित्व का सही मतलब यह होता है कि वह कंपनी अपना पूरा जोखिम खुद उठाने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं.

 इसको इस प्रकार से भी समझा जा सकता है कि यदि कोई कंपनी किसी भी प्रकार की वित्तीय जोखिम में फंस जाती हैं तो उसकी भरपाई उसकी कंपनी के मालिक के द्वारा ही होती हैं.

सीमित दायित्व वाली कंपनी(limited liability company)

सीमित दायित्व वाली कंपनियों में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जिनमें मालिक के हाथ में पूरा अधिकार नहीं होता है. या मालिक के हाथ में पूरी तरह से कंट्रोल नहीं होता है. सीमित दायित्व वाली कंपनियों को दो भागों में विभाजित किया गया है. इसमें पहला है गारंटी के आधार पर सीमित दायित्व वाली कंपनी और दूसरा हैं अंशों(शेयर) के आधार पर सीमित दायित्व वाली कंपनी.

चलिए इन दोनों कंपनी के प्रकार के बारे में एक-एक करके समझते हैं.

सीमित दायित्व वाली कम्पनी के प्रकार

गारंटी के आधार पर सीमित दायित्व वाली कंपनी(a company with limited liability on the basis of guarantee)

इनमे उन कंपनियों को शामिल इया जाता हैं जिन कंपनियों की स्थापना गारंटी के द्वारा सीमित कंपनी के नियम के अंतर्गत होती हैं और उन कंपनियों के मालिक कोई फिक्स अमाउंट देने की गारंटी देते हैं. जब कभी कंपनी के इन्वेस्टमेंट की बात हो या कंपनी को बंद करने की बात हो या कंपनी का और कोई दूसरा यार दूसरा वित्तीय जोखिम हो इन सभी स्थानों पर कंपनी एक फिक्स अमाउंट देने का वादा करती है.

अंशों के आधार पर सीमित व दायित्व वाली कंपनी(a company with limited liability on equity basis)

यदि कोई कंपनी अंशो के द्वारा सीमित है तो उस कंपनी के पार्षद सीमा नियम कोष्टक में एमपी में वर्णित दायित्व वाक्य कोष्टक में लाइब्रेरी क्लॉस के अनुसार उस कंपनी का सदस्य एक लंबे टाइम के बाद भी अब तक किए गए रकम को का भुगतान करने के लिए उत्तरदाई नहीं होता है अर्थात उसको अपनी संपत्ति प्रॉपर्टी को बेचने का की जरूरत नहीं होती है

अर्थात उसको भुगतान करने के लिए कंपनी की संपत्ति जमीन या जायदाद नहीं बेचनी पड़ती है.

शेयर होल्डिंग के आधार पर सीमित दायित्व वाले कंपनी को दो भागों में बांटा गया है.

शेयर होल्डिंग के आधार पर कंपनी के प्रकार –

  • निजी कंपनी(private company)
  • सार्वजनिक कंपनी(public company)
निजी कंपनी(private company)

निजी कंपनी का सदस्य अपने शेयर को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर नहीं कर सकता हैं. कोई भी निजी कंपनी में कम से कम 2 और अधिकतम 200 मेंबर हो सकते हैं. निजी कंपनी किसी भी तरीके से शेयर को जारी नहीं कर सकती हैं. यह इसके लिए पूरी तरह से प्रतिबंध है.

सार्वजनिक कंपनी(public company)

सार्वजनिक या पब्लिक कंपनी में कंपनी का शेयर होल्डर अपने शेयर को कभी भी ट्रांसफर कर सकता है. सार्वजनिक कंपनियों में सदस्यों की मिनिमम संख्या 7 और मैक्सिमम की कोई लिमिट नहीं है. पब्लिक कंपनी में भी दो प्रकार की कंपनियों में विभाजित किया गया है.

पब्लिक कंपनी के प्रकार

  • लिस्टेड कंपनी
  • अनलिस्टेड कंपनी

लिस्टेड कंपनी

लिस्टेड कंपनी का शेयर पब्लिकली जारी होता हैं, शेयर मार्किट में चलने वाली सभी कंपनियां लिस्टेड होती हैं.

अनलिस्टेड कंपनी

वह कंपनी जो शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं होती है इनको अनलिस्टेड कंपनी के अंतर्गत रखा जाता है.

नियंत्रण के आधार पर कंपनी के प्रकार(based on control)

  • सरकारी कंपनी(government company)
  • सूत्रधारी कंपनी(holding company)
  • सहायक कम्पनी(subsidiary company)
  • सहयोगी कम्पनी(associate company)

सरकारी कंपनी(government company)

सरकारी कंपनियों में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जिनमें सरकार की शेयर होल्डिंग 50 प्रतिशत से अधिक होती हैं. सरकार की सहभागिता में केंद्र सरकार हो सकती हैं, राज्य सरकार हो सकती है. केंद्र और राज्य सरकार दोनों की शेयरहोल्डिंग एक साथ भी हो सकती हैं. इन कंपनियों को सरकारी कंपनी कहा जाता है.

उदाहरण -: हिंदुस्तान लिमिटेड, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, भारतीय दूरसंचार निगम लिमिटेड(बीएसएनएल).

सूत्रधारी कंपनी या होल्डिंग कंपनी(holding company)

होल्डिंग कंपनी में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जिनका 50 प्रतिशत से अधिक शेयर किसी दूसरी कंपनी के हाथ में होता है.

उदाहरण के लिए नेटवर्क 18 जो कि मुकेश अंबानी की कंपनी है इस कंपनी की 50% से अधिक शेयरहोल्डिंग रिलायंस के पास हैं.

नेटवर्क एक सहायक कंपनी है और रिलायंस एक होल्डिंग कंपनी हैं.

सहायक कंपनी(subsidiary company)

सहायक कंपनी में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जो किसी होल्डिंग कंपनी के अंडर होती हैं. ऊपर वाले उदाहरण में नेटवर्क 18 एक सहायक कंपनी है और रिलायंस एक होल्डिंग कंपनी है.

उदाहरण -: रिलायंस रिटेल, जिओ सावन, जिओ पेमेंट बैंक ये सभी रिलायंस इंडस्ट्री की सहायक कंपनियां है.

सहयोगी कंपनी(associate company)

सभी कंपनियों में उन कंपनियों को शामिल किया जाता है जिसका किसी भी कंपनी में 20% के आसपास की शेयरहोल्डिंग होती है.

क्या कोई अकेला आदमी किसी कम्पनी को शुरू कर सकता हैं ?

हाँ! अकेला आदमी खूद की कम्पनी शुरू कर सकता हैं. 2013 केबिजनेस अधिनियम के अनुसार कोई भी अकेला आदमी अपनी कंपनी शुरू कर सकता हैं.

“कंपनी के प्रकार” के बारें मे आपने क्या सीखा

यहाँ हमने भारत देश के अन्दर विभाजित कंपनियों के प्रकार के बारें में जाना. अगर आप बिजनेस से सम्बन्धित दूसरी पोस्ट्स को अधनपढ़ना चाहते हैं तो हमारे ब्लॉग को निशुल्क सब्सक्राइब करें.

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